पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के उपचार के लिए प्राकृतिक उपाय

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What Are The Natural Remedies For PCOS Every Woman Should Know

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या होती है। इस समस्या के दौरान ओवरी  फीमेल हार्मोन के मुकाबले मेल हार्मोन का अधिक उत्पादन शुरु कर देती है। ऐसे में अंडाशय में तरल पदार्थ से भरी हुई अल्सर पैदा हो जाती है। यह मेटाबॉलिज्म और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है साथ ही डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और फर्टिलिटी से संबंधित समस्याएं पैदा कर देती है। कुछ प्राकृतिक उपायों की मदद से इस समस्या को कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ प्राकृतिक उपायों के बारे में जो पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के बुरे प्रभाव को कम करते हैं। [ये भी पढ़ें: वेजाइना में जलन महसूस होने के पीछे क्या कारण होते हैं]

1.वजन कम करें: अगर आपका (बीएमआई) बॉडी मास इंडेक्स स्वस्थ रेंज से अधिक है तो पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या को कम करने के लिए आपको अपना वजन कम करना जरुरी होता है। वजन कम करने से मासिक धर्म चक्र नियमित होता है और गर्भाधारण की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। वजन घटने से आपके ब्लड शुगर का लेवल भी कम हो जाता है जो कि स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

2.एंटी-इंफ्लेमेंट्री खाद्य पदार्थों का सेवन करें: इस स्थिति में एंटी-इंफ्लेमेंट्री खाद्य पदार्थों का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है। हल्दी, अदरक, लहसुन आदि में एंटी-इंफ्लेमेंट्री गुण होते हैं ये अल्सर को खत्म करने में ओवरी की मदद करते है। साथ ही वजन कम करने, ब्लड प्रेशर कम करने और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करते हैं। [ये भी पढ़ें: बिकनी वैक्स करने के बाद क्या करें]

3.दालचीनी: दालचीनी इंसुलिन का स्तर बढ़ाती है और पीरियड्स साइकल को रेगुलेट करती है। इसी के साथ यह एंटी-इंफ्लेमेंट्री पदार्थ है ऐसे में दालचीनी का पानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को खत्म करने में मदद करता है।

4.ग्रीन टी: ग्रीन टी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करती है जिससे अल्सर बढ़ने का खतरा कम हो जाता है। साथ ही यह इंसुलिन के स्तर को कम करती है। रोजाना 2 कप ग्रीन टी पीने से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को कम करने में मदद मिलती है।

5.आंवला: आंवला पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या को खत्म करने में लाभकारी होता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेंट्री गुण होते हैं। साथ ही यह हार्मोन्स के कार्य को बैलेंस करता है और धीरे-धीरे अल्सर को खत्म करने में भी मदद करता है। [ये भी पढ़ें: ब्रेस्ट के ढ़ीले हो जाने से जुड़े मिथक और सच]

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