Baby Sleep: नवजात शिशु का अधिक सोना क्यों जरुरी है

why baby sleep more

Baby Sleep: शिशु का अधिक देर तक सोना एक सामान्य आदत है।

Baby Sleep: नवजात शिशु अपने साथ ढ़ेर सारी खुशियां लेकर आता है। परिवार के सभी सदस्य उसकी देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। खासकर मां उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहती है। अक्सर नई मां के मन में यह सवाल रहता है कि उनका शिशु अधिक क्यों सोता है। शुरुआत में बच्चा 11-17 घंटे की नींद लेता है और अगर उसे यह नींद नहीं मिल पाती तो वह परेशान हो जाता है और चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे में आप ये सोचने लगते हैं कि शिशु का अधिक सोना सामान्य है या नहीं। यह बिल्कुल सामान्य है। शुरुआत में शिशु को पर्याप्त नींद लेना जरुरी होता है। इससे उनका शारीरिक विकास जुड़ा होता है। आइए जानते हैं कि नवजात शिशु का अधिक सोना क्यों जरुरी है। [ये भी पढ़ें: जानिए शिशु का माता-पिता के साथ सोना कैसे होता है फायदेमंद]

Baby Sleep: नवजात शिशु का अधिक नींद लेना क्यों आवश्यक है

  • शारीरिक विकास होता है
  • न्यूरोसेंसरी विकास
  • दिमागी विकास
  • सीखने में मदद
  • स्वभाव पर प्रभाव

शारीरिक विकास होता है

why baby sleep more
बच्चे की पूरी नींद उसके शारीरिक विकास में मदद करती है।

शिशु के शारीरिक विकास में नींद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब वो सो रहे होते हैं तो उनके शरीर में ग्रोथ हार्मोन रिलीज होते हैं जो उनके शारीरिक विकास में मदद करते हैं। इसके अलावा सोते वक्त बच्चे बढ़ते हैं।

न्यूरोसेंसरी विकास
शिशु के न्यूरोसेंसरी सिस्टम के विकास के लिए भी उसका पर्याप्त नींद लेना बेहद जरुरी है। शिशु जब सो रहा होता है तो उनका न्यूरोसेंसरी सिस्टम उत्तेजित हो जाता है जिससे शिशु की देखने, सुनने, स्पर्श करने की क्षमता विकसित होती है। [ये भी पढ़ें: जानिए बच्चे के लिए किस पोजीशन में सोना सुरक्षित होता है]

दिमागी विकास

why baby sleep more
शिशु शुरुआत में 11-17 घंटे की नींद लेता है।

शिशु के दिमागी विकास के लिए भी उनका सही मात्रा में सोना जरुरी है। जब शिशु सो रहा होता है तो उनमें ब्रेन प्लास्टिसिटी बढ़ती है जो उन्हें सीखने, व्यवहार करने में मदद करती है। साथ ही दिमाग को विकसित करती है।

सीखने में मदद
पर्याप्त नींद आपके शिशु की मेमोरी को सुधारने में मदद करती है जिससे शिशु के सीखने की क्षमता बेहतर होती है। शिशु अपने आसपास की चीजों को जल्दी सीखता है और उन्हें अपनी आदत में ढ़ाल लेता है। इसलिए जब वह सोता है तो उसके सीखने की गुणवत्ता बढ़ती है।

स्वभाव पर प्रभाव
यह आप भी जानते हैं कि अगर आपका शिशु पूरी नींद नहीं लेता है तो उसका स्वभाव तो प्रभावित होता ही है साथ ही वह रोने लगता है। अगर आपका शिशु पूरी नींद लेता है तो वह दिनभर तरोताजा रहता है और उसका स्वभाव भी सामान्य रहता है। [ये भी पढ़ें: नवजात शिशु की सुकून भरी नींद के लिए अपनाएं ये तरीके]

ये कारण बताते हैं कि आपको अपने शिशु को उतनी नींद लेने देनी चाहिए जितनी वह चाहता है। ऐसा ना करने पर उसका विकास रुक सकता है। इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ें।

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "