अंडे के सफेद भाग के सेवन से क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं

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side effects of egg white

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बहुत से लोगों को अंडे का सेवन करना काफी पसंद होता है। जिसकी वजह से वह इसे अपनी डाइट में शामिल कर लेते हैं। अंडे के सफेद और जर्दी दोनों भाग का सेवन किया जाता है। जर्दी के चारों तरफ का सफेद भाग को एब्यूमिन कहते हैं। अंडे की जर्दी की तुलना में इसमें कम फैट होता है। जिसकी वजह से फिट रहने के लिए लोग अंडे के सफेद भाग का सेवन करते हैं। किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ठीक उसी तरह अंडे के सफेद भाग का भी सेवन अत्यधिक मात्रा में सेवन करना हानिकारक होता है। इसके कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं तो आइए आपको इसके दुष्प्रभावों के बारे में बताते हैं। [ये भी पढ़ें: एसेंशियल ऑयल की मदद से कैसे दूर करें सिर-दर्द]

बायोटिन की कमी: बायोटिन को विटामिन बी7, एच भी कहते हैं। बायोटिन की कमी की वजह से बच्चों की त्वचा पर रैशेज हो जाते हैं और व्यस्कों में सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस की समस्या होती है। यह दोनों त्वचा से संबंधित समस्याएं होती हैं। बायोटिन की कमी की वजह से मांसपेशियों में दर्द, बालों का झड़ना जैसी परेशानियां होने लगती हैं। अंडे के सफेद भाग में मौजूद एब्यूमिन का अत्यधिक सेवन करने से शरीर को बायोटिन अवशोषित करने में परेशानी होती है।

बैक्टीरिया: अंडे की सफेद भाग में मौजूद एल्ब्यूमिन में साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया होते हैं। यह बैक्टीरिया चिकन की आंत में स्थित है। अगर आप अंडे को अच्छी तरह पका लेते हैं तो आप इस बैक्टीरिया के खतरे से बच सकते हैं। [ये भी पढ़ें: अंडे के सेवन से कैसे हो सकती है कब्ज]

एलर्जी: कुछ लोगों को अंडे के सफेद भाग के साथ एल्ब्यूमिन प्रोटीन से एलर्जी होती है। अंडे के सफेद भाग में एब्यूमिन प्रोटीन होता है। अंडे का सफेद भाग खाने से सूजन, जी मिचलाना, डायरिया, उल्टी, छीक आना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। यह लक्षण एक दिन तक रहते हैं। कुछ लोगों को तो इसके सेवन से सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है।

अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन: अंडे के सफेद भाग में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है। किडनी की समस्या से ग्रसित व्यक्ति के उच्च मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना हानिकारक हो सकता है। जिन लोगों में ग्लोमेरूलर फिल्टरेशन रेट(जीएफआर) कम होती है उन्हें किडनी में समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। जीएफआर तरल पदार्थ की प्रवाह दर होती है जो किडनी को फिल्टर करती है। जीएफआर की दर कम होने के पीछे कारण अंडे के सफेद भाग में मौजूद प्रोटीन होता है।

कब्ज: अंडे के सफेद भाग में प्रोटीन तो होता है लेकिन इसमें फाइबर नहीं होता है। जिसकी वजह से अंडे को पचाने में दिक्कत होती है। खाने के पचना के लिए फाइबर जरुरी होता है और अंडे के सफेद भाग में फाइबर ना होने की वजह से कब्ज की समस्या हो जाती है। [ये भी पढ़ें: कैलोरी का कम सेवन करने से भी हो सकते हैं नुकसान]

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