प्रेग्नेंसी का सत्रहवां सप्ताह

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17th week of pregnancy: Find out what happens during this week

photo credit: fitbirth.in

जैसी ही एक मां प्रेग्नेंसी के सत्रहवें हफ्ते में प्रवेश करती है, वैसे हीं उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी में सहजता महसूस होने लगती है और अपने लक्षणों से आसानी से निपटने की ताकत भी आ जाती है। एक मां अपने बच्चे की हर गतिविधियों को महसूस करने लगती हैं। लेकिन जैसे-जैसे हफ्ते बीतने लगते हैं औरतें प्रेग्नेंसी के दौरान हो रही परेशानियों से बाहर आने लगती हैं। सत्रहवें हफ्ते में अपने खान-पान पर ध्यान देना बहुत आवश्यक हो जाता है, तब ही आपके शरीर में ताकत आती है और आप अपने बच्चे की भी देखभाल कर पाएंगी। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का उन्नीसवां सप्ताह]

मां के शरीर में बदलाव:आपका गर्भाशय आंतों को ऊपर और बाहर की तरफ धकेलना शुरू कर देता है। कभी-कभी पैरों में दर्द होता है, जिसे सेक्टिक (sciatic) नर्व पेन के नाम से जाना जाता है, जो कुछ महिलाओं के लिए कष्टदायी भी हो सकता है। सेक्टिक नर्व शरीर का सबसे बड़ा नर्व होता है, जो गर्भाशय के अंदर होता है। बच्चे के बढ़ने के साथ यह दर्द शुरू हो जाता है क्योंकि सेक्टिक नर्व पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है इसलिए एक जगह पर लंबे समय तक खड़े ना रहें। सोते वक़्त पैरों के नीचे तकिया रख लें, ऐसा करने से आपको दर्द से राहत मिलेगी। कुछ महिलाओं को योनि स्राव और नाक बंद की भी शिकायत होती है। ऐसा होना बहुत सामान्य है, आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।

बच्चे का विकास: बच्चे का चेहरा पूरी तरह मानव शरीर जैसे आकार में आ जाता है, खासकर बच्चे की भौहें और पलक भी पूरी तरह विकसित हो जाती है। बच्चे की लंबाई लगभग 6 इंच तक हो जाती है और वजन भी लगभग 150 ग्रा. पहुंच जाता है। गर्भनाल की लंबाई बढ़ने लगती है और उनमें मजबूती भी आने लगती है। बहुत अधिक तेज़ आवाज आपके बच्चे को डरा सकता है क्योंकि सत्रहवें हफ्ते तक आते-आते आपके बच्चे की सुनने की शक्ति बढ़ जाती है। आपके बच्चे की त्वचा अभी भी बहुत कोमल होती है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का सोलहवां सप्ताह]

प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:क्या खायें:इस दौरान आपको काफी सावधानी के साथ अपने खाने की चीजों को चुनना चाहिए, ऐसे समय पर थोड़ी भी असावधानी से गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाएगा। प्रोटीन,आयरन, कैल्शियम, विटामिन-सी युक्त भोजन का सेवन ऐसे समय पर बहुत जरुरी है। प्रोटीन बच्चे की कोशिकाओं का विकसित करता है, प्रोटीन के लिए आप मीट, चिकन, बीन्स और टोफू जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। आयरन मां और बच्चे के शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाता है, आयरन की कमी को पूरा करने के लिए वसा रहित मीट, मछली, गेहूं ब्रेड और अनाज का सेवन करें। गर्भाव्यस्था के दौरान कैल्शियम का सेवन बहुत जरुरी यह बच्चे की विकसित होती हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है इससे हड्डियों को मजबूती मिलेगी। इसके सेवन के लिए आप नॉनफैट या कम वसा वाले दूध, दही, पनीर और सोया का प्रयोग करें। विटामिन-सी के अंदर एस्कॉर्बिक एसिड होता है जो आपके और बच्चे के इम्यून सिस्टम को मजबूती देता है, इससे प्रसव के समय बच्चा कई बीमारी से सुरक्षित रखता है ।

क्या न खायें: जैसे कि ऊपर बताया गया है कि ऐसे समय में आपको काफी संभाल कर खान-पान की चीजों का प्रयोग करना है, इसलिए आपको को ध्यान रखना चाहिए कि आप बाहर का तला-भुना खाना न खाए, उन खाद्य पदार्थों का खाना न खाए जिससे शरीर में किसी भी प्रकार की हानि हो। इस दौरान कॉफ़ी का सेवन कम करें क्योंकि कॉफ़ी में कैफीन की मात्रा अधिक होती है जो आपके और बच्चे के ह्रदय के स्वास्थ्य के लिए नहीं है।

एक्सरसाइज:गर्भावस्था के दौरान एक्सरसाइज करने से आप शारीरिक रूप से तो फिट रहेगीं ही साथ ही साथ इसका परिणाम आपको प्रसव के दौरान भी देखने को मिलेगा, गर्भावस्था के दौरान एक्सरसाइज करने से प्रसव के समय होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि आप जो भी एक्सरसाइज करें उससे पहले अपने डॉक्टर से इसके बारें में सलाह जरुर करे लें, इस दौरान किए जाने वाले एक्सरसाइज, आपकी गर्भावस्था से जुड़े स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इस दौरान आपको मुख्य रूप से योग, मेडिटेशन और जॉगिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, इससे आपके भीतर ताजगी रहेगी, सुबह के समय पर नंगे पैर हरी घासों पर घूमना भी काफी फायदेंमंद माना जाता है।

पहनावा:इस दौरान आपको अपने आराम के अनुसार ही कपड़ों का चुनाव करें। ऐसे समय में सूती के कपड़े पहने जो आपको ठंडक और आराम भी पहुंचाएगे। इसके साथ-साथ चुस्त कपड़े भी न पहने, ढीले और खुले कपड़े जैसे मैक्सी,कार्डियन पोशाकों को अपनाएं।

मानसिक स्वास्थ्य:गर्भावस्था के दौरान आपको मानसिक रूप से तनाव नहीं लेना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर आपके बच्चे पर देखने को मिलता है। इसके साथ-साथ खुद को खुश रखें, पूरी नींद लें और रोजाना एक समय पर उठे और सोये जो आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का अठारहवां सप्ताह]

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