प्रेग्नेंसी का तीसवां हफ्ता

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30th week of pregnancy body changes and symptoms

तीसवें हफ्ते में आने के बाद आपकी प्रेग्नेंसी में बस कुछ ही हफ्ते बाकी रह गए होते हैं। प्रेग्नेंसी के इस चरण में कई महिलाएं ये सोचती है की जल्द से जल्द उनकी डिलीवरी हो जाए। इस हफ्ते तक आते-आते आपको सांस लेने कठिनाई भी हो सकती है, क्योंकि आपके गर्भ का बढ़ता आकार आपके डायाफ्राम को संकुचित कर सकता है। यूं तो प्रेग्नेंसी के इस चरण में सांस लेने में तकलीफ एक सामान्य बात है मगर फिर भी तकलीफ बहुत ज्यादा हो तो एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरुर लें।

मां में होने वाले शारीरिक बदलाव:
प्रेग्नेंसी के 20-30 हफ्तों में ही महिलाओं का सबसे ज्यादा वजन बढ़ता है। आप बढ़ते वजन की वजह से थोड़ा असहज महसूस कर सकती हैं पर शरीर में होने वाले अन्य बदलावों से आपको छुटकारा मिलेगा। कमर दर्द कम करने के लिए शरीर को सही मुद्रा में रखें। ज्यादा से ज्यादा आराम करें और ऐसे काम न करें जिनसे शरीर पर कोई अतिरिक्त भार पड़े। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में ऐसे हॉर्मोन का स्राव होता है जिनसे शरीर के जोड़ ढीले हो जाते हैं। यह स्वाभाविक प्रक्रिया है इसमें घबराने की जरुरत नहीं है। हां अगर शरीर में कोई भी बदलाव अनावश्यक लगे तो एक बार अपने डॉक्टर से संपर्क जरुर करें। प्रेग्नेंसी के इस चरण में अपने यौन जीवन को जीवंत रखने के लिए सम्भोग करें पर एक बार डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।

शिशु में होने वाले विकास:
इस समय में जब अल्ट्रासाउंड में बच्चे को देखते हैं तो पता चलता की उसके शरीर पर झुर्रियों जैसी एक परत बनी हुई है। जैसे-जैसे शरीर पर मांसपेशियां बनेगी ये झुर्रिया खत्म हो जायेगी। इस हफ्ते तक शिशु के शरीर पर बालों की महीन परत बन जाती है जो जन्म के समय तक रहती है। इस हफ्ते तक आते-आते गर्भ में पल रहे शिशु की लम्बाई 15.7 इंच तक और वजन 1 किलो 300 ग्राम तक हो जाता है और आपके गर्भ का आकार एक तरबूज जितना हो जाता है। इस हफ्ते तक आते-आते गर्भ में पल रहा शिशु सांस लेने का अभ्यास करने लगता है। गर्भ में पल रहा शिशु जब भी हिचकिया लेगा उसके स्पंदन को आप महसूस करेंगी। इस हफ्ते तक आते-आते शिशु के शरीर का पाचन तंत्र पूरी तरह से काम करने लायक हो जाता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का उनतीसवां सप्ताह]

प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:
क्या खाएं
इस दौरान संतुलित आहार ले। कब्ज की समस्या हो तो ऐसे आहार लें जिनमें फाइबर की मात्रा ज्यादा हो, जैसे मसूर की दाल, मटर, ब्रोकली, ब्लैक बीन्स और स्प्राउट्स आदि खा सकती है। फाइबर खाने से हमारी आंतें ठीक तरह से कार्य करती हैं। साथ ही ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करता है। इस दौरान आप जीरे को अपने खाने में शामिल करें यह आपके शरीर में आयरन की कमी को पूरा करता है, साथ ही यह आपको ऊर्जा भी देता है।

क्या ना खाएं
प्रेग्नेंसी के इस सप्ताह के दौरान खान-पान पर विशेष ध्यान रखें। केवल क्या खाना है,यही काफी नहीं बल्कि क्या नहीं खाना चाहिए इस बात का भी ध्यान रखें। आप इस दौरान बाहर से खरीदें पैक्ड फूड, ऑयली और जंक फूड को ना खाएं इससे आपकी सेहत को नुकसान हो सकता है जंक फूड्स में नमक आदि मसालों की मात्रा ज्यादा होती है जो कि आपके ब्लड प्रेशर को बदलाव ला सकती है। अगर बाहर से कुछ लेकर खा रही हैं तो उसमें होने वाले न्यूट्रिएंट्स के बारे में पढ़कर ही खाएं। साथ ही कुछ भी खाते वक्त साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। फल और सब्जियां आदि को धोकर साफ करें और छील कर एक साफ बरतन में रख लें, तभी खाएं। एक साथ अधिक खाना ना खाएं, इससे गैस होने की दिक्कत हो सकती है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का इक्कतीसवां सप्ताह]

एक्सरसाइज:
हालांकि आप प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में आने से कुछ ही दूर हैं इस दौरान अधिक एक्सरसाइज करने की सलाह नहीं दी जाती है, लेकिन फिर भी आप बच्चे और अपनी सेहत के ख्याल से थोड़ा टहलना और घूमना जारी रखें। अगर आप योग क्लास जाती हैं तो बहुत ही अच्छा है। किसी भी तरह के एक्सरसाइज़ को करने से पहले आपके लिए अपने डॉक्टर से सुझाव ले लेना बेहतर होगा। अगर आप सहज महसूस करती है तो स्विमिंग आदि कर सकती हैं।

पहनावा:
कई महिलाओं का मानना होता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान केवल गाढ़ें रंग ही पहनें ताकि आपका बंप अधिक ना दिखें और आप इससे पतली नजर आएं, लेकिन ऐसा नहीं है। आप इस दौरान भी हल्के रंग पहन सकती हैं। आप इस दौरान भी लेगिंग्स, प्लाजोस आदि पहन सकती है। अगर आप इन सबमें असहज महसूस कर रही है तो फैशन के लिए अपनी सहजता को दाव पर ना रखें। वहीं पहनें जिसमें आप कम्फर्टेबल हैं।

मानसिक स्वास्थ्य:
आप प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही के अंत में हैं, इस दौरान बच्चे का काफी विकास हो चुका होता है। इस दौरान तनाव लेना उसकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। हालांकि थोड़ा तनाव लेना सही है ताकि आप चीजों को मैनेज कर सकें जैसे बच्चे की सेहत के लिए क्या खाना है और क्या नहीं, क्या पिये, किस समय सोये और कितना सोये। इन सभी विषयों के बारे में सोचने से आप बच्चे की सही देख-रेख कर पाएंगी लेकिन इससे अधिक तनाव आप दोनों के लिए ही नुकसानदेह होगा।

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