अपने बच्चे से कैसे भावनात्मक रुप से जुड़ें

how to connect with your child emotionally

माता-पिता और बच्चों का रिश्ता सबसे अलग होता है। उन लोगों के बीच का कनेक्शन सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब आपका रिश्ता मजबूत होता जाता है तो बच्चे माता-पिता के नियमों का पालन करना शुरु कर देते हैं। जो बच्चे अपने माता-पिता के साथ मजबूत जुड़ाव महसूस करते हैं उन्हें कुछ भी बात शेयर करने में दिक्कत नहीं होती है। भरोसे की वजह से वह मोटिवेट होने लगते हैं। जो उनके जीवन में आगे चलकर मदद करता है। इन सब चीजों के लिए बच्चों से भावनात्मक रुप से जुड़े हुए होना जरुरी होता है। जिससे रिश्ते में सकारात्मकता बनी रहती है और झगड़े भी नहीं होते हैं। कुछ तरीकों की मदद से बच्चों से भावनात्मक रुप से जुड़ा जा सकता है। तो आइए आपको इन तरीकों के बारे में बताते हैं। [ये भी पढ़ें: ब्रेस्ट मिल्क कितने समय तक फ्रेश रहता है]

उनके साथ खेलें: आजकल सभी का जीवन व्यस्त हो गया है फिर वो चाहे बच्चे और या बड़ें। स्कूल, होमवर्क, एक्टिविटी की वजह से उन्हें खेलने का समय नहीं मिल पाता है। इसके बाद बच्चे के पास खाने और नहाने का समय बचता है। इन कामों के बाद जो भी थोड़ा सा समय बचे उसमें उनके साथ खेलें। बच्चों के साथ खेलने से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है तो बच्चे के विकास में मदद करता है।

बच्चों के कार्य में दिलचस्पी लें: अपने बच्चे को खुश रखने के लिए आप उनके साथ उनके कामों में मदद या दिलचस्पी दिखा सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप उनकी तरह काम करने लगे। बस उनके साथ बैठकर एक टीम की तरह काम करें। इससे आप दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा साथ ही बच्चा टीम वर्क करना भी सीखेगा। [ये भी पढ़ें: फ्लैट हेड सिंड्रोम से बच्चों को कैसे बचाएं]

रोजाना अकेले थोड़ी देर बात करें: आप पूरे दिन कुछ भी करें लेकिन रोजाना 15 मिनट अपने बच्चे के साथ अकेले में बात करें। अगर उसे कोई दिक्कत है तो बात करें। उस समय में बच्चा जो करना चाहे वह करें। बच्चे को अपना प्यार जाहिर करें। शारीरिक गतिविधियां करें जिससे बच्चा हंसें और बेहतर महसूस करने लगे।

बच्चों के साथ टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल ना करें: जब आप अपने बच्चे से बात करते हैं तो उस दौरान फोन का इस्तेमाल ना करें। इससे बच्चों को अपनी अहमियत पता चलती है कि उनके माता-पिता अपने बच्चे की बात सुनने के लिए सभी काम करना बंद कर देते हैं। इसके साथ ही जब बात कर रहे हों तो गाने भी बंद कर दें। समझें कि आपका बच्चा आपसे क्या कहना चाहता है। कहीं उसे किसी बात की परेशानी तो नहीं है। इससे वह आपके ज्यादा जुड़ने लगते हैं।

उनकी भावनाओं को समझें: अगर आपके बच्चे को गुस्सा आ रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप भी उनकी तरह गुस्सा करने लगें। गुस्सा एक भावना होती है जो निकल जाए तो बेहतर होता है। अगर बच्चा उदास है तो उससे जाकर बात करें। अपने बच्चे का इतना विश्वास जीतें कि उसे आपके सामने रोने में दिक्कत ना हो। [ये भी पढ़ें: शिशु में भोजन की स्वस्थ आदतें कैसे विकसित करें]

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "