महिलाओं को बांझपन की दवाओं से हो सकते हैं ये फायदे और नुकसान

advantages and disadvantages of infertility medicines in women

आज के समय में बहुत सी महिलाएं बांझपन की परेशानियों से जूझ रही है। बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर महिलाएं बहुत सी ऐसी दवाएं देतें हैं। जिससे महिलाओं में प्रजनन की क्षमता बढ़ती है। कई बार यह इलाज सफल हो जाता है और कई बार इस साइड इफेक्ट देखने को भी मिलतें हैं। बांझपन के इलाज में प्रयोग में लायी जाने वाली दवाएं असल में गर्भधारण के लिए हार्मोन्स को बढ़ाने और प्रजनन की क्षमता को बढ़ाने का काम करती है, इन दवाएं से महिला प्रेग्नेंट नहीं होती है, बल्कि उसके प्रेग्नेंट होने कि उम्मीदें बढ़ जाती है। आइए जानतें है इन दवाओं के इस्तेमाल से होने फायदे और नुकसान के बारे में।
बांझपन को दूर करने वाली दवाइयों के फायदे:
advantages and disadvantages of infertility medicines in women

  • बांझपन को दूर करने वाली दवाएं हार्मोन्स को बनने में मदद करती है और साथ ही प्रजनन के लिए विभिन्न प्रकार के हार्मोन्स के बीच एक पुनः संतुलन बनाने का काम करता है।
  • महिलाओं में डिंबोत्सर्जन चक्र को सुचारू करने के लिए मदद करता है।
  • ये दवाएं ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने का काम करता है जो बांझपन का एक कारण माना जाता है।
  • कई दवाएं बांझपन में महिलाओं में विटामिन और मिनरल्स को बढ़ाने का काम करती है। ये विटामिन और मिनरल्स प्रजनन प्रक्रिया के बाद भ्रूण से बच्चे के शरीर के रूप में विकसित होने के लिए जरुरी होता है। यह गर्भपात की संभावना को भी दूर करता है।
  • इन दवाओं से जननांग में रक्त का प्रवाह सही तरीके से होता है, जो प्रसव को ठीक रूप से होने के लिए लाभदायक होता है।
    बांझपन को दूर करने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट:

advantages and disadvantages of infertility medicines in womenबांझपन को दूर करने वाली बीमारियों के काफी साइड इफेक्ट भी देखने को मिलते हैं इसलिए जब भी इस तरह की दवाई खाने के बारें में सोचे तो सबसे पहले किसी डॉक्टर से सलाह कर लें जो आपका सही मार्गदर्शन करेगें। [ये भी पढ़ें: सीजेरियन डिलीवरी कैसे मां के शरीर को करती है प्रभावित]
एक से अधिक बच्चे एक ही समय पर होना:
एक शोध के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं में यह पाया गया है कि इस तरह की दवाइयों के कारण उनमे एक से अधिक बच्चे एक समय पर होने की संभावना बन जाती है। इसमें तीन या तीन से अधिक बच्चे भी होने की संभावना होती है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए यह बहुत ही बड़ा जोखिम होता है, इसका बहुत बुरा असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
समय से पहले प्रसव और अविकसित बच्चे का जन्म:
इन दवाइयों के लम्बे समय तक सेवन से कई बार समय से पहले प्रसव और अल्पविकसित बच्चे का जन्म होता है। समय से पहले प्रसव के दौरान मां और बच्चे दोनों के जीवन को खतरा बढ़ जाता है साथ ही अल्पविकसित बच्चे को भी समय पर बचा पाना बहुत मुश्किल काम होता है। [ये भी पढ़ें : गर्भावस्था के दौरान नकारात्मक भावनाओं को कैसे करें दूर]
ओवरियन हायपर स्टीमुलेशन सिंड्रोम:
दवाओं के जरिए अंडाशय में अंडों और फर्टिलिटी की क्षमता को बढ़ाया जाता है। कई बार दवाओं का काफी समय तक प्रयोग करने से अंडाशय में इन्फेक्शन होने से ओवरियन हायपर स्टीमुलेशन सिंड्रोम होने की संभावना होती है, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द होने लगता है।

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