गर्भपात से जुड़े मिथक जिनपर महिलाएं अभी भी विश्वास करती हैं

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common Myths about abortion most women believe

अधिकतर महिलाएं अपनी ही प्रजनन प्रणाली के बारे में भ्रमित होती है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्हें कम जानकारी होती है। महिलाओं की प्रजनन प्रणाली से जुड़े कई मामलों पर वो बातें नहीं करती हैं और इसी कारण इन्हें बेहतर नहीं समझ पाती है। इस तरह के मुद्दों पर बात करना लोग गलत मानते हैं और इसके परिणामस्वरुप गलत धारणाएं बनती जाती हैं। यही गलत धारणाएं समय के साथ मिथक बन जाती है। ऐसे ही कई मिथक गर्भपात को लेकर प्रचलित है जिन पर महिलाएं लंबे समय से विश्वास करते आ रही हैं। हालांकि आपको इनके पीछे का सच जानकर इन मिथकों को ठुकराना चाहिए। [ये भी पढ़ें: वेजाइनल हाइजीन के लिए जरुरी टिप्स]

गर्भपात स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है
यह सबसे बड़ा मिथक है जिस पर महिलाएं विश्वास करती हैं कि गर्भपात कराने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ये महत्वपूर्ण है कि आप सुरक्षित वातावरण में एक पेशेवर विशेष से ही गर्भपात कराएं। सही सावधानी बरतें और डॉक्टर की सलाह लेते रहे। अगर आप सही तरीकों का इस्तेमाल करते हैं तो गर्भपात के दौरान जटिलताओं की संभावनाएं बहुत कम होती हैं।

आप फिर से गर्भधारण नहीं कर सकते हैं
बहुत से लोग गर्भपात को आने वाली गर्भावस्था से जोड़ते हैं। हालांकि पहली तिमाही में कराया गया गर्भपात आपकी प्रजनन प्रणाली पर कोई बुरा प्रभाव नहीं डालता है। यह केवल एक मिथक है कि आप गर्भपात कराने के बाद फिर से गर्भधारण नहीं कर सकती हैं। [ये भी पढ़ें: गलत साइज का ब्रा पहनने से होने वाले नुकसान]

गर्भपात के दौरान भ्रूण को दर्द महसूस होता है
ऐसा माना जाता है कि गर्भपात के दौरान गर्भ में पल रहे भ्रूण को दर्द का सामना करना पड़ता है हालांकि यह भी एक मिथक है। रिसर्च बताते हैं कि गर्भावस्था के 24वें सप्ताह तक भ्रूण को किसी भी तरह का कोई दर्द महसूस नहीं होता है क्योंकि उसके शरीर में इस समय तक नर्व सिस्टम विकसित नहीं होता है और ना ही वह किसी सेंसेशन को महसूस करता है।

स्व-गर्भपात सुरक्षित होता है
बहुत सी महिलाएं इस मिथक पर भी विश्वास करती हैं हालांकि यह आपके लिए हनिकारक हो सकता है। जो लोग सोचते हैं कि दाइ की मदद से घर पर ही गर्भापत कराया जा सकता है वो गलत सोचते हैं। इस तरह के तरीके महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं और इनके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

गर्भपात के बाद भावनात्मक दुख
एक रिसर्च के दौरान महिलाओं पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि गर्भपात कराने वाली महिलाओं में 95 प्रतिशत महिलाएं गर्भपात के बाद भावनात्मक दुख महसूस नहीं करती हैं। गर्भपात के बाद किसी तरह की मानसिक अवस्था के बारे में कोई चिकित्सीय सबूत नहीं हैं। हालांकि यह बात एक महिला से दूसरी महिला के लिए अलग हो सकती है। [ये भी पढ़ें: संकेत जो बताते हैं कि आपके शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ रहा हैं]

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