प्रेग्नेंसी का पच्चीसवां सप्ताह

Read in English
25th week of pregnancy: Body changes and symptoms

अब आप अपनी प्रेग्नेंसी के पच्चीसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुकीं हैं। यह समय बहुत ही संवेदनशील होता है क्योंकि इस समय आप पांच महीने और दो सप्ताह की गर्भावस्था में है। इस समय में बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाओं को डायबिटीज होने का खतरा होता है। यह कोई चिंताजनक बात नहीं है। ऐसे समय में यह अधिकतर महिलाओं में पाया जाता है जो समय के साथ ठीक हो जाता है इसलिए इसकी जांच करवाएं और दवाइयां लेना शुरू करें। इसके साथ ही कई बार डॉक्टर एक से अधिक बार आपके शरीर से खून लेते है, इससे आश्चर्यचकित होने की जरूरत नहीं है इससे आपके या आपके बच्चे के स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा। तो आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी के पच्चीसवें सप्ताह में होने वाले कुछ खास परिवर्तनों के बारे।

मां में होने वाले शारीरिक बदलाव: इस सप्ताह में आप महसूस करेंगी की आपके बालों की लम्बाई बढ़ने लगी है इसलिए अपने बालों की देखभाल शुरू कर दें, क्योंकि बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाओं में यह देखा गया है कि प्रसव के बाद उनके बाल झड़ने लगते है। जैसे-जैसे आपकी त्वचा में खिंचाव आने लगेगा वैसे-वैसे त्वचा में खुजली और रूखापन होेने लगेगा। जैसा की आपने पहले भी यह नोटिस किया होगा की आपकी आंखों में सूखापन है वो अब भी बरकरार रहेगा। इसके साथ ही इस बात को भी महसूस करेगें की आपका शरीर ज्यादातर समय गर्म ही रहता है। यह हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। इस दौरान आपको कब्ज, गैस, नींद ना आना और सीने में जलन जैसी परेशानी हो सकती है।

बच्चे में होने वाला विकास: इस सप्ताह से बच्चे के बाल बढ़ने लगते हैं। साथ ही गर्भ में बच्चे का विकास इन हफ़्तों में बहुत तेजी से होने लगता है। बच्चे की लम्बाई 13½ इंच हो जाती है और उसका वजन 680 ग्राम हो जाता है। 25वें सप्ताह में बच्चे की त्वचा में वसा का जमाव होने लगता है। अगर आप अपना 3डी अल्ट्रासाउंड करवाएं तो साफ-साफ ये देख पायेगें कि आपका बच्चा अब पूरी तरह से विकसित हो चुका है। इस अवस्था में आने के बाद आपको अपने बच्चे के द्वारा की जाने वाली मूवमेंट का अनुभव होने लगेगा जिसमें उसका पैर मारना, हाथ मारना शामिल होता है। इसके लिए चिंता न करें। इनमें से ज्यादातर मूवमेंट्स को बच्चे के स्वास्थ्य के लिये बहुत ही अच्छा माना जाता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का चौबीसवां सप्ताह]

प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:

क्या खाएं: आप अब तक जो भी खाते हुए आईं है उसे ही खाएं। खाने में विटामिन ए, बी और सी को सही मात्रा में ले। साथ ही फाइबर युक्त भोजन लें, इससे रक्त संचार सही रहता है और कब्ज की परेशानी में राहत मिल सकती है। सही मात्रा में मिनरल और कैलोरी का सेवन करें। इस सप्ताह से कैलोरी ज्यादा ले सकती है, यह आपको वजन बढ़ाने में मदद करेगा। इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पियें जिससे की आपके शरीर में पानी की कमी न हो। इसकी कमी के कारण चक्कर आना, थकान, सांस लेने में तकलीफ आदि होने की सम्भावना होती है।

क्या ना खाएं: विटामिन ए से युक्त आहार अधिक ना लें इससे गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान हो सकता है। एक समय में हैवी डाइट ना लें। समय के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं। इस दौरान जंक फूड का सेवन ना करने की सलाह दी जाती है। ऐसे सलाद अधिक ना खाएं जिनमें कैलोरी की मात्रा कम है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का छब्बीसवां हफ्ता]

एक्सरसाइज: आप अब तक अधिक व्यायाम कर रही थी तो इस सप्ताह से एक्सरसाइज को थोड़ा हल्का कर लें। एरोबिक्स की जगह लिप्स और जॉगिंग की जगह टहलना शुरु कर दें। अपने वर्क स्केड्यूल को थोड़ा धीमा कर दें। अधिक काम एक साथ ना करें। काम के बीच बीच में थोड़ा आराम कर लें।

पहनावा: इस सप्ताह के दौरान आपका बंप काफी दिखने लगता है, इसलिए सलाह दी जाती है कि ढ़ीले और आरामदायक कपड़े पहनें। हो सकें तो अधिक कढ़े-बुनें और असहज कपड़ों से परहेज करें। पॉलिस्टर की जगह कॉटन पहनने की आदत डालें।

मानसिक स्वास्थ्य: इस सप्ताह के दौरान अधिक तनाव ना लें। तनाव और अधिक दबाव डालने वाली चीजों से दूर रहें। जितना हो सकें खुश रहेें और उन चीजों में शामिल हो जो आपको खुश रखती हैं। इससे बच्चें के स्वास्थ्य पर भी असर होगा।

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "