शिशु जन्म के बाद 48 घंटों तक रखें इन बातों का ख्याल

keep these things in mind during after forty eight hours of baby birth

शिशु के जन्म के बाद अगले 48 घंटे बेहद बच्चे के लिए बेहद नाजुक होते हैं इस दौरान माता-पिता को देखभाल के लिए ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस समय शिशु एकदम से एक नए माहौल में आता है उसके लिए तुरंत इस तरह के वातावरण में खुद को ढालने में थोड़ा समय लगता है। इन 48 घंटों के दौरान की जाने वाली देखभाल ही आने वाले दिनों में बच्चे के स्वास्थ्य के स्तर को निर्धारित करता है। यही वो समय भी होता है जब पहली बार बच्चा दूध पीता है। बाहर के वातावरण में आने के बाद अन्य कई चीजों की जरूरत बच्चे के देखभाल के साथ होती है जो जरुरी भी है। [ये भी पढ़ें: नवजात शिशुओं में होने वाले कान के इंफेक्शन के प्रकार और इसके लक्षण]

शिशु के साथ जुड़ाव:
keep these things in mind during after forty eight hours of baby birth जन्म ही नहीं गर्भधारण के साथ ही मां और बच्चे दोनों के बीच अनदेखा सा संबंध बनने लगता है। जन्म होने के बाद शिशु अपने माता-पिता और सारे परिवार से मिलता है। इस समय शिशु के साथ जुड़ाव बहुत अहम माना जाना है। इस समय मां का अपने बच्चे को गोद में लेना जरुरी होता है। ऐसा करने से मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव बनता है। इस बात को विज्ञान भी मनाता है। इन 48 घंटों में ही मां, बच्चे को दूध पिलाती है, यह दूध बहुत से पोषक तत्वों में परिपूर्ण होता है जो इस बदले हुए वातावरण में बच्चे के लिए बहुत जरुरी होता है। इस समय मां का अपने बच्चे से बात करना भी बेहद जरूरी होता है। इस बात भी ध्यान रखें कि आपका बच्चा आपके साथ एक ही रूम में हो।

स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग):
keep these things in mind during after forty eight hours of baby birthशिशु जन्म के साथ मां के शरीर में दूध बनना शुरू हो जाता है। इस समय मां और शिशु दोनों के यह बहुत नयी बात होती है कि शिशु कैसे दूध पिये और मां कैसे शिशु को ठीक से दूध पिलाये। मां को इस बात का ध्यान रखने कि जरूरत होती है कि वह अपने शिशु जिसको अभी ठीक से स्तनों से दूध पीना नहीं आया है, उसे ठीक से स्तनों को ठीक से पकड़ कर शिशु को दूध पिलाए। इस बात का भी ध्यान रखने की जरूरत होती है कि बच्चा ज्यादा दूध न पी ले, ज्यादा दूध पीने से भी बच्चे को दिक्कत हो सकती है। इन घंटों में सही मात्रा में शिशु को दूध देना और सही अवस्था में दूध देना बहुत जरुरी होता है। सही अवस्था से यहां तात्पर्य है कि शिशु को किस तरह से पकड़ना, उसे ठीक से गोद लेना है। इसके साथ ही यदि एक तरफ दूध घटने लगा हो तो दूसरी तरफ से शिशु को दूध पिलाये। इन 48 घंटों में ब्रेस्टफीडिंग बहुत महत्वपूर्ण होता है इसे ठीक प्रकार से करने के लिए बताई गयी बातों को ध्यान में रखें। [ये भी पढ़ें: अगर डर है बच्चे के बीमार होने का तो रखें इन बातों का ध्यान]

इन घंटों में बच्चे पर नजर बनाये रखें:
keep these things in mind during after forty eight hours of baby birth इन 48 घंटों में शिशु पर से नजर ना हटाएं। अगर आपको लगता है कि शिशु का रंग बदल रहा है या शिशु पीला पड़ रहा है तो आप फ़ौरन डॉक्टर को बुलाए। इसके साथ ही बच्चे के सोने और जागने पर भी पूरी नजर रखें। शिशु को समय-समय पर दूध पिलाते रहें और अगर शिशु दूध नहीं पी रहा हो तो डॉक्टर को बताएं। शिशु में लगे नाल प्लग (cord plug) पर हमेशा ध्यान देतें रहें। उसमे किसी भी तरह के बदलाव होने पर डॉक्टर को तुरंत सूचित करें। [ये भी पढ़ें: बच्चों के कानों में होने वाले इन्फेक्शन का कैसे करें उपचार]

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