प्रेग्नेंसी का ग्यारहवां सप्ताह

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11th week of pregnancy know what happens during this time

photo credit: womenshealth.gov

ग्यारहवें हफ्ते के दौरान मां और बच्चे दोनों में कई बदलाव होते हैं। मां अपने बच्चे की दिल की धड़कन सुन चुकी होती हैं और प्रेग्नेंसी के लक्षण जैसे सुबह की थकावट भी जाने लगते हैं लेकिन कब्ज, अपच जैसे कई लक्षण अभी भी रह जाते हैं। आप इस समय में ज्यादा ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं। अब आपको भूख भी ज्यादा लगने लगेगी इसलिए स्वस्थ खाना शुरु कर दें। यह एक प्राकृतिक रास्ता है जिससे आपके बच्चे को पोषक तत्व मिलनें लगते हैं। ध्यान रहे आप जंक फूड ना खाएं यह बच्चे के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्वों का सेवन करें। तो आइए आपको बताते हैं प्रेग्नेंसी के ग्यारहवें हफ्ते के दौरान आप में और बच्चे में क्या बदलाव आते हैं।

मां के शरीर में होने वाले बदलाव:
आपके शरीर में बदलाव की वजह से ग्यारहवें हफ्ते के दौरान लोगों को भी पता चलने लगता है कि आप प्रेग्नेंट हैं। आपका वजन बढ़ने लगता है और आपका पेट भी अलग से दिखने लगता है। पेट का फैलाव प्रोजेस्ट्रोन हार्मोंस के उत्पादन में वृद्धि होने की वजह से होता है। इसके साथ ही आपके बालों, हाथों के नाखून और पैरो के नाखून भी बहुत जल्दी बढ़ने लगते हैं। यह सब आपके शरीर में हार्मोंस के बढ़ने के कारण होता है। प्रेग्नेंसी से आपके शरीर की हर कोशिकाओं पर असर पड़ता है। बहुत सी महिलाओं को लगता है कि इस समय वह अपने बच्चे की मूवमेंट को महसूस कर सकती हैं मगर ऐसा कुछ नहीं होता है। यह आपके पाचन में गैस के कारण होता है। सामान्य से ज्यादा गर्म महसूस करना भी नार्मल होता है। यह सब शरीर में खून की बढ़ोत्तरी के कारण होता है। जैसे-जैसे पहली तिमाही खत्म होती है बहुत सी महिलाओं का वजन डेढ से तीन किलो तक बढ़ जाता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का दसवां सप्ताह: आपमें और आपके गर्भ में पल रहे बच्चे में आने लगेगें ये बदलाव]

बच्चे का विकास:
इस समय तक आपका बच्चा ढाई इंच तक लंबा और उसका वजन लगभग 14 ग्राम तक हो जाता है। आपके बच्चे का आधा सिर बन चुका होता है। पंजा और अंगुलियां अलग हो चुकी होती हैं। बच्चे की हड्डियां मजबूत होने लगती हैं मगर त्वचा अभी भी पारदर्शी होती है। आपका बच्चा बहुत ही एक्टिव होता है मगर मां बच्चे की एक्टिविटी महसूस नहीं कर पाती है। एम्नियोटिक द्रव से घिरे होने के कारण बच्चा निगलना सीख जाता है। बच्चे के अंग अभी भी बन रहे होते हैं और कुछ काम करना शुरु कर देते हैं। अगले तीन हफ्तों में बच्चे का आकार पहले से दोगुना हो जाता है। नाल में अधिक रक्त वाहिकाओं की वजह से बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलने लगते हैं जिससे बच्चे का विकास जल्दी होता है। गर्दन से सिर की ओर कान सही स्थिति में आने लगते हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान भोजन:
क्या खाएं:
प्रेग्नेंसी के सभी हफ़्तों में पिशन बेहद जरुरी होता है। इस हफ्ते भी सही पोषण का होना बेहद जरुरी है। प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन, कैल्शियम से परिपूर्ण भोजन का सेवन करना इस दौरान बेहद जरुरी होता है। मां का सही पोषण ही शिशु के पोषण के लिए जिम्मेदार होता है। दुग्ध उत्पाद, हरी सब्जियां, फल, मेवें, अंडे वगैरह का सेवन करें।कभी खुद को भूखे न रखें। हरी सब्जियों में ब्रोकली, पालक, इत्यादि का सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक रहता है। [ये भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी का बारहवां सप्ताह]
क्या ना खाएं:
कच्चे अंडे, अधपके मांस, सी फ़ूड इत्यादि के सेवन से बचें। वैसे भोज्य पदार्थ जो प्राकृतिक तरीके से नहीं बनाये गए हो उनका सेवन न करें। आजकल फलों और सब्जियों को उगाने में भारी मात्र में कीटनाशकों का इस्तेमाल होता है इसलिए बेहतर होगा की आर्गेनिक फ़ूड का ही सेवन करें। कैफीन का सेवन प्रेग्नेंसी के लिहाज से सही नहीं होता इसलिए इसका सेवन या तो बंद कर दें या फिर करें भी तो बहुत ही कम मात्रा में करें। शराब से परहेज ही रखें। थोड़ी शराब भी इस दौरान हानिकारक हो सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान एक्सरसाइज:
क्या करें:
प्रेग्नेंसी में सही पोषण के साथ-साथ व्यायाम की भी जरूरत होती है। व्यायाम से तात्पर्य जिम में जाकर पसीने बहाने से नहीं है। इस दौरान हलके फुल्के व्यायाम जैसे टहलना, चलना, तैरना इत्यादि का अभ्यास करें। इन हलके फुल्के व्यायाम के आलावा किसी योग प्रशिक्षक के संरक्षण में प्रेग्नेंसी के लिए जरुरी योगासन करें।
क्या न करें:
भारी व्यायाम भूलकर भी न करें। ऐसा करने से गर्भ पर बुरा असर पड़ सकता है।उन व्यायाम को भी न करने जिनमे सांस रोकनें की आवशयकता होती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान पहनावा:
क्या पहनें:
प्रेग्नेंसी के दौरान पहनावा भी काफी मायने रखता है। इस दौरान ऐसे कपडे का चुनाव करें जो ढीले-ढाले और आरामदायक हों। सूती कपडे ही पहनें। घर और बाहर दोनों जगह ही है ऐसे कपडे पहने जिनको पहनने में कोई असहजता न हो।
क्या ना पहनें:
इस दौरान भारी भरकम कपडे या चुस्त कपडे न पहनें। सिंथेटिक कपड़ों से दूर रहें। गंदे कपडे भी न पहनें।

मानसिक स्वास्थ्य:
जैसे-जैसे प्रेगनेंसी के हफ्ते गुजरते हैं महिलाओं में भावनात्मक परिवर्तन आने लगता हैं। इस दौरान महिलाओं का तुरंत भावुक हो जाना या मूड स्विंग होना आम होता है। ऐसी स्थति में खुद पर नियंत्रण रखना जरुरी होता है। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा वक़्त ऐसे काम करने में बिताएं जिनमे आपको ज्यादा ख़ुशी मिलती हो। मन में नकरात्मक विचार न लायें। ऐसे लोगों के साथ रहें जिनसे आपको सकरात्मक ऊर्जा मिले।

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