प्रेग्नेंसी का अट्ठाइसवां सप्ताह

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28th week of pregnancy body changes and symptoms

प्रेग्नेंसी के अठाईसवें हफ्ते में आपका डॉक्टर आपको गर्भ में पल रहे शिशु में हो रही हरकतों का चार्ट दिखाना शुरू कर देगें। अगर गर्भ में पल रहा शिशु अभी तक उल्टी मुद्रा(पॉजीशन) में है तो यह वो वक्त है जब उसे सीधी अवस्था में लाने की जरुरत है। अगर आपके गर्भ में पल रहा शिशु उल्टी मुद्रा में ही रह जाता है तो आपको सी-सेक्शन ऑपरेशन करवा कर बच्चे को जन्म देना पड़ सकता है। इस हफ्ते के दौरान आपको खून की जांच करवाना जरुरी हो जाता है। अगर आपके खून में आरएच एंटीबॉडी पाया जाता है तो आपका डॉक्टर आपको एंटी-डी इंजेक्शन लगाएगा। यह हफ्ता प्रेग्नेंसी के लिहाज से महत्वपूर्ण हफ्तों में से एक होता है।
मां में होने वाले शारीरिक बदलाव:
जैसे-जैसे गर्भाशय का दबाव पेट पर पड़ता है, कब्ज की समस्या उत्पन्न होने लगती है। प्रेग्नेंसी के इस चरण में यह बहुत ही आम लक्षण है। अन्य समस्याएं जैसे थकान, पैरों में खिंचाव, बार-बार मूत्रत्याग करना, अनिद्रा आपको परेशान करते रहेंगे। बहुत सारी महिलाएं इस समय पेट में खिंचाव भी महसूस करती है। यह प्रसव का झूठा संकेत होता है। दरअसल ज्यों-ज्यों गर्भाशय का आकार बढ़ता है वो नाभि की तरफ स्थानांतरित होता है और पेट पर दबाव डालता है इस वजह से सीने में जलन की समस्या उत्पन्न होती है। औसतन इस हफ्ते तक आते-आते महिलाओं का वजन 8-10 किलो तक बढ़ सकता है।
शिशु में होने वाला विकास:
इस हफ्ते तक आते-आते गर्भ में पल रहे शिशु की लम्बाई 14.8 इंच और वजन 997 ग्राम तक हो जाता है। पिछले कुछ हफ्तों से शिशु का विकास धीमा पड़ गया होता है। मगर इस हफ्ते से शिशु का विकास फिर से तेज गति से शुरू हो जाता है। आप अल्ट्रासाउंड की तस्वीर में शिशु के वजन में वृद्धि को देख पायेंगे। इस हफ्ते में शिशु की आंखे पूरी तरह से खुल जाती है। शिशु के शरीर में एंजाइम सिस्टम और एंडोक्राइन सिस्टम(अंतः स्रावी प्रणाली) विकसित होना शुरू हो जाता है। ज्यों-ज्यों गर्भ में पल रहा शिशु में गति आएगी, आप उसके लात और मुक्के महसूस करेंगी। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का उनतीसवां सप्ताह]
प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:
क्या खाएं:
इस दौरान डेयरी उत्पादों को अपने आहार में शामिल करें। खासकर की दही, जो कि आपके और शिशु की सेहत के लिए जरुरी है। इसमें बाकी डेयरी प्रोडक्ट से ज्यादा कैल्शियम होता है जो कि बच्चे की हड्डियों के विकास के लिए जरुरी होता है और यह प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को कम करने में भी मदद करती है। साथ ही शकरगंदी (स्वीट पोटैटो) भी आपके लिए इस दौरान लाभकारी है। इसमें विटामिन ए की सही मात्रा होती है। शकरगंदी खाने से आपकी पाचन क्रिया भी सही रहती है।
क्या ना खाएं:
इस दौरान कच्चा या कम पका मांस जैसे सी-फूड ना खाएं क्योंकि इनमें कोलिफॉर्म बैक्टीरिया(coliform bacteria) होने की संभावनाएं होती है जो कि आपके लिए सही नहीं है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का सत्ताइसवां सप्ताह]
एक्सरसाइज:
अगर आप अब तक एक्सरसाइज करती आई हैं तो अब पहले की तरह एक्सरसाइज ना करें और अपना व्यायाम करने का पैटर्न बदल लें। इस दौरान आपको हल्की और सॉफ्ट मूव्स करने की जरुरत है। खुद को ताजी हवा देने के लिए सुबह के समय सूरज उगने के दौरान घूमना अच्छा होगा, साथ ही आप योग और ध्यान भी लगा सकती है। हो सके तो योगा क्लास ज्वाइन कर लें।
पहनावा:
इस दौरान कुछ महिलाएं सोचती है कि वो ढीले कपड़े पहनेंगी तो उनका बंप नहीं दिखेगा और इसके चलते वो ऑवरसाइज्ड कपड़े खरीदती है जिससे पेट वाले हिस्से पर तो वो सही रहते हैं लेकिन बाकी जगह ढ़ीले लगते है। ऐसा करने से बेहतर है कि आप मेटरनिटी ड्रेस खरीदें जो कि आपको सभी जगह पर फिट रहें।
मानसिक स्वास्थ्य:
इस दौरान आपका मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद आवश्यक है। यह आपके और आपके बच्चे, दोनों के लिए जरुरी है। इसके लिए खुद को तनाव मुक्त रखें और खुश रहने की कोशिश करें जिससे सकारात्मक विचारों आपके दिमाग में आयेंगे। प्रेग्नेंसी की अवस्था से गुजर चुकी महिलाओं के साथ बातचीत करना भी फायदेमंद होगा। उनसे उनका अनुभव पूछें और अपने अनुभव के बारे में बताएं।

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