बच्चों को रोगों से बचाने के लिए जरूर लगवाएं ये टीके

some important vaccination for baby parents must know about

नवजात शिशु और बच्चों के स्वास्थ्य को बनाएं रखने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। टीकाकरण(वैक्सिनेशन) शिशु को कई तरह की बीमारियों से बचाने के लिए किया जाता है। टीके में पाए जाने वाले एंटिजेन्स प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडीज बनाने में मदद करते हैं। एंटीबॉडीज के कारण हमारा शरीर वायरस के संपर्क में आने के बाद बीमारियों से बच जाता है। जन्म के बाद डॉक्टर शिशु को कई तरह के वैक्सीन देने की सलाह देते हैं जैसे न्यूमोकोकल कोन्जुगेट वैक्सीन(पीसीवी) इनएक्टिव पोलियो वायरस वैक्सीन(आईपीवी)। आमतौर पर दिए जाने टीकों के अलावा कुछ ऐसे वैक्सीन है जिनके बारे में माता-पिता को जानकारी नहीं होती लेकिन ये जरुरी होते हैं।[ये भी पढें:बच्चों में सांस लेने की परेशानी के पीछे हो सकते है ये कारण]

वैरिसेला(चिकनपॉक्स) वैक्सीन: चिकनपॉक्स की समस्या काफी आम है। यह आपके बच्चे में किसी दूसरे बच्चे से भी फैल सकती है। आपने देखा होगा कि बहुत से माता-पिता अपने बच्चे को उस दोस्त के साथ खेलने नहीं भेजते जो चिकनपॉक्स से संक्रमित हैं। इसके पीछे का कारण होता है चिकनपॉक्स का वायरस। अगर आपका बच्चा बाहर खेलने गया है और वहां किसी बच्चे को ये समस्या है तो आपके शिशु को भी ये समस्या हो सकती है। बेहतर है कि आप बच्चे को रोकने की बजाय बीमारी को रोके और अपने शिशु को वैरिसेला (चिकनपोक्स) वैक्सीनेशन लगवाएं।

यह टीका बच्चे को 12 महीने से 12 साल की उम्र के बीच दो डोज में दिया जाता है। डॉक्टर्स का मानना है कि शिशु को इस वैक्सीन का पहला डोज 12 से 15 महीने के बीच और दूसरा डोज 4 से 6 साल की उम्र में देना चाहिए। इस वैक्सीन के कुछ साइड इफेक्टस हो सकते हैं जैसे- इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर दर्द, सूजन और लालपन, बुखार आदि। [ये भी पढें:बच्चे के कान दर्द को दूर करने के लिए आजमाएं ये टिप्स]

रोटावायरस वैक्सीन(आरवी): रोटावायरस एक बेहद संक्रामक वायरस है जिसके फैलने से शिशुओं और छोटे बच्चों को गंभीर डायरिया हो सकता है। साथ ही इसके कारण अक्सर उल्टी और बुखार भी होता है। यदि इसका ठीक समय पर उपचार न किया जाए, तो बच्चे को डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। एक अंतरराष्ट्रीय नॉन प्रोफिट स्वास्थ्य सेवा संगठन पाथ के अनुसार, हर साल विश्वभर में रोटावायरस की वजह से हुए डायरिया के कारण 5 साल की उम्र के करीब 4 लाख 50 हजार से अधिक बच्चों की मृत्यु हो जाती है। साथ ही वायरस से संक्रमित होने के बाद सालाना कई लाख लोग अस्पताल में भर्ती होते हैं।

इस वायरस से बचने के लिए विशेषज्ञ रोटावायरस वैक्सीनेशन की सलाह देते हैं ताकि बच्चे को वायरस के संपर्क में आने से बचाया जा सकें। शोध बताते हैं कि हर शिशु को इस वैक्सीनेशन को नहीं कराना चाहिए। जिन बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन से एलर्जी की समस्या है उन्हें रोटावायरस वैक्सीन नहीं देना चाहिए। इस टीके को लगाने के बाद होने वाले साइड इफेक्ट आमतौर पर हल्के होते हैं और अपने आप चले जाते हैं। इनमें दस्त और उल्टी शामिल है।

हेपेटाइटिस ए वैक्सीन: हेपेटाइटिस ए एक लिवर की बीमारी है जो हेपेटाइटिस ए वायरस के कारण होती है। इसके लक्षण कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक रह सकते हैं। इस बीमारी से शिशु को बचाने के लिए डॉक्टर हेपेटाइटिस ए वैक्सीनेशन कराने की सलाह देते हैं। इस टीके को 1 से 2 साल के बीच सभी बच्चों को दिए जाना जरुरी है। इस टीके को दो शॉट्स में दिया जाता है। छः महीने के अंतराल में आप इस वैक्सीन को लगवा सकते हैं।

मेनिंगोकोक्सल वैक्सीन(MCV): मेनिंगोकोक्सल रोग एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है जिसमें मस्तिष्क ज्वर और रक्त विषाक्तता होती हैं। बच्चों को ये बीमारी संक्रमित व्यक्ति के साथ खाने, चुंबन करने या उसके श्वास को अंदर लेने के कारण हो सकती है। डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों को ये वैक्सीन 11 से 18 साल के बीच एक खुराक में देना चाहिए। शोध कहते हैं कि मेनिंगोकोक्सल टीके अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं। इनके कारण शिशु में हल्के साइड इफेक्ट्स दिख सकते हैं हैं जैसे दर्द और इंजेक्शन वाली जगह पर लालपन, सिरदर्द, थकान आदि।

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस वैक्सीन(एचपीवी): ह्यूमन पेपिलोमा वायरस(एचपीवी) एक आम वायरस है जो कि जननांगों के माध्यम से फैलता है। 11 से 12 वर्ष के बीच की लड़कियों के लिए एचपीवी का टीके की सलाह दी जाती है। इसके अलावा यह 13 से 26 साल की महिलाओं के लिए भी बताया जाता है।[ये भी पढें:बच्चे को घुटने के बल चलना सिखाने के लिए आजमाएं ये टिप्स]

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "