प्रेग्नेंसी का पंद्रहवां सप्ताह

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fifteenth week of pregnancy

पंद्रहवें सप्ताह के दौरान ज्यादातर महिलायें थोड़ा आराम महसूस करती हैं। गर्भावस्था के समय मितली, सुबह-सुबह आलस आना और थकान महसूस करना बहुत आम होता है लेकिन जैसे-जैसे हफ्ते बीतने लगते हैं औरतें इन परेशानियों से बाहर आने लगती हैं। गर्भावस्था के अंतिम चरणों में ही महिलाओं को दर्द का ज्यादा अनुभव होता है। उससे पहले के चरणों में उतना दर्द नहीं होता है। महिलाएं बिना किसी परेशानी के गर्भावस्था को अनुभव करती हैं। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी के पंद्रहवें हफ्ते के दौरान के दौरान शरीर में क्या बदलाव आने लगते हैं। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का सत्रहवां सप्ताह]

मां के शरीर में होने वाले बदलाव:
पंद्रहवें सप्ताह में महिलाओं के शरीर के अंदर महत्वपूर्ण परिवर्तन आने लगते हैं। कई महिलाओं का वजन इस सप्ताह में ढाई किलो तक बढ़ जाता हैं लेकिन ऐसा सभी के साथ हो यह जरूरी नहीं है। यह सप्ताह औरतों के लिए बहुत परेशानी वाला होता है क्योंकि गर्भाशय को समर्थन करने वाले लीगामेंट (स्नायुबंधन) में लगातार वृद्धि हो रही होती है। जिसके कारण पेट में बहुत दर्द होता है। आपकी भावनाएं और सोच में बदलाव आने लगता है और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। एक मां की चिंता अपने बच्चे के प्रति बढ़ने लगती है। पंद्रहवें सप्ताह में महिलाओं को एसिडिटी होना, रातों में नींद ना आने की समस्या आम हो जाती है।

बच्चे का विकास:
चौदहवें हफ्ते के मुकाबले में आपका बच्चा और बड़ा हो गया होता है उसका वजन 49 ग्राम और लंबाई चार इंच तक बढ़ जाती है। बाल आपके बच्चे की त्वचा को ढ़क लेता है जिससे बच्चे के शरीर तापमान समान रहता है। पंद्रहवें हफ्ते में मां के पेट में बहुत चीजें होती रहती हैं जैसे- बच्चे की गतिविधियां पता चलने लगती हैं और बच्चा पैरों से पेट पर मारने भी लगता है। पंद्रहवें हफ्ते में आपका बच्चा आवाजें सुन सकता है, जैसे- अपनी मां की धड़कनें सुनना और उनकी सांसों को सुनना। आपके बच्चे की टेस्ट बड (स्वाद इंद्रियां) आने लगती हैं। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का चौदहवां सप्ताह]

प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:
क्या खाएं:
प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन में आयरन, फोलिक एसिड, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन डी प्रचुर मात्रा में लें। बच्चे के विकास के लिए ओमेगा फैटी एसिड का सेवन करना भी जरुरी है इसलिए भोजन में इनको भी शामिल करें। ओमेगा 3 फैटी की पूर्ति के लिए मछली का सेवन करें। प्रोटीन की पूर्ति के लिए सोया पनीर, मांस, अंडा जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

क्या न खाएं:
ऐसे भोज्य पदार्थ जिनमे हानिकारक तत्वों की मात्रा ज्यादा हो उनका सेवन न करें। सी फ़ूड, अधपका मांस, पपीता, कच्चा अंडा इत्यादि का सेवन गर्भावस्था के लिहाज से सही नहीं होता। अतः इनका सेवन न करें। कैफीन, एल्कोहल का सेवन करना भी गर्भावस्था के लिहाज से सही नहीं होता है अतः इसके सेवन से भी बचे। लीन मीट (वसा रहित मीट), कम फैट वाले डेयरी उत्पाद का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

प्रेग्नेंसी के दौरान व्यायाम:
क्या करें:
इस दौरान हलके फुल्के व्यायाम करना काफी फायदेमंद होता है। एक जगह खड़े होकर जॉगिंग करना, धीरे-धीरे दौड़ना, सुबह की ताज़ी हवा में नंगे पांव घास में चलना इत्यादि फायदेमंद व्यायाम हो सकते हैं। नंगे पांव घास पर चलना ब्लड प्रेशर और शुगर की बीमारी के लिए फायदेमंद होता है।इन व्यायाम के अलावा योग और मेडिटेशन करना भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

क्या न करें:
ऐसे व्यायाम न करें जिनमे सांस रोकने की जरुरत हो या फिर ज्यादा वजन उठाने की जरुरत हो। अगर आप पहले से जिम कर रही हैं तो अपने ट्रेनर और डॉक्टर की मदद से अपने लिए व्यायाम का चुनाव करें।

प्रेग्नेंसी के दौरान पहनावा:
क्या पहनें:
सूती कपडे़ पहने। ऐसे कपड़ों का चुनाव करें जो ढीले-ढाले और खुले हों।

क्या न पहनें:
भारी-भरकम कपडे़ न पहनें। ऐसे कपड़े न पहनें जिन्हें पहनने के बाद असहजता महसूस ही और आराम न मिले।

मानसिक स्वास्थ्य:
गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का मानसिक तनाव आपके और आपके गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए सही नहीं होता है। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा खुश रहने की कोशिश करें। ऐसे कामों में ध्यान दें जिनमे आपका मन लगे। वो काम न करें जिनमे आप परेशानी का अनुभव करें या झुंझलाहट का एहसास हो। [ये भी पढ़ें:प्रेग्नेंसी का सोलहवां सप्ताह]

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