क्रायोथेरेपी क्या है और कैसे है फायदेमंद

क्रायोथेरेपी एक ऐसी थेरेपी होती है जिसे मसल्स का दर्द कम करने और नसों को आराम देने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। यह एनर्जी को बढ़ाने के लिए भी उपयोगी होती है। एथलीट और खिलाड़ीयों की नसों में आने वाले खिंचाव और दर्द को दूर करने के लिए इस थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। क्रायो का मतलब होता है ठंडा और थेरेपी का मतलब होता है ईलाज की प्रक्रिया। जैसी का नाम से ही स्पष्ट होता है, क्रायोथेरेपी की प्रक्रिया बेहद कम तापमान पर काम करती है। आइए जानते हैं कि क्या है क्रायोथेरेपी और कैसे यह है उपयोगी। [ये भी पढ़ें: संकेत जो बताते हैं आपका शरीर बड़ी समस्याओं से ग्रसित हो सकता है]

क्या होती है क्रायोथेरेपी: इस थेरेपी में दर्द से पीड़ित व्यक्ति को नग्नावस्था में एक चेंबर में सुलाया जाता है। इस चेंबर में लिक्विड नाइट्रोजन होता है। चेंबर का तापमान बेहद कम होता है। इस प्रक्रिया में शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। हालांकि इतने कम तापमान में रहना काफी मुश्किल होता है लेकिन यह शरीर के दर्द वाले स्‍थान के बढ़े हुए तापमान को कम करता है। यह थेरेपी रक्‍त संचार की गति को बढ़ाती है और तंत्रिकाओं के वेग को भी कम कर देता है जिसके कारण दर्द काबू में आ जाता है। क्रायोथेरेपी सूजन के दर्द को कम करने के साथ ही इम्यून सिस्टम को भी बूस्ट कर देती है। आइए जानते हैं इसके अन्य लाभों के बारे में।

1. मूड अच्छा होता है: क्रायोथेरेपी के कारण एंडोर्फिन हार्मोन के स्तर में वृद्धि होती है जो कि मूड को अच्छा करने के लिए आवश्यक हार्मोन होता है। इसलिए यह तनाव को कम करके मूड को अच्छा करती है। [ये भी पढ़ें: भोजन को अच्छे से चबा कर खाने से क्या फायदे होते हैं]

2. वजन कम करती है: सेल्युलाईट त्वचा कीअतिरिक्त वो कोशिकाएं होती हैं जो महिलाओं की जांघ, कूल्हों और पैरों पर जमा हो जाती हैं। यह आमतौर पर जांघों पर ही जमा होती है जिससे वजन बढ़ा हुआ लगता है। लेकिन क्रायोथैरेपी फैट टिशू को हाइड्रेट कर देती है और इससे सेल्युलाइट कम हो जाता है और इससे वजन कम करने में मदद मिलती है। साथ ही यह त्वचा की अन्य समस्याएं जैसी एक्जिमा आदि को भी कम करता है।

3.वर्कआउट में गति मिलती है: क्रायोथेरेपी से थकान तुरंत कम होती है। 3 मिनट के एक सेशन में ही इसमें थकान कम हो जाती है और भरपूर ऊर्जा मिलती है। इससे वर्कआउट और कार्य करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती है।

4.डिमेंशिया से बचाता है: क्रायोथेरेपी सूजन को कम करती है जिससे डिमेंशिया का खतरा भी कम हो जाता है। एक अध्ययन के अनुसार इस थेरेपी से सूजन कम होती है और ऑक्सीडेटिव तनाव को भी कम करने में मदद मिलती है जिसका सीधा संबंध डिमेंशिया से होता है।

5.माइग्रेन के दर्द को कम करने में मदद करता है: क्रायोथेरेपी माइग्रेन के कारण होने वाले सिर दर्द को भी कम करती है। एक रिसर्च के अनुसार यह माइग्रेन के दर्द को कम करने के लिए भी यह थेरेपी उपयोगी है। साथ ही यह इंफ्लेमेशन कम करके डिप्रेशन से बचाता है। [ये भी पढ़ें: खाने से जुड़ी आदतें जो आपके जीवनकाल को बढ़ाती हैं]

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