प्रेग्नेंसी का छत्तीसवां सप्ताह

Read in English
36th week of pregnancy: Find out what happens during this week

प्रेग्नेंसी के इस हफ्ते के बाद से किसी भी दिन आपके गर्भ में पल रहा शिशु जन्म ले सकता है। ज्यादातर बच्चों का जन्म प्रेग्नेंसी के 36-40 हफ्ते के बीच में ही होता है। वैसे तो ये दौर बहुत ही उत्साह भरा होता है पर कई महिलाएं इस दौरान घबराहट और बेचैनी भी महसूस करती हैं। ये मानसिक परिवर्तन बच्चे को सकुशल जन्म दे देने के ख्याल की वजह से होता है। इस हफ्ते प्रेग्नेंट महिलाओं को ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकॉकस की जांच करवा लेनी चाहिए। ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकॉकस बैक्टीरिया स्वस्थ महिला के शरीर में भी पाया जाता है, पर अगर बच्चे के जन्म के समय भी ये बैक्टीरिया मां के शरीर में हो तो ये जन्म लेते समय बच्चे में भी फैल सकता है। बच्चे में स्थानांतरित होकर यह बैक्टीरिया बच्चे के फेफड़ों को हानि पहुंचा सकता है। छत्तीसवें हफ्ते में इस बैक्टीरिया की जांच करवा कर अपने बच्चे को इसके संक्रमण से बचा सकते हैं।

मां के शरीर में बदलाव और लक्षण:
इस हफ्ते भी कब्ज, थकान, अनिद्रा, बेचैनी, प्रेग्नेंसी से होनी वाले दर्द की समस्या जारी रहेंगी। कुछ महिलाओं को चलने में काफी तकलीफ होती है तो कई महिलायें प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को चलने के लिए ढाल चुकी होती हैं। इस हफ्ते में कुछ महिलायें यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की परेशानी का सामना कर सकती हैं। इस हफ्ते तक आते-आते आपको महसूस होने लगेगा की आपके गर्भ में पल रहा शिशु आपके श्रोणि(पेल्विस) की हड्डियों पर टिका हुआ है। खून में शुगर लेवल का बढ़ना या उच्च रक्तचाप की समस्या भी इस हफ्ते आपको परेशान कर सकती हैं। इस हफ्ते तक आते-आते प्रेग्नेंट महिलाओं के स्तन से पीले रंग के द्रव जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं का स्राव भी शुरू हो जाता है।

बच्चे का विकास:
इस हफ्ते तक आते-आते आपके गर्भ में पल रहा शिशु लगभग विकसित हो चुका होगा। आपका डॉक्टर जांच के द्वारा ये पता लगाएगा की बच्चा गर्भ से बाहर आने के लिए पूरी तरह से तैयार हुआ है या नहीं। बच्चे के शरीर में मांस बनने की प्रक्रिया अभी तक शुरू होगी। अगर इस हफ्ते के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट्स में गर्भ में पल रहा बच्चा उल्टी मुद्रा में हो तो डॉक्टर कई तरीको की मदद से बच्चे को सीधा करने की कोशिश करेगा। गर्भ में अगर बच्चे का सिर योनि के मुख की तरफ नहीं हुआ तो सी-सेक्शन ऑपरेशन से ही बच्चा बाहर आ पायेगा। सी- सेक्शन ऑपरेशन प्राकृतिक नहीं होता और इसमें खतरे की गुंजाइश रहती है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का पैंतीसवां हफ्ता]

क्यां खाएं:
विटामिन-के, पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम युक्त आहार खाना आवश्यक होता है क्योंकि इनमें जो पदार्थ होते हैं वह आपके और आपके बच्चे के शरीर के लिए फायदेमंद होता है। हरी-सब्जियां, पास्ता, गोभी और बीन्स भी लाभकारी आहार होते हैं।

क्यां ना खाएं:
खट्टे फल, कॉफी, कैफीन और एल्कोहल से दूर जितना हो सकें दूर रहें क्योंकि यह घातक हो सकता है। पपीता का सेवन बिल्कुल ना करें क्योंकि इसमें पाएं जाने वाला तत्व आपके गर्भ में संकुचन पैदा करता है जो आपके बच्चे के लिए घातक होता है और मिसकैरेज होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

एक्सरसाइज:
प्रेग्नेंसी के इस सप्ताह के दौरान डॉक्टर भी हल्के-फुल्के व्यायाम करने की सलाह देते हैं। टेलर एक्सरसाइज़ और स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद हो सकता है लेकिन इन एक्सरसाइज़ को करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का सैंतीसवां सप्ताह]

पहनावा:
ऐसे कपड़े बिल्कुल ना पहने जिससे आपको किसी भी काम को करने में असहज महसूस हो। कोशिश करें की चुस्त कपड़ें ना पहने और ढ़ीले कपड़ें पहने।

मानसिक स्वास्थ्य:
प्रेग्नेंसी के इस सप्ताह में बच्चा कभी भी जन्म ले सकता है इसलिए अत्यधिक तनाव लेना आपके लिए हानिकारक हो सकता है। तो ऐसे में कोशिश करें की जितना हो सकें खुश रहें और अपने मन में सकारात्मक भावनाएं लाएं।

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "