ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने से पहले जानें कुछ जरुरी बातें

things to know before doing blood pregnancy test

होम प्रेग्नेंसी टेस्ट करन के बाद अगर महिला को सकारात्मक परिणाम दिखते हैं तो ऐसे में डॉक्टर ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट की सलाह देते हैं। क्या आप जानती हैं कि ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट क्या है और ये कैसे काम करता है। ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट की सलाह आमतौर पर पहले पीरियड्स मिस हो जाने के बाद दी जाती है। पीरियड्स मिस हो जाने के 10 दिन बाद इस परीक्षण के जरिए गर्भवती होने की पुष्टि हो जाती है। ब्लड टेस्ट से आपके खून में एचसीजी के सही स्तर का पता लगाया जाता है। ब्लड टेस्ट आपके खून में एचसीजी हार्मोन के बहुत कम स्तर को भी पहचान सकता है। अगर आप होम प्रेग्नेंसी टेस्ट कर चुकी है तो आपके लिए ये जानना जरुरी होगा कि ब्लड टेस्ट किस तरह काम करता है और यह बाकी सभी परीक्षण, जैसे यूरिन टेस्ट से किस तरह अलग है। [ये भी पढ़ें: क्यों नहीं करनी चाहिए समय से पहले गर्भावस्था की जांच]

क्या है ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट:
ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट एक क्वांटिटेटिव एचसीजी ब्लड टेस्ट(Quantitative HCG Blood Test) है जिसके जरिए महिला के खून में ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन(एचसीजी) के स्तर की जांच कराई जाती है। जब कोई महिला गर्भवती होने की जांच कराने जाती है तो उन्हें अक्सर इस टेस्ट को कराने की सलाह दी जाती है। इसे केवल ब्लड टेस्ट भी कहा जा सकता है।

एचसीजी के स्तर के लिए आपके रक्त की जांच करने के लिए किसी एक नस से ब्लड सैंपल लिया जाता है। इस प्रक्रिया को वेनीपंक्चर(Venipuncture) कहा जाता है। एचसीजी एक हार्मोन है जो केवल गर्भवती महिलाओं में ही पाया जाता है और इसकी जांच गर्भधारण के 8 या 10 दिन के  बाद की जाती है। चाहे आप होम प्रेग्नेंसी टेस्ट किट के जरिए यूरिन की जांच करें या डॉक्टर की मदद से ब्लड टेस्ट कराएं, इसका परिणाम आपके रक्त में एसीजी की मात्रा पर ही निर्भर करता है। [ये भी पढ़ें: आखिर क्यों प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता]

ब्लड टेस्ट कैसे करता है काम:
things to know before doing blood pregnancy testब्लड टेस्ट अधिक संवेदनशील होता है और इसमें यूरिन टेस्ट से अधिक जानकारी मिल जाती है। इसके द्वारा मिलने वाले परिणाम बिल्कुल साफ होते हैं जैसे-आप गर्भवती हैं क्योंकि आपके रक्त में एचसीजी की मात्रा पाई गई है, या आप गर्भवती नहीं है क्योंकि आपके रक्त में एचसीजी नहीं है।

ब्लड टेस्ट आपको होम प्रेग्नेंसी टेस्ट की तरह केवल हां या ना में ही रिजल्ट नहीं देता है बल्कि इसके जरिए आपको एचसीजी की मात्रा और संख्या का भी पता चल जाता है कि आपके खून में कितना एचसीजी है और कितना था। आप इससे पहले के टेस्ट की तुलना भी कर सकते हैं। एचसीजी की मात्रा गर्भावस्था के शुरुआती दौर में हर दूसरे दिन मे दोगुनी हो जाती है।

ब्लड टेस्ट के परिणाम को कैसे देखा जाता है:
things to know before doing blood pregnancy testक्वांटिटेटिव एचसीजी ब्लड टेस्ट की मदद से सामान्य तौर पर पता चलता है कि महिला के रक्त में एचसीजी का स्तर पहली तिमाही में लगातार बढ़ रहा है और फिर घटना शुरु हो जाता है। इससे अलग या असामान्य परिणाम मिलने पर और कई बातें हो सकती हैं।
जब एचसीजी का स्तर सामान्य से अधिक हो तो:

  • एक से अधिक भ्रूण यानि जुड़वा बच्चे की संभावना होती है।
  • किसी तरह का संक्रमण या यूटेरस में ट्यूमर होना।
  • यूटेरस में नॉन कैंसेरियस ट्यूमर।
  • ओवेरियन ट्यूमर।
  • टेस्टिक्यूलर कैंसर (पुरुषो में)।

जब एचसीजी का स्तर सामान्य से कम हो तो:

  • बच्चे की गर्भ में मौत की संभावनाएं।
  • अधूरा या पूरा गर्भपात।
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी।

खून की कमी होने की संभावनाएं: हालांकि अधिकतर लोगों को ब्लड टेस्ट के दौरान किसी तरह का खतरा नहीं होता है लेकिन कुछ महिलाओं में खून की कमी होने की संभावनाएं हो सकती हैं। ब्लड टेस्ट के दौरान खून की जांच कराने के लिये सैंपल लिया जाता है। इसमें जरुरत से अधिक रक्त निकल जाने की संभावनाएं होती है जिसके कारण महिला को अधिक रक्त स्राव होने, थकान, चक्कर आने या संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। [ये भी पढ़ें: जानें क्यों नहीं करना चाहिए गर्भावस्था की पूर्व जांच]

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "