मेनोपॉज से जुड़ी जानकारी जो महिलाओं को जाननी चाहिए

Essential-Facts About Menopause That Every Women Should Know

मेनोपॉज की वजह से कई समस्याएं हो जाती हैं जो असहज महसूस करवाती है। मेनोपॉज एक ऐसी स्थिति होती है जिसके दौरान महिलाओं के शरीर में अंडे का उत्पादन होना बंद हो जाता है और साथ ही एस्ट्रोजेन का उत्पादन भी बंद हो जाता है। इसके कारण महिलाओं के शरीर में कई हॉर्मेनल बदलाव भी आते हैं और साथ ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। इसके अलावा महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याएं भी हो जाती हैं जैसे- मूड स्विंग्स या हॉट फ्लैश। मेनोपॉज आने का सही समय 40 की उम्र या उसके बाद होता है लेकिन कई महिलाओं को समय से पहले हो जाता है और ये उनके शरीर को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं मेनोपॉज से जुड़ी जानकारी जो महिलाओं को जानना जरूरी होता है। [ये भी पढ़ें: उम्र के साथ वेजाइना में क्या बदलाव आते हैं]

आखिरी मासिक धर्म चक्र के 12 महिने बाद मेनोपॉज होता है:
कई महिलाओं को ऐसा लगता है कि मेनोपॉज अचानक से आता है, लेकिन ऐसा नहीं है। मेनोपॉज एक दिन में नहीं होता है बल्कि इसे आने में पूरा 12 महिने का समय लगता है। अपने आखिरी मासिक धर्म चक्र के 12 महिने के बाद आप मेनोपॉज की स्थिति आती है। इसके दौरान आप अनियमित पीरियड्स का सामना करते हैं।

प्रीमेनोपॉज के लक्षणों का अनुभव करती हैं:
बहुत सी महिलाएं प्रीमेनोपॉज के लक्षणों का अनुभव करती हैं। हॉट फ्लैश, नींद ना आने की समस्या, योनी में सूखापन हो जाना, मूड स्विंग्स या फिर तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई हॉर्मोनल बदलाव भी आते हैं। [ये भी पढ़ें: वर्कआउट जो आप पीरियड्स के दौरान कर सकती है]

त्वचा का रूखी और बेजान हो जाना:
जो महिलाएं मेनोपॉज के स्थिति में होती हैं उन्हें रूखी और बेजान त्वचा का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा ना स्कैल्प में खुजली का समस्या भी होने लगती है। इसलिए इस दौरान मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प होता है।

हड्डियों को प्रभावित करता है:
यह समस्या एस्ट्रोजेन की कमी के कारण होता है। कई महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान बोन डेंसिटी की समस्या भी होती है। अगर आपको भी ऐसी कोई समस्या हो रही है तो आपको अपने शरीर में विटामिन-डी के स्तर को चेक करवाना चाहिए और साथ ही एक्सरसाइज भी करने की जरूरत होती है।

हृदय रोग के खतरे को बढ़ाता है:
एस्ट्रोजेन स्ट्रोक और हृदय रोग के खतरे से बचाव करता है। लेकिन मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजेन के स्तर में गिरावट होती है जिसके कारण हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है और साथ ही कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर होने की संभावना को भी बढ़ाता है। [ये भी पढ़ें: यीस्ट इंफेक्शन के अलावा वेजाइनल इचिंग के और क्या कारण हो सकते हैं]

 

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