प्रेग्नेंसी का उन्तालीसवां सप्ताह

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39th week of pregnancy: Body changes and symptoms

प्रेग्नेंसी के उंतालीसवें हफ्ता आपकी प्रेग्नेंसी का अंतिम समय होता है। इस समय में आपको मातृत्व की नयी चुनौतियों के लिए तैयार हो जाना चाहिए। इस हफ्ते में बच्चा अब मां के पूरे गर्भ का इस्तेमाल करने लगता है क्योंकि बच्चा पूरी तरह से तैयार हो गया होता है और कभी भी लेबर पेन हो सकता है। आप अपनी दैनिक दिनचर्या को जारी रखें, हर पल को खुलकर महसूस करें और ध्यान रखें की अब आपका बच्चा कभी भी बाहर आ सकता है।

मां के शरीर में बदलाव और लक्षण:
मां को अब हर वक़्त एक बेचैनी सी महसूस होने लगती है और बैठने या उठने में भी तकलीफ होने लगती है। उंतालीसवें हफ्ते में मां के स्तन का आकार बड़ा और संवेदनशील हो जाता है। स्तन से एक तरल पदार्थ लीक होता है जो कोलोस्ट्रम के नाम से जाना जाता है। आपके शरीर का हर एक अंग फूलने लगता है इसलिए अधिक से अधिक पानी पीना आपके लिए बहुत ज़रूरी होता है। अगर अभी तक आपको किसी भी तरह के फॉल्स लेबर कॉन्ट्रेक्शन्स(false labor contractions) का एहसास नहीं हुआ है तो उंतालीसवें हफ्ते में आपको हो सकता है। अगर आपको असली लेबर पेन या झूठे लेबर पेन में अंतर नहीं पता चल पा रहा तो जानिए कि असली लेबर पेन आपको चलने या बैठने से रोकता है। अगर इस सप्ताह के दौरान गर्भ का पानी टूट जाए तो ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से तुरंत सम्पर्क करने की ज़रूरत है।

बच्चे का विकास:
अगर इस हफ्ते में आपका बच्चा जन्म लेता है तो वह पूरी तरह से स्वस्थ होता है और सारे अंग सही से काम भी करते हैं। फेफड़े भी पूरी तरह से तैयार हो जाते है, लेकिन जब तक बच्चा बाहर नहीं आता तब तक उसके फेफड़े सही से काम नहीं करते है। उंतालीसवें हफ्ते में बच्चे का वजन 3 किलोग्राम हो जाता है या उससे भी ज्यादा हो सकता है। अगर इस हफ्ते में आपके बच्चे का जन्म नहीं होता है तो आपका बच्चा और विकसित होता है। ऐसे में अगर आप अपने बच्चे की गतिविधियों को महसूस नहीं कर पा रही हैं तो अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना ना भूले। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का अड़तीसवां सप्ताह]

प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:
क्या खाएं:
प्रोटीन में अमीनो एसिड होता है, जो आपके और बच्चे के शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अंडा, मलाई निकाला हुआ दूध, पकाया हुआ मीट, पीनट बटर, दही और बीन्स का सेवन करना ज़रूरी होता है। इन सारी चीज़ों में प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है।

क्या ना खाएं:
प्रेग्नेंसी के अंतिम समय में एक मां को अपने खाने की चीज़ों पर अत्यधिक ध्यान देने की जरूरत होती है इसलिए उन्हें ऐसी किसी भी चीज़ का सेवन नहीं करना चाहिए जो उनके और बच्चे के लिए घातक हो। जैसे- एल्कोहल, कैफीन, अधिक तेल-मसाले वाली चीज़ों के सेवन से बचें। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का चालीसवां सप्ताह]

एक्सरसाइज़:
प्रेग्नेंसी के इस दौर में मेडिटेशन, टहलना और योग आपके प्रसव के दौरान होने वाली परेशानी से आपको राहत दिलाएंगे लेकिन इन सब के बावजूद आपको अपने किसी भी एक्सरसाइज़ को करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

पहनावा:
हल्के रंग के कपड़े पहनने की कोशिश करें क्योंकि इससे गर्मी कम लगती है। कोशिश करें की कॉटन के कपड़ें ही पहनें या फिर ऐसे कपड़ें पहने जो आपके शरीर के लिए आरामदायक हो।

मानसिक स्वास्थ्य:
प्रेंग्नेंसी के इस सप्ताह में आपको खुश रहने की अत्यधिक आवश्कता होती है इसलिए कोशिश करें की जितना हो सके खुश रहें और तनाव से खुदको दूर रखें।

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