शिशु को पानी पिलाने का सही समय क्या है

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When can newborns start having water

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जब आपके घर में नन्हा मेहमान आता है तो आपके रिश्तेदार और पड़ोसी भी शिशु की देखभाल के लिए नई-नई सलाह लेकर आते हैं लेकिन उनकी सलाह कितनी सही साबित हो सकती हैं इसका अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। हर व्यक्ति की सलाह दूसरे से अलग होती हैं लेकिन अपने शिशु की देखभाल के लिए आप सिर्फ बातों पर विश्वास तो नहीं कर सकती हैं। इन्ही में से एक सवाल ये भी है कि नवजात शिशु को पानी पिलाने का सही समय क्या है। आपने सुना होगा कि नवजात शिशु को पानी पिलाना चाहिए ताकि उसे डिहाइड्रेशन से बचाया जा सकें लेकिन आप जानती हैं कि बच्चे के शरीर को पेय की पूर्ति केवल स्तनपान से हो जाती है। हालांकि फिर भी ये जानना उचित होगा कि शिशु को पानी पिलाने का सही समय क्या है। [ये भी पढ़ें: पिपरमिंट तेल है बच्चों के लिए फायदेमंद, जानें कैसे]

नवजात शिशु: नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे बेहतर आहार है और शुरुआती दिनों में उसे इसके अलावा और कुछ भी देने की जरुरत नहीं होती हैं। इस समय में पानी के सेवन के लिए बिल्कुल मना किया जाता है। मां के दूध में पाया जाने वाला तत्व कोलोस्ट्रम बच्चे को हाइड्रेट रखने के लिए काफी होता है और इसके अलावा उसे कोई भी आहार की जरुरत नहीं है। आप जितना अधिक बच्चे को स्तनपान कराती है उतना ही दूध का उत्पादन बढ़ता है और बच्चा उतना अधिक पोषण ले पाता है।

पहले दिन से तीन माह तक: शिशु के जन्म से लेकर पहले तीन माह तक उसे पानी नहीं पिलाना चाहिए। अधिक पानी का सेवन से शिशु को ओरल वॉटर इनटॉक्सिकेश हो सकता है और यह बच्चे के दिमाग और दिल को प्रभावित कर सकता है। साथ ही ज्यादा पानी पीने से शिशु का पेट भरा रहेगा और वह दूध नहीं पी पाएगा।[ये भी पढ़ें: अपने शिशु के साथ यात्रा करते वक्त इन आवश्यक टिप्स का पालन करें]

चार माह से छह माह तक: इस समय के दौरान शिशु को पानी पिलाने से किसी तरह का कोई नुकसान तो नहीं होता है लेकिन इस समय में भी शिशु का पानी का सेवन कराने की सलाह नहीं दी जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके शिशु को जितनी भी पेय की आवश्यकता होती है उसकी आपूर्ति मां के दूध से हो जाती है।

छह माह से ऊपर: छह माह के बाद शिशु को दिन में एक दो बार पानी देना उचित है। जब आपका बच्चा सॉलिड फूड्स खाने लगता है तो इस दौरान आप शिशु को थोड़ा पानी और दूध का सेवन करा सकती हैं। छह महीने तक शिशु को केवल स्तनपा कराना ही बेहतर विकल्प होता है। [ये भी पढ़ें: बच्चों में कैल्शियम की कमी के लक्षणों को कैसे कम करें]

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