प्रेग्नेंसी का चालीसवां सप्ताह

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40th week of pregnancy know more about the body changes

जैसे ही एक मां अपने प्रेग्नेंसी के चालीसवें हफ्ते में पहुंचती है उनमें काफी उत्साह आ जाता है, क्योंकि अब बच्चा कभी भी जन्म ले सकता है। मां के लिए यह एक रोमांचक लेकिन चुनौतिपूर्ण पल होता है। बच्चे के कमरे को सजाए और उसके लिए खिलौने खरीदने का वक्त भी आ चुका है। कभी-कभी डिलीवरी का समय चालीसवें हफ्ते से आगे भी बढ़ जाता है, ऐसे में आपको डॉक्टर से सम्पर्क करने की ज़रूरत है।
मां के शरीर में बदलाव और लक्षण:
गर्भ के अंदर बच्चे का प्रेशर और उसकी गतिविधियां बढ़ जाती है जिसके कारण मां के गर्भ में ज़्यादा दबाव पड़ता है और पेट में दर्द भी बढ़ने लगता है। बच्चे का आकार बढ़ने के कारण, अब वह गर्भ में अच्छी तरह नहीं घूम सकता है। प्रेग्नेंसी के इस हफ्ते में लंबी यात्रा से परहेज करें। आपको व्यायाम करने की ज़रूरत है, रोज़ाना कम-से-कम 30 मिनट तक टहले। आपकी ग्रोइन, ब्लैडर और पेट के निचले हिस्से पर अधिक दबाव पड़ने लगता है। इस अनियमित संकुचन को ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन कहा जाता है। इस हफ्ते में आपका गर्भाशय डिलीवरी के लिए तैयार हो जाता है। अपने निप्पल से निकलते सफेद पदार्थ को छिपा सकते हैं, क्योंकि यह आपके बच्चे को खिलाने के लिए होता है। आपके शरीर में बहुत अधिक दर्द रहता है इसलिए जितना हो सके आराम करने की कोशिश करें।
बच्चे का विकास:
आपका बच्चा अब पूरी तरह से विकसित हो चुका होता है और बाहर की दुनिया देखने के लिए तैयार हो चुका होता है। बच्चे के शरीर का हर एक अंग काम करना शुरू कर दिया होता है। फेफड़े और दिमाग विकसित हो चुके हैं। बच्चे की इम्यूनिटी पूरी तरह से विकसित हो चुकी होती है, लेकिन जन्म के बाद ही यह पूरी तरह से काम करना शुरू करते हैं। बच्चे का वजन 3 से 4 किलोग्राम हो जाता है और लंबाई 21 इंच हो जाती है। सिर की हड्डियों के अलावा बाकि हर जगह की हड्डियां कठोर हो जाती हैं। गर्भ की छोटे से जगह में बच्चा घूमता रहता है, जिसके कारण एक मां को दर्द झेलना पड़ता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का उन्तालीसवां सप्ताह]
क्या खाएं:
जीरे में भरपूर मात्रा में आयरन होता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। जीरा खाने से मां के शरीर में दूध बनता है और साथ ही साथ एसिडिटी और सूजन से भी राहत पहुंचाता है। आमतौर पर प्रेग्नेंट महिला को खाना पचाना मुश्किल होता है, ऐसे में जीरा खाना फायदेमंद हो सकता है। ओट्स में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी और प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। जो प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे और मां दोनों के लिए बहुत लाभदायक होता है।
क्या ना खाएं:
अधिक शुगर वाला खाना ना खाएं क्योंकि इससे आपके मूड में बदलाव आता है और चिड़चिड़ाहट भी हो सकती है और ब्लड शुगर होने की संभावना बढ़ जाती है। सॉफ्ट चीज़ ना खाएं क्योंकि इसमें लिस्टेरिया बैक्टीरिया होता है जिसकी वजह से फूड पॉयजिनिंग होने की संभावना बढ़ जाती है।
एक्सरसाइज़:
फॉरवर्ड लिनींग इन्वर्शन एक ऐसी एक्सरसाइज़ जो आपके यूटरिन लिगामेंट को खोलने में मदद करता है जिसकी वजह से उनमें लचीलापन आ जाता है। इस एक्सरसाइज़ को करने से आपको प्रसव के दौरान अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
पहनावा:
प्रेग्नेंसी के इस सप्ताह में आपको वी-नेक या बोट नेक गले वाले टॉप पहनने की आवश्यकता होती है क्योंकि आपके शरीर की गतिविधि को बनाए रखने में आपकी मदद करते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत सारी महिलाओं का ऐसा सोचना है कि गाढ़े रंग के कपड़े पहनने से वह पतली दिखती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है आप हर रंग के कपड़े पहन सकती है। [ये भी पढ़ें: नवजात शिशु की देखभाल के लिए जरुर अपनाएं ये टिप्स]
मानसिक स्वास्थ्य:
एक महिला को सबसे ज़्यादा अपने मानसिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि आपकी सोच आपके बच्चे को भी प्रभावित करती है। प्रेग्नेंसी के दौरान खुश रहना आवश्यक होता है औऱ साथ-ही-साथ आपको तनाव से भी दूर रहना चाहिए।

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