Belly fats: अधिक बेली फैट होने के क्या नुकसान होते हैं

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Why is it more dangerous to have belly fat

Belly fats: अत्यधिक बेली फैट के नुकसान

Belly fats: अत्यधिक बेली फैट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ना केवल स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त बेली फैट आपकी उपस्थिति को भी खराब कर देता है और आपको अनुपयुक्त दिखता है। इन फैट के कारण कार्डियोवस्कुलर डीजिज, मोटापा और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती हैं। पेट के क्षेत्र के आसपास वसा के संचय के कई कारण होते हैं जैसे अस्वास्थ्यकर भोजन का सेवन, शारीरिक गतिविधि ना करना या फिर आनुवांशिकता। फैट से छुटकारा पाने के लिए लोग कई तरीकों और तकनीकों को अपनाते हैं। आहार योजना, वर्कआउट रूटीन और कई अन्य का चीजों का पालन करते हैं। बेली फैट को कम करना बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वे कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ाते हैं। अत्यधिक बेली फैट के जोखिम को जानना महत्वपूर्ण है। [ये भी पढ़ें: Dinner Ideas: स्वस्थ और हल्के आहार जो आप डिनर में खा सकते हैं]

Belly fats: बेली फैट होने से क्या नुकसान होते हैं

  • सूजन की समस्या
  • कार्डियोवस्कुलर डीजिज और स्ट्रोक
  • डिप्रेशन
  • इन्योमनिया और अन्य नींद विकार
  • डिमेंशिया और अल्जाइमर

सूजन की समस्या:
अत्यधिक बेली फैट इंफ्लेमेट्री मॉलेक्युल्स का उत्पादन करता है जो सीधे लिवर में प्रवेश करते हैं। यह शरीर में हार्मोन-बाधित प्रतिक्रियाओं का कारण बनते हैं। इसके अलावा, सूजन किसी भी बीमारी का मूल कारण होता है।

कार्डियोवस्कुलर डीजिज और स्ट्रोक:

The Dangers of Belly Fat
Belly fats: बेली फैट होने के कारण हृदय रोग हो जाता है

अत्यधिक बेली मॉलेक्युलर प्रोटीन पैदा करता है जो शरीर के लिए हानिकारक होता है। ये मॉलेक्युल्स रक्त वाहिकाओं को काम करने से रोकता है जिसके कारण आर्टरी ब्लॉक हो जाते हैं और कार्डियोवस्कुलर डीजिज और स्ट्रोक की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

डिप्रेशन:
यह ज्ञात तथ्य है कि अत्यधिक बेली फैट हमारे शरीर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके अलावा, यह न्यूरोट्रांसमीटर की स्वस्थ कार्यप्रणाली को भी कम कर देता है। इस स्थिति ने मूड स्विंग्स का इलाज नहीं किया जाता है जो डिप्रेशन का कारण बन सकता है।

इन्योमनिया और अन्य नींद विकार:
अत्यधिक बेली फैट होने के कारण जोरदार खर्राटे और एपनिया की समस्या हो जाती है। स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति रात में कुछ पलों के लिए सांस लेना बंद कर देता है। यह समस्या फेफड़ों के चारों ओर वसा के संचय के कारण होती है और वायु मार्ग श्वास को मुश्किल बना देता है। इसके अलावा, यह व्यक्ति की नींद को भी बाधित करता है।

डिमेंशिया और अल्जाइमर:
अतिरिक्त बेली फैट वाले लोग डिमेंशिया और अल्जाइमर के अधिक प्रवण होते हैं। वसा को लेप्टिन नामक हार्मोन जारी करता है। लेप्टीन का मस्तिष्क कोशिका और स्मृति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। [ये भी पढ़ें: Boosting the metabolism: स्वस्थ मेटाबॉल्जिम के लिए खाते समय कौन से नियमों का पालन करें]

यह ज्ञात तथ्य है कि बेली फैट कई समस्याओं का कारण बनता है। यदि आप बेली फैट से उत्पन्न जोखिमों से अवगत हैं तो आप बेली फैट खोने के महत्व को जानते हैं।

 

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