प्रेग्नेंसी का बत्तीसवां सप्ताह

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32nd week of pregnancy: Know what to expect during this time

प्रेग्नेंसी के 32वें सप्ताह में पहुंचने तक आप प्रसव के लिए पूरी तरह से तैयार हैं इसलिए अब आपको अपना और ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। पूरी नींद लें, पोषक आहार लें और सबसे जरूरी अपने आपको एक्टिव रखें और हल्के एक्सरसाइज करें जो आपको फिट रखेगा। अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें क्योंकि ये सप्ताह और आने वाले सप्ताह आपकी प्रेग्नेंसी के अंतिम सप्ताह है इस समय सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। तो चलिए 32वें सप्ताह में होने वाले बदलाव और उसके कारण इसके साथ ही बच्चे में होने वाले विकास के बारें में जानते है
मां में होने वाले बदलाव:
इस सप्ताह तक आते-आते आपका वजन औसतन आधा किलो प्रति सप्ताह बढ़ रहा होता है। इस समय तक आपके शरीर में खून का बहाव भी 50 प्रतिशत अधिक बढ़ जाता है। एक नॉर्मल प्रेग्नेंसी की तरह आप कुछ बातों को महसूस कर रही होंगी जैसे- जरूरत से ज्यादा थकान, स्तन से स्राव, प्रेग्नेंसी के दौरान एक खास तरह का दर्द होना, कब्ज होना, छाती में जलन, अनिद्रा, सांस फूलना, मांसपेशियों में खिंचाव, योनि स्राव, नाक से खून आना, बवासीर, नस चढ़ना, स्ट्रेच मार्क्स, और कभी-कभी जी मचलना महसूस होता है। इस सप्ताह तक आते-आते बच्चा भी अपनी सही दिशा में आ जाता है।
बच्चे में होने वाले विकास:
इस समय आपने यह महसूस किया होगा कि आपका बच्चा अब थोड़ा शांत है ऐसा होने के पीछे का कारण है कि आपका बच्चा अब पूरी तरह से विकसित हो चुका है जिसकी वजह से उसे अब इधर से उधर करने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिल पाती है। साथ ही अब वह एक नॉर्मल बच्चे की तरह अपने जन्म से पहले सही जगह पर आ चुका है। अब आपके बच्चे की लम्बाई 16 से 17 इंच हो चुकी होगी और साथ ही साथ बच्चे का वजन भी लगभग 2 किलो हो चुका होगा। इस समय आपका बच्चा 20-40 मिनट के छोटे-छोटे खंडो में सोता है यह समय होता है जब बच्चे सपने देखना शुरू कर देते हैं। बच्चे का मस्तिष्क अब भी विकसित हो रहा होता है इसलिए अब तक जो भी आप खा रही थी जारी रखें। यह बच्चे को मानसिक रूप से तंदरुस्त रखेगा। बच्चे के गर्भनाल पर एक पतले पदार्थ की परत चढ़ जाती है। इस समय बच्चे का स्केलेटन पूरी तरह से बन चुका होता है और बच्चे की हड्डियां अब भी लचीली और कोमल होती हैं। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का इक्कतीसवां सप्ताह]
प्रेग्नेंसी के 31वें सप्ताह के दौरान भोजन:
क्या खाएं:
हर रोज 1000 मिलीग्राम कैल्शियम खाएं। कैल्शियम के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स काफी अच्छा स्रोत हैं। दूध, दही, पनीर और पालक का सेवन करें। ये आपके बच्चें और आपकी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखेगा। विटामिन डी की प्रचुर मात्रा भी आपके लिए जरुरी है क्योंकि इसकी कमी से बच्चें का जन्म समय से पहले हो सकता है और बच्चे का वजन जन्म के दौरान कम होगा। साथ ही इसकी कमी से गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं। विटामिन डी की पूर्ति के लिए आप अंडा खा सकती हैं और धूप भी इसका अच्छा स्रोत है।
क्या ना खाएं:
अंडा खाना आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा लेकिन किसी भी हालत में कच्चा या आधा पका अंडा ना खाएं। ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें कच्चा अंडा हो, जैसे केक, चॉकलेट आइसक्रीम और मेयोनेज़ आदि ना खाएं। कच्चे अंडे से बने खाद्य पदार्थों में साल्मोनेला बेक्टीरिया होने की संभावना होती है जिससे आपको उल्टी और डायरिया की परेशानी हो सकती है। साथ ही कच्चे स्प्राउट्स भी ना खाएं, बेहतर है कि उन्हें पकाकर या फ्राई करके खाएं। कच्चें स्प्राउट्स खाने से आपको फूड पॉइजनिंग हो सकती है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का तैंतीसवां सप्ताह]
एक्सरसाइज:
आपकी गर्भावस्था का तीसवां सप्ताह पूरा हो जाने के बाद आपके लिए पेल्विक टिल्टस और पेल्विक रॉक्स एक्सरसाइज बहुत ही बेहतर साबित हो सकती है। इस दौरान आपके गर्भ में बच्चा अपनी सही जगह बनाने की कोशिश कर रहा होता है इसलिए पेल्विक रॉक्स करने से आप बच्चे को सही जगह बनाने में मदद करती हैं। हर रोज इस एक्सरसाइज को दिन में 3 बार 20 मिनट के लिए करें। साथ ही 8-9 घंटे की पूरी नींद लें वह भी आपके स्वास्थ्य के लिए जरुरी है।

पहनावा:
अपने पुराने कपड़ों को ढीला करने और खींचने से बेहतर है की आप कुछ सस्ते टी-शर्ट्स और टॉप्स खरीद लें। इन्हें कुछ बेसिक रंगों में खरीदें। अब आप प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में हैं तो बेहतर है कि आप टी-शर्ट अपने साइज से 1 या 2 साइज बड़े लें। कॉटन टी-शर्ट और टॉप बेहतर विकल्प होगा। सुबह में टहलने और एक्सरसाइज करने के लिए पजामा और लूज पेन्ट्स खरीदें। रात को सोने के लिए स्लीप शॉर्ट और पेंट्स का इस्तेमाल कर सकती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य:
इस सप्ताह के दौरान अधिक तनाव ना लें। तनाव और अधिक दबाव डालने वाली चीजों से दूर रहें। जितना हो सकें खुश रहेें और उन चीजों में शामिल हो जो आपको खुश रखती हों। इस वक्त आपका बच्चा सब कुछ सुन और समझ सकता है, अगर आप खुद पर मानसिक दबाव बनाएगी तो इससे बच्चें पर भी दबाव बनेगा और बच्चें के स्वास्थ्य पर भी असर होगा।

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