हर उम्र में अपनी वेजाइना का कैसे ध्यान रखें

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how to take care of your vagina at every age

महिलाओं का स्वास्थ्य कई चीजों पर निर्भर करता है। इनमे मानसिक स्वास्थ्य, पाचन तंत्र, प्रजनन स्वास्थ्य और योनि स्वास्थ्य शामिल होते हैं। महिलाओं के स्वस्थ रहने के लिए वेजाइना का स्वस्थ होना बेहद जरुरी होता है। समय और उम्र के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं जिससे आपकी वेजाइना में भी कई बदलाव होते हैं। 20 की उम्र हो या 30, 40 और 50 की हर उम्र में वेजाइना का स्वस्थ होना जरुरी होता है। कई बार महिलाएं अपनी वेजाइना के स्वास्थ्य का ध्यान रखना भूल जाती हैं जिससे कई समस्याएं होने लगती हैं। तो आइए आपको बताते हैं कि हर उम्र में महिलाओं को वेजाइना का कैसे ध्यान रखना चाहिए। [ये भी पढ़ें: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के उपचार के लिए प्राकृतिक उपाय]

20 की उम्र में: 20 की उम्र में वेजाइना का ध्यान रखना ज्यादा मुश्किल नहीं होता है। इस दौरान सेक्सुअल ड्राइव बढ़ने की वजह से आपको थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही सेक्सुअल डिजीज से बचने के लिए सावधानियां बरतनी चाहिए। इस दौरान किसी तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट कराने की कोशिश ना करें।

30 की उम्र में: 30 की उम्र के दौरान प्रेग्नेंसी की वजह से वेजाइना का लचीलापन कम हो जाता है। ओरल कॉन्ट्रासेप्शन की वजह से वेजाइनल ड्राईनेस और समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको लंबे समय से वेजाइनल ड्राईनेस या खुजली की समस्या है तो डॉक्टर से कंसल्ट करें। [ये भी पढ़ें: कौन सी चीजें आपके पीरियड्स को प्रभावित करती हैं]

40 की उम्र में: पीरियड्स बंद होने से कुछ समय पहले यानि पेरीमेनोपॉज के दौरान वेजाइना में कई बदलाव आते हैं। क्योंकि शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाता है और वेजाइना की वॉल शुष्क और पतली हो जाती है। इसे वेजाइनल एट्राफी कहते हैं। जिसकी वजह से वेजाइना में जवन, लालपन, डिसचार्ज, खुजली, पेशाब करते समय जलन और यौन संचारित रोग होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस दौरान रोजाना यौन संबंध बनाने से वेजाइनल एट्रॉफी कम हो जाता है और वेजाइना में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। इसके साथ ही वेजाइना को स्वस्थ रखने के लिए वेजाइनल मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें।

50 की उम्र में: 50 की उम्र में पीरियड्स बंद हो जाते हैं और शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाता है। 50 की उम्र में वेजाइनल एट्रॉफी की समस्या होना आम होता है। एस्ट्रोजन का लेवल कम होने की वजह से वेजाइना में एसिडिटी बदल जाती है जिससे बैक्टीरिया की ग्रोथ बढ़ जाती है और इंफ्केशन होने का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए वेजाइनल हार्मोन थेरेपी ले सकते हैं। इससे वेजाइनल एट्रॉफी के लक्षण कम होते हैं। इसके साथ ही ब्लेडर ट्रेनिंग एक्सरसाइज, वजन स्वस्थ रखकर, धूम्रपान छोड़ना जैसे कुछ टिप्स की मदद से वेजाइना को स्वस्थ रखा जा सकता है। [ये भी पढ़ें: घर पर कैसे बनाएं नेचुरल वेजाइनल वॉश]

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