संकेत जो बताते हैं कि आप ग्लूटेन इंटॉलरेंट हैं

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signs that suggest you are gluten intolerant

जो लोग वजन कम करने की सोच रहे होते हैं वह ग्लूटेन फ्री डाइट फॉलो करना शुरु कर देते हैं। मगर बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि ग्लूटेन होता क्या है। ग्लूटेन एक केमिकल होता है जो गेंहू, बार्ली जैसे अनाजों में पाया जाता है। कुछ लोगों को ग्लूटेन से दिक्कत होती है जिसकी वजह से उनके शरीर में एलर्जी हो जाती है। यह ब्रेड, पास्ता, नूडल्स जो अनाज से बने होते हैं। इसके सेवन से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। साथ ही इम्यून सिस्टम को भी हानि पहुंचती है। अगर आपको भी ये सारे संकेत दिख रहे हैं तो हो सकता है आपको भी ग्लूटेन इंटॉलरेंट की समस्या हो। [ये भी पढ़ें: गर्मियों में कौन से खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए]

अचानक से वजन बढ़ना: जिन लोगों को ग्लूटेन इंटॉलरेंट की समस्या होती है वह भोजन से पोषक तत्व प्राप्त नहीं कर पाते हैं। जिसकी वजह से पाचन में समस्या होती है साथ ही कैलोरी ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाती हैं। जिसके परिणामस्वरुप भोजन फैट में बदल जाता है और वजन बढ़ने लगता है।

इम्यून सिस्टम का अनियमित कार्य: अगर आपको ग्लूटेन इंटॉलरेंट की समस्या हो और आप ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन कर लें तो शरीर के अच्छे बैक्टीरिया पर प्रभाव पड़ता है। हमारा इम्यून सिस्टम अच्छे बैक्टीरिया को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और बुरे बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। ग्लूटेन अच्छे बैक्टीरिया को प्रभावित करके इम्यून सिस्टम के कार्य में अनियमितता लाता है। [ये भी पढ़ें: कारण जिनसे आपको इंसोम्निया हो सकता है]

ओरल हेल्थ को प्रभावित करता है: जो लोग ग्लूटेन इंटॉलरेंट होते हैं उन्हें ओरल प्रॉब्लम होने की संभावना ज्यादा होती है। यह मसूड़ों के ऊतकों को प्रभावित करता है और दांतों पर प्रभाव पड़ता है।

स्किन एलर्जी: जो लोग ग्लूटेन इंटॉलरेंट होते हैं उनका ग्लूटेन युक्त फूड्स का सेवन करने से त्वचा पर एलर्जी हो जाती है। उनके शरीर पर रैशेज और एलर्जिक रिएक्शन हो जाते हैं। साथ ही असहज महसूस होता है।

जोड़ों और मसल्स में दर्द: जो लोग ग्लूटेन इंटॉलरेंट होते हैं उनको सबसे ज्यादा असर जोड़ों औप मसल्स पर पड़ता है। ग्लूटेन युक्त फूड्स में मौजूद प्रोटीन मसल्स में नहीं मिल पाता है। जिसकी वजह से जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और सूजन की समस्या हो जाती है। [ये भी पढ़ें: रात को देर से सोने के क्या फायदे होते हैं]

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