चीनी के विकल्प के रूप में करें इन खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल

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दिल को सेहतमंद रखने के लिए उतना ही शुगर(चीनी) का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे हमें 100 से 150 कैलोरीज तक ऊर्जा मिल सके। खानें में ऊपर से चीनी या शुगर सिरप डालना एडड शुगर कहलाता है और इस शुगर का इस्तेमाल खाने में कम से कम होना चाहिए, क्योंकि चीनी से हमारे शरीर के ऊतक बुरी तरह प्रभावित होते हैं, जिससे मोटापा, डायबिटीज, दांत टूटने, हृदय रोग आदि बीमारियां हो जाती है। ज्यादा शुगर की मात्रा से बचने के लिए आप शुगर की जगह इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन विकल्पों के बारे में। [ ये भी पढ़ें: विटामिन्स के सेवन की जानकारी: क्या खाएं और क्या ना खाएं]

1. शहद:

use these natural-sweeteners-sugar-alternativesशहद प्राकृतिक रुप से मिठास युक्त होता है। शहद में 80 प्रतिशत प्राकृतिक मिठास होती है 18 प्रतिशत पानी होता है, साथ ही इसके 2 प्रतिशत भाग में एंजाइम्स, मिनरल्स, विटामिन B, जिंक, पोटेशियम, कैल्शियम आदि होते हैं, इसलिए ये शरीर के लिए लाभकारी है और चीनी का अच्छा विकल्प है।

2. खजूर:

use these natural-sweeteners-sugar-alternativesखजूर आयरन से भरपूर होता है, साथ ही इसमें पोटैशियम, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, विटामिन B, A और विटामिन c होता है। साथ ही इसमें एंटी- इंफ्लेमेंट्री, एंटी-इन्फेक्टिव गुण होते हैं इसलिए ये मीठा होने के साथ- साथ सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। इसलिए खजूर को सेहतमंद होने के साथ- साथ शुगर का अच्छा विकल्प होता है।[ ये भी पढ़ें: केले का सेवन करना कैसे अच्छी नींद के फायदेमंद होता है]

3. कोकोनट शुगर: इस चीनी को नारियल के फूलों को काटकर उनके रस से बनाया जाता है, इसे चीनी के विकल्प के रुप में सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें विटामिन c,पोटैशियम, जिंक , कैल्शियम आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। इसलिए यही चीनी का अच्छा विकल्प होने के साथ- साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

4.स्टेविया: स्टेविया उष्ण-कटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाने वाला एक पौधा है। यह बाकी सारी शुगर सिरप से 200 गुना अधिक मीठा होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल शुगर और शुगर सिरप बनाने में करते हैं, ये प्राकृतिक रुप से मिठास भरा होता है, लेकिन साधारण चीनी की तरह इसमें कार्बोहाइड्रेट और फैट नहीं होता इसलिए ये चीनी का अच्छा विकल्प है। [ ये भी पढ़ें: इन संकेतों से होती है शरीर में प्रोटीन की कमी की पहचान]

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