मेनोपॉज के दौरान आपकी डाइट हार्मोन को कैसे प्रभावित करती है

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how your diet affect your hormones during menopause

हार्मोन हमारे शरीर के केमिकल प्रोसेस का हिस्सा होते हैं। व्यावहारिक रूप से हार्मोन हमारे शरीर की हर शारीरिक प्रक्रिया को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं, जैसे- मेटाबॉलिज्म, प्रतिरक्षा प्रणाली, मासिक धर्म, प्रजनन आदि। शरीर के उचित रुप से कार्य करने के लिए सही हार्मोनल संतुलन होना जरुरी है। आपके आहार में शामिल कुछ खाद्य पदार्थ जहां हॉर्मोन संतुलन को बनाएं रखते हैं वहीं कुच खाद्य पदार्थ इस संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। इसलिए आपको संतुलित आहार लेने की आवश्यक होती है। खासकर तब जब आप मेनोपॉज के दौर में हैं। प्रत्येक महिला अपने जीवन में इस अवधि का अनुभव करती है जिसके दौरान होने वाले हार्मोनल असंतुलन के कारण उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ता हैं। इसलिए अगर आप सही डाइट लेती हैं तो इस समस्या को कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि मेनोपॉज के दौरान आपकी डाइट हार्मोन को कैसे प्रभावित करती है और इसे कैसे संतुलित करें। [ये भी पढ़ें: ब्रेस्ट के नीचे पड़ने वाले रैशेज को कुछ उपायों की मदद से करें दूर]

एस्ट्रोजन
एस्ट्रोजेन महिलाओं के शरीर में पाया जाने वाला मुख्य सेक्स हार्मोन है। यह आपके मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है और गर्भावस्था के लिए आपके गर्भाशय को तैयार करता है। जब आप मेनोपॉज के दौर में होती हैं तो आपके एस्ट्रोजन का स्तर काफी हद तक गिर जाता है। इस दौरान रात में पसीना आना, मूड में बदलाव और मासिक धर्म में अनियमितता जैसे लक्षण शामिल हैं।

क्या खाएं
फाइटोस्ट्रोजन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने से आपको मेनोपॉज के लक्षणों को दूर करने में मदद मिल सकती है। खाद्य पदार्थ जैसे सोया में फाइटोस्ट्रोजन की प्रचुर मात्रा होती है। [ये भी पढ़ें: मासिक धर्म के दौरान हाइजीन टिप्स का ध्यान रखना है जरुरी]

इंसुलिन और ग्लूकागन
आपके आहार से प्रभावित होने वाले हार्मोन में इंसुलिन सबसे ज्यादा सामान्य है। जब आप कार्ब्स वाले खाद्य पदार्थ खाते हैं तो इनमें मौजूद ग्लूकोज के कारण इंसुलिन का स्तर बढ़ता है। वही ग्लूकागन एक अन्य अग्नाश्यी हार्मोन है। यह इंसुलिन के विपरीत काम करता है। बहुत अधिक समय तक कुछ ना खाने के कारण आपके शरीर में ग्लूकागन रिलीज होता है। मेनोपॉज के दौरान इन हार्मोन के कारण वजन बढ़ने या डायबिटीज होने की संभावनाएं होती हैं।

क्या खाएं
संतुलित आहार लें। अगर आप अधिक कैलोरी वाले आहार लेती हैं तो इससे वजन बढ़ सकता है। केवल उतनी ही कैलोरी खाएं जितनी आप एक दिन में बर्न करती हैं।

कोर्टिसोल
कोर्टिसोल का स्राव एडर्नल ग्लैंड से होता है। इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहते हैं जो तनाव की स्थिति में हमारा शरीर रिलीज करता है। मेनोपॉज के दौरान कोर्टिसोल का उच्च स्तर विशेष रूप से परेशान कर सकता हैं, क्योंकि मेनोपॉज पहले से ही आपके शरीर में फैट को बढ़ा सकता है और स्ट्रेस के होने से वजन और बढ़ता है।

क्या खाएं
कैफीन और एल्कोहल के कारण आपके शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है इसलिए मेनोपॉज के दौरान कैफीन और एल्कोहल का सेवन कम या बंद कर दें।

संतुलित आहार क्यों है जरुरी
आप जिंदगी के किसी भी दौर में क्यों ना हो, संतुलित आहार लेना बेहद जरुरी है। जितनी कैलोरी बर्न कर रहे हैं, उससे ज्यादा कैलोरी का सेवन ना करें। फल, सब्जियां, अनाज, कम फैट वाले डेयरी उत्पाद और लीन प्रोटीन आदि को आहार में शामिल करें। [ये भी पढ़ें: महिलाओं के लिए कितनी कैलोरी का सेवन करना कैलोरी]

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