बच्चों को खिलौने से खेलना बंद करवाकर कैसे क्रिएटिव बनाएं

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How to foster kids creativity by reducing usage of toys

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ज्यादातर बच्चे खिलौनों से खेलना पसंद करते हैं और इस वजह से उनका शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाता है। ये बात माता-पिता को समझने की जरूरत होती है कि बच्चों के लिए सिर्फ खिलौने से खेलना सही नहीं होता है। आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में माता-पिता को अपने बच्चों के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पाता है इस वजह से वो उन्हें खिलौने से खेलने देते हैं, जबकि ये गलत है। अगर आप अपने बच्चे को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना चाहते हैं और उन्हें क्रिएटिव बनाना चाहते हैं तो आपको उसके लिए सबसे पहले उनके हाथों से खिलौन लेने चाहिए और उन्हें आउटडोर गेम्स खेलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। आइए जानते हैं बच्चों को खिलौने से खेलना बंद करवाकर कैसे क्रिएटिव बनाया जा सकता है। [ये भी पढ़ें: नवजात शिशु से जुड़ी बातें जो आपको असहज कर सकती है]

रचनात्मकता को बढ़ावा मिलना:
जब आप बच्चे को कम से कम खिलौने दिलवाते हैं या खेलने के लिए खिलौने नहीं देते हैं तो वह मनोरंजन के लिए ऐसे विकल्प ढूढ़तें हैं जिनकी कल्पना करना आसान नहीं होता है। इस तरह उनकी रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को बढ़ावा मिलता है। बच्चे तरह-तरह की चीजें करते हैं जैसे- खुद से बैटमैन या आयरनमैन बनने की कोशिश करना।

चीजों को शेयर करना:
जब बच्चे सिर्फ खिलौने से खेलते हैं तो वो सोशल होना छोड़ देते हैं। अगर बच्चे चीजों को शेयर करना सिखते हैं तो वो लोगों से सोशल होते हैं और इससे उन्हें शांति मिलती है। लेकिन जब बच्चे खिलौने से खेलते हैं तो उससे उनके आस-पास एक दिवार सी बन जाती है। लेकिन सोशल स्किल्स बढ़ाने से क्रिएटिविटी बढ़ती है। [ये भी पढ़ें: बच्चों को अनुशासित रहना कैसे सिखाएं]

अकेले खेलना:
जब बच्चों के पास कम खिलौने होते हैं तो वो ज्यादा खुलकर खेलते हैं। कम खिलौने होते हैं तो वो आसानी से उन खिलौनों को ही चुनते हैं जिनकी उन्हें जरूरत होती है और साथ ही वो कुछ अलग सोचते हैं जिससे उनकी सोच थोड़ी खुलती है और उनके अंदर थोड़ी क्रिएटिविटी भी आती है।

कम तनाव होता है:
ज्यादा खिलौने होना बच्चों के लिए तनावग्रस्त हो सकता है क्योंकि खिलौनों को सही जगह पर रखना, साफ रखना ये परेशानी का सबब बन सकता है तो इसलिए अपने बच्चे को कम खिलौने दें, इससे उनका तनाव कम होना और बाकि चीजों के बारे में सोचेंगे। [ये भी पढ़ें: सर्दियों में अपने बच्चे का ध्यान कैसे रखें]

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