प्रेग्नेंसी का चौदहवां सप्ताह

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fourteen week of pregnancy

प्रेग्नेंसी के चौदहवें सप्ताह में महिला को बहुत आराम महसूस होता है क्योंकि शरीर में बहुत ज्यादा आंतरिक परिवर्तन हो चुका होता है। इस हफ्ते तक आते-आते महिला अपनी दूसरी तिमाही के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करती है। आपके बच्चे के विकास का मुश्किल समय जा चुका होता है। चौदहवें हफ्ते में खान-पान पर ध्यान देना बहुत आवश्यक हो जाता है। पौष्टिक खाने का सेवन करना बच्चे और मां दोनों के लिए फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं इस दौरान मां और बच्चे के शरीर में क्या खास होता है।

मां के शरीर में आने वाले बदलाव:
चौदहवें हफ्ते में महिलायें अपनी गर्भावस्था के सबसे खतरनाक चरण से बाहर आ चुकी होती है। चौदहवां हफ्ते में आपके कमर का आकार बढ़ने लगता है और साथ ही साथ वजन भी बढ़ना शुरू हो जाता है। आपको भूख ज्यादा लगने लगती है और एक की समय में दो लोगों का खाना खाने का मन करने लगता है। स्तन में संवेदनशीलता आने लगती और आकार भी बदलने लगता है। चौदहवें हफ्ते में एक मां स्तनपान कराने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाती है। आपके शरीर पर नए मोल्स आने लगते हैं लेकिन यह कोई परेशान होने वाली बात नहीं है बल्कि ऐसा होना सामान्य होता है। दूसरी तिमाही में मूड में काफी उतार-चढ़ाव भी होते है लेकिन अगर आप इस बारे में किसी अपने से बात करेंगी तो आप राहत महसूस करेंगी।

बच्चे का विकास:
चौदहवें हफ्ते में बच्चे के शरीर के साथ-साथ सिर का आकार भी बढ़ने लगता है। कान और आंख अपने सही जगह पर आने लगते हैं, गर्दन का आकार भी बढ़ने लगता है और ठोड़ी सीने के पास से हटकर अपने सही जगह पर आ जाती है। शिशु गर्भनाल (र्प्लासेंटा) की सहायता से अपना सारा आहार लेता है इसलिए मां को अपने खान-पान पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है ताकि बच्चे का पेट अच्छे से भर सके। अल्ट्रासाउंड में आप अपने बच्चे की अंगुलियों की गति को अच्छी तरह देख सकते हैं। इस समय में बच्चे के दिल की धड़कन दोगुनी होती है लेकिन यह सामान्य होता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का तेरहवां सप्ताह]

प्रेगेनेंसी के दौरान भोजन:
क्या खाएं:
फाइबर, कैल्शियम, फोलिक एसिड, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से प्रचुर आहार लें। खाने में हरी सब्जियां, फल, मेवें, दूध, मीट इत्यादि का सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और साइट्रस फल कई तरह के महत्वपूर्ण विटामिन और मिनरल से युक्त होते हैं। दिन में कम से कम पांच बार खाएं। कभी खुद को भूखा न रखें।
क्या न खाएं:
इस दौरान ऐसे आहार का सेवन न करें जिनमे टॉक्सिक पदार्थों की मात्रा ज्यादा हो। शराब क सेवन बिलकुल न करें। शराब का सेवन गर्भावस्था के दौरान शिशु के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। कैफीन का सेवन भी प्रेग्नेंसी के दौरान सही नहीं होता इसलिए कॉफ़ी का सेवन या तो बंद कर दें या बहुत ही कम कर दें। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का पंद्रहवां सप्ताह]

प्रेग्नेंसी के दौरान व्यायाम:
क्या करें:

प्रेग्नेंसी के दौरान व्यायाम करना फायदेमंद होता है। इस दौरान टहलना, चलना, तैरना स्वास्थ्य के लिहाज से सही और सुरक्षित होता है। इस दौरान वैसे व्यायाम करें जिनसे शरीर में रक्त संचार बढे। कार्डियो एक्सरसाइज भी इस लिहाज से काफी लाभदायक होते हैं। इस दौरान योग करना भी बेहद लाभदायक होता है। योगआसन किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के सरंक्षण में करें तो ही बेहतर होगा।
क्या न करें:
ऐसे व्यायाम न करें जिनमे भारी वजन उठाना हो या जिन्हें करने पर मांसपेशियों में खिंचाव आये। वो व्यायाम भी न करने जिनमे सांस रोकना पड़े।

प्रेग्नेंसी के दौरान पहनावा:
क्या पहनें:
सूती से बने खुले और ढीले कपडे ही पहनें। ऐसे कपडे पहनें जो खुले हों और जिन्हें पहनने पर कोई परेशानी या समस्या न हो। बाजार में गर्भवती महिलाओं के लिए ख़ासतौर पर बनाये गए कपडे मिलते हैं। इस दौरान आप ऐसे कपडे भी पहन सकते हैं।
क्या न पहनें:
भारी-भरकम चुस्त कपडे न पहनें। सिंथेटिक कपडे भी न पहने। वैसे कपडे पहनें जिन्हें पहनने पर आराम महसूस हो।

मानसिक स्वास्थ्य:
प्रेग्नेंसी के दौरान मूड स्विंग होना आम बता होती है।इस दौरान महिलायें कई तरह की भावनात्मक परिवर्तन से जूझती हैं। वो पहले से कहीं और ज्यादा भावुक हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं को ज्यादा तनाव नहीं लेना चाहिए न ही मन में ज्यादा नकरात्मक विचार लाने चाहिए। ज्यादा से ज्यादा समय ऐसे कामों में बिताना चाहिए जिनसे ख़ुशी मिलती हो।

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