ध्वनि प्रदूषण से शरीर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव

Side Effects Of Noise Pollution On Your Health

तीव्र शोर-गुल और आवाज ध्वनि को प्रदूषित करते हैं इससे सुनने से या लंबें समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से आपको कई शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण किसी और प्रदूषण की तरह की मानव जीवन पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके साथ ही यह कार्यक्षेत्र, ऑफिस, घर आदि में हमारे काम, नींद और अन्य क्रिया-कलाप को भंग करता है। आइए जानते हैं कि ध्वनि प्रदूषण के मानव स्वास्थ्य पर कैसे और क्या-क्या बुरे प्रभाव पड़ते हैं।[ये भी पढ़ें: नुकसान पहुंचाने वाली कुछ चीजें जिनका इस्तेमाल आप हर रोज करते हैं]

क्या होता है ध्वनि प्रदूषण: मनुष्य के कान 20 हर्ट्ज से लेकर 20000 हर्ट्ज वाली ध्वनि के प्रति संवेदनशील होते हैं। ध्वनि का मानक डेसीबल होता है सामान्यतया 85 डेसीबल से तेज ध्वनि को कार्य करने में बाध्यकारी माना जाता है जो कि ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आता है।

1. कानों की श्रवण शक्ति को कम कर देता है: काफी समय तक तेज शोरगुल में रहना आपकी श्रवण शक्ति यानी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर देता है और इससे धीरे-धीरे आपके सुनने की क्षमता कम होती जाती है। लाउड-स्पीकर, हेडफोन आदि के इस्तेमाल से भी ये परेशानी पैदा हो सकती है। 8 घंटे से अधिक 80 डेसीबल या इससे ज्यादा तीव्रता वाली ध्वनि के संपर्क में रहने आपके कान खराब हो सकते हैं।

2. काम करने में बाधा डालता है: ध्वनि प्रदूषण से सुनने में बाधा पैदा होती है, इससे आपको अपने दैनिक काम करने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तीव्र ध्वनि प्रदूषण के कारण आप काम में अपना ध्यान नहीं लगा पाते जिससे आपकी काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। [ये भी पढ़ें: एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थों को करें आहार में शामिल]

3. नींद को प्रभावित करता है: शोरगुल वाला वातावरण आपके काम को तो प्रभावित करता ही है। साथ ही साथ ये आपकी नींद को भी प्रभावित करता है। 50 डेसीबल से अधिक तीव्र ध्वनि नींद को प्रभावित करते हैं। जिससे नींद पूरी नहीं होती और आपकी कार्यक्षमता इससे प्रभावित होती है।

4. मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है: ध्वनि प्रदूषण के साइकोलॉजीकल दुष्प्रभाव अधिक होते हैं इससे आपके काम करने की क्षमता तो कम होती ही है, साथ ही लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से व्यक्ति तनावग्रस्त भी हो जाता है। इसलिए तेज शोरगुल वाले वाहनों और स्थानों से शिक्षण संस्थानों को दूर रखा जाता है।

5. ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है: 85 डेसीबल से तेज ध्वनि दिल की धड़कनों, रक्त के प्रवाह को बढ़ा देता है। इससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है यहीं कारण है तेज ध्वनि के संपर्क में लगातार रहने से हार्ट-अटैक का खतरा बढ़ जाता है।[ये भी पढ़ें: किफायती आदतें जिन्हें सीखकर आप अपनी सेहत को बना सकते हैं बेहतर]

 

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