बच्चों के कानों में होने वाले इन्फेक्शन का कैसे करें उपचार

how to prevent your baby from ear infection

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अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा है, बहुत ज्यादा रोता है और हमेशा अपने कानों को खींचता रहता है तो इसका कारण बच्चे के कान में इन्फेक्शन हो सकता है। नवजात शिशुओं में यह ज्यादातर पाया जाता है। यह इन्फेक्शन जन्म से या पैदा होने के कुछ दिनों बाद भी हो सकता है। कानों में होने वाले इन्फेक्शन होने के पीछे कारण सर्दी लगाना, वायरस या फंगल की समस्या हो सकती है। इस तरह के इन्फेक्शन कान के अलावा बच्चे के गले, नाक और आंखों में भी हो सकता है। इस तरह के इन्फेक्शन की वजह से बच्चा को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए इसको पहचानना और इसका इलाज करना बेहद जरूरी होता है। [ये भी पढ़ें: बच्चे के स्वस्थ तन-मन के लिए जरुरी हैं ये आहार]

नवजात शिशुओं में कान के इन्फेक्शन के लक्षण:
how to prevent your baby from ear infectionबच्चों के कान में होने वाले इन्फेक्शन के कारण उन्हें बहुत दर्द को सहना पड़ता है। बच्चे इस बात को बता नहीं पाते है लेकिन आप इन लक्षणों से बच्चे की इस परेशानी का अंदाजा लगा सकते हैं। अगर नीचे दिए गये लक्षणों में से कोई भी लक्षण आपके बच्चे में दिखें तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

  • चिड़चिड़ापन
  •  कानों में घडधडाहट
  •  भूख में कमी
  •  नींद न आना
  •  बुखार
  •  कान से तरल पदार्थ निकलना

इन्फेक्शन के उपाय: बहुत बार डॉक्टर की दी हुई दवाइयां काफी देर से असर करती हैं। ऐसे में कुछ घरेलू नुक्सों की मदद से आप बच्चें को कम समय में आराम दे सकते हैं। [ये भी पढ़ें : बच्चे के स्वस्थ तन-मन के लिए जरुरी हैं ये आहार]

सिकाई करें:जब भी बच्चे के कानों में दर्द हो तो उसके कानों की सिकाई करें। किसी कपड़े या तौलिए को तवे या किसी गर्म चीज पर हल्का सा गर्म करें, खुद देखें कि ज्यादा गर्म न हुआ हो। उसके बाद बच्चे के कानों पर सिकाई करें, यह सिकाई 10 से 15 मिनट तक करें।

गर्म तेल:गर्म सरसों का तेल एक बहुत ही अच्छी औषधि के रूप में काम करता है, इसलिए जब भी बच्चे के कानों में दर्द हो तो तेल को हल्का सा गर्म करें और जिस कान में दर्द है उसमे दो से तीन बूंदे तेल की डालें।

सोते समय सिर को ठीक से रखें:
जब भी इस तरह की समस्या हो तो अपने बच्चे के सोने के समय उसके सिर को ठीक से रखें जिससे की कान में आराम मिल, उसे दो तकियों के बीच में सुलाए जिससे कि वह करवट ना ले सके।

इन्फेक्शन के समय इन सावधानियों को बरतें:
माँ का दूध: बच्चे के लिए माँ का दूध बहुत लाभदायक होता है इसलिए बच्चे को कम से एक वर्ष तक तो माँ का दूध दें। माँ के दूध में बहुत से एंटीबायोटिक होते है जो इस तरह की परेशानियों को ठीक करने में मदद करते हैं। [ये भी पढ़ें :  जन्म के बाद 48 घंटों तक रखें इन बातों का ख्याल]

धूम्रपान वाली जगह से बच्चे को दूर रखें:
how to prevent your baby from ear infectionअगर आपके घर में कोई भी धुम्रपान करता है तो अपने बच्चे को उस जगह से दूर रखें। बच्चे के कानों में पहुंचने वाला धुआं बहुत हानिकारक होता है।

समय पर टीकाकरण:बच्चे को हर बीमारी से बचानें के लिए उसका समय-समय पर टीकाकरण जरुर करवाएं। जिससे वह स्वस्थ रहेगा और इस तरह की बीमारियों से भी बचा रहेगा।

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