जानिए शिशु का माता-पिता के साथ सोना कैसे होता है फायदेमंद

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benefits of Co-sleeping with your baby

दिन हो या रात बच्चे की जरुरतें एक सी होती हैं। उनके रात की जरुरतें खाना, असहज महसूस करना या ठंडा-गर्म महसूस करना होता है। इस दौरान सहज महसूस करने के लिए बच्चे को प्यार की जरुरत होती है जिससे उन्हें सुरक्षित महसूस होता है। बच्चों को अपने माता-पिता के स्पर्श का पता चल जाता है जिसकी वजह से वह सहज महसूस करते हैं। इसके लिए जरुरी है कि उन्हें अपने पास रखा जाए और अपने पास ही सुलाया जाए। बच्चों को अपने साथ सुलाने से कई फायदे होते हैं। तो आइए आपको बताते हैं को-स्लीपिंग आपके शिशु के लिए कैसे फायदेमंद है। [ये भी पढ़ें: शिशु के दूध की बोलत इस्तेमाल करने की आदत को कैसे छुड़ाएं]

1-बच्चे की अच्छी नींद के लिए:
benefits of Co-sleeping with your baby जो बच्चे माता-पिता के साथ सोते हैं उन्हें रात को किसी तरह की परेशानी होने पर शांत महसूस होता है। अगर बच्चा रात को जागता है तो माता-पिता के बीच में सोने से उन्हें सुरक्षित महसूस होता है। इसके साथ ही ब्रेन स्कैन से पता चलता है कि को-स्लीपिंग से बच्चे को स्वस्थ नींद आती है।

2-सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम(एसआईडीएस) का खतरा कम होता है: कहा जाता है बच्चे का मां के साथ सोने से एसआईडीएस होने का खतरा बढ़ जाता है। मगर ऐसा नहीं है बल्कि जो बच्चे सोते हुए रोते हैं उन्हें एसआईडीएस होने का खतरा बढ़ता है। बच्चे के साथ सोने से माता-पिता को उसके परेशान होने के बारे में पता चल जाता है। [ये भी पढ़ें: बच्चों में डिहाइड्रोशन के दौरान दिखते हैं ये संकेत]

3-तापमान सामान्य रहता है:
benefits of Co-sleeping with your baby बच्चे अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं रख पाते हैं। इसलिए बच्चे को सामान्य तापमान वाले कमरे में रखना चाहिए। बच्चे के शरीर से भी हीट निकलती है खासकर उसके सिर से क्योकिं वह भाग शरीर के बाकि अंगों की तुलना में बड़ा होता है। जो बच्चे अपने माता-पिता के साथ सोते हैं उनके शरीर का तापमान सामान्य पाया जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि माता-पिता के शरीर की हीट से बच्चे के तापमान को सामन्य करने में मदद मिलती है।

4-सांस लेने में आसानी होती है: जो बच्चे माता-पिता के साथ सोते हैं उन्हें सांस लेने में बहुत ही कम समस्या होती है। क्योंकि माता-पिता के सांस लेने से कमरे में कार्बन डाई ऑक्साइड का लेवल बढ़ जाता है। जिससे बच्चे को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन मिल पाती है। यही कारण है एसआईडीएस के खतरा कम होने का।

5-हृदय दर स्थिर रहती है: जो बच्चे माता-पिता के साथ सोते हैं उनकी हृदय दर स्थिर रहती है। बच्चे के सही तरह से सांस लेने से भी हृदय दर स्थिर रहती है। [ये भी पढ़ें: बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए ध्यान में रखें ये बातें]

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