ऑटोइम्यून डिजीज जिनके बारे में पता होना चाहिए

all you need to know about autoimmune diseases

जब इम्यून सिस्टम आपके शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नकारात्मक रुप से प्रभावित करने लगती हैं तो वह ऑटोइम्यून डिजीज होती हैं। यह आपके शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती हैं। कई लोगों को लगता है कि ऑटोइम्यून डिजीज से बहुत कम लोग ग्रसित होते हैं पर ऐसा नहीं है। इन डिजीज के दौरान आपका इम्यून सिस्टम आपके ऊतकों के खिलाफ एंटीबॉडी का उत्पादन करने लगती हैं। ऑटोइम्यून डिजीज के कई लक्षण जैसे मुंहासें, जोड़ों में दर्द सूजन और फ्लू आदि होते हैं। थकावट होना भी ऑटोइम्यून डिजीज का एक लक्षण है। इन बीमारियों से बचने के लिए आपको इनके बारे में पता होना चाहिए। तो आइए आपको ऑटोइम्यून डिजीज के बारे में बताते हैं जिनके बारे में सभी को पता होना जरुरी है। [ये भी पढ़ें: भूख बढ़ाने के आसान तरीके]

अर्थराइटिस: अर्थराइटिस में आपके शरीर के सभी जोड़ों में सूजन आने लगती है। यह हाथ, पैर, अंगुलियों,घुटनों जैसे शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करती है। बहुत से लोग इस बीमारी से ग्रसित होते हैं और यह बहुत आम ऑटोइम्यून डिजीज है।

सोरायसिस: यह एक क्रोनिक कंडीशन है जिसमें त्वचा की कोशिकाएं बहुत जल्दी बढ़ने लगती हैं। यह डिजीज पुरुष और महिलाओं दोनों को प्रभावित करती हैं। यह ज्यादातर कोहनी, घुटनों, हथेली, आर्मपिट को प्रभावित करती है। [ये भी पढ़ें: कारण जिनसे आपकी आंखों में बार-बार पानी आता रहता है]

ल्यूपस: ल्यूपस आपकी त्वचा, जोड़ों, रक्त कोशिकाओं और आंतरिक अंगों को प्रभावित करती है। ल्यूपस में शरीर के प्रभावित अंगों में सूजन आ जाती है। यह डिजीज त्वचा, किडनी, फेफड़े और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

स्क्लेरोडेर्मा: स्क्लेरोडर्मा एक ऑटोइम्यून डिजीज है जिसमें कोलेजन हार्मोन की असामान्य रुप से वृद्धि होने लगती है। कोलेजन एक प्रोटीन का समूह होता है। यह प्रोटीन मांसपेशियों, हड्डियों, रक्त कोशिकाओं, त्वचा आदि में पाया जाता है। यह त्वचा के लचीलेपन को बढ़ाने और मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है। लेकिन जब कोलेजन की ग्रोथ असामान्य रुप से होने लगती है तो त्वचा सख्त हो जाती है जिसकी वजह से चलने फिरने में दिक्कत होती है।

हाशीमोटो थायरॉइडिस्ट: यह डिजीज तब होती है जब आपका इम्यून सिस्टम थायरॉइड को प्रभावित करने लगता है। थायरॉइड एक ग्रन्थि है जो गर्दन के बीच में स्थित होती है। इस डिजीज में थायरॉइड में सूजन आ जाती है जिसकी वजह से यह ग्रन्थि मेटाबॉल्जिम को कंट्रोल करने के लिए सही मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है। [ये भी पढ़ें: कुछ बातें आपको अपने डॉक्टर से नहीं छुपानी चाहिए]

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