प्रेग्नेंसी का अड़तीसवां सप्ताह

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38th week of pregnancy know what happens during this time

प्रेग्नेंसी का यह हफ्ता प्रेग्नेंसी के आखिरी हफ़्तों में से एक है। इस हफ्ते तक मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों डिलीवरी के लिहाज से तैयार होते हैं। प्रेग्नेंसी के इस चरण में भी प्रेग्नेंट महिलाओं को बेचैनी और घबराहट का सामना करना पड़ता है। प्रेग्नेंसी में महिलाओं का बेचैन होना स्वाभाविक होता है मगर फिर भी नकरात्मक ख्याल हावी हो तो डॉक्टर से संपर्क करना भी जरुरी है। प्रेग्नेंसी के इस चरण में कई बार नयी-नयी मां बनने वाली औरतों को मानसिक परिवर्तन के दौर से गुजरना पड़ता है और ऐसे में घबराहट और बेचैनी की समस्या उत्पन्न होती है।

 मां के शरीर में बदलाव और लक्षण:
इस हफ्ते तक आपके शरीर में अंदरूनी और बाहरी बदलाव होते रहते हैं। इस दौरान महिलाओं के योनि से भी निरंतर स्राव होता रहता है जो स्वाभाविक होता है। गर्भ में पल रहे शिशु का जननमार्ग(बर्थ केनाल) में जाना महिलाओं के श्रोणि(पेल्विस) में दबाव पैदा करता है और कमर दर्द को बढ़ाता है। इस बीच पैरों में सूजन बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी मसाज और प्रेग्नेंसी बेल्ट के जरिए महिलाएं थोड़ा सुकून पा सकती हैं। हाथों में और चेहरे पर सूजन के साथ-साथ तेज पेट दर्द और सिर दर्द की समस्या उत्पन्न होने पर तुरंत ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें। यह प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले उच्च रक्तचाप का एक संकेत हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाला उच्च रक्तचाप गर्भ में पल रहे शिशु को खून,ऑक्सीजन और भोजन से वंचित कर सकता है।

शिशु का विकास:
इस सप्ताह में बच्चे की लंबाई लगभग 19 इंच और वजन 2 से 3 किलोग्राम हो जाता है। गर्भ में पल रहे शिशु की मुद्रा श्रोणि(पेल्विस) के हड्डियों की तरफ होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस हफ्ते तक गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर से बालों का आवरण जिसे लानुगो भी कहते हैं खत्म हो जाएगा। गर्भ में पल रहे शिशु के सारे अंग अब तक विकसित हो चुके होते हैं और अच्छी तरह काम कर रहे होंते हैं। इस हफ्ते शिशु के शरीर में टियर डक्ट का विकास होता है। गर्भ में पल रहा शिशु ध्वनि को सुन के मुट्ठियां भींच कर प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर देता है। इस हफ्ते तक आते-आते गर्भ में पल रहा शिशु नीचे की तरफ आ जाता है और बाहर निकलने के लिए हॉर्मोन के स्राव का इंतजार करता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का सैंतीसवां सप्ताह]

प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:

क्या खाएं:
इस सप्ताह में मां को अपने आहार में विटामिन-ए और सी का सेवन अधिक मात्रा में लेना चाहिए। फाइबर युक्त आहार भी आवश्यक होता है क्योंकि इसमें जो तत्व होते है वह मां के शरीर को ताकत प्रदान करते है। केला, ताजे़ फल, किशमिश और ओटकेक्स के सेवन करने से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं भी कम हो जाती है।

क्या ना खाएं:
प्रेग्नेंसी के अड़तिसवें सप्ताह में बच्चा पूरी तरह से जन्म लेने के लिए तैयार हो जाता है इसलिए आपको बहुत सोच-समझकर खाने की आवश्यकता होती है। सी-फूड, एल्कोहल, कैफीन और धूम्रपान से दूर रहें वरना यह आपके लिए घातक हो सकता है। अधिक तेल-मसाले वाली चीज़ों का भी सेवन ना करें क्योंकि इससे एसिडिटी होने की संभावना बढ़ जाती है।

एक्सरसाइज़:
प्रेग्नेंसी के इस सप्ताह में टहलना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि यह आपकी प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले दर्द से राहत पहुंचाता है। पेल्विक टील्ट एक्सरसाइज़ करना भी जरूरी होता है क्योंकि यह आपके पेल्विस और लोवर बैक लींबर को लूज़ रखता है जो बच्चे के होने के समय आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का उन्तालीसवां सप्ताह]

पहनावा:
इस सप्ताह में मां का पेट पूरी तरह से बाहर आ चुका होता है इसलिए चुस्त कपड़े अवॉयड करें। इससे आपको किसी भी कार्य को करने में असहजता महसूस होती है। ढ़ीले और आरामदायक कपड़े पहनें।
मानसिक स्वास्थ्य:
यह प्रेग्नेंसी का अंतिम दौर होता है इसलिए जितना हो सके खुश रहें और ऐसे लोगों के आसपास रहें जो आपको खुशी प्रदान करें। अत्यधिक तनाव लेना हानिकारक हो सकता है।

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