आपके गर्भधारण की क्षमता को प्रभावित करता है मोटापा

how obesity affects your chances of conceiving

दुनिया में हर साल 6-8 करोड़ कपल (जोड़े) इनफर्टिलिटी के शिकार होते हैं। जिनमें से 1.5-2 करोड़ कपल भारत में हैं। साथ ही भारत में 10 प्रतिशत लोग मोटापे के कारण इनफर्टिलिटी के शिकार होते हैं। अगर आप गर्भधारण करने की सोच रही हैं तो समझदारी इसी में होगी कि आप अपने वजन को सही कर लें। मोटापे के कारण ना केवल गर्भधारण करने में परेशानी होती है बल्कि और भी कई चीजों के लिए बाधा उत्पन्न करता है। तो आइए हम आपको बताते हैं कैसे मोटापा गर्भधारण करने में परेशानी उत्पन्न करता है। [ये भी पढ़ें: एंडोमेट्रियॉसिस के साथ कैसे करें गर्भधारण]

1-इनफर्टिलिटी के खतरे को बढ़ाता है:
मोटापा उन कारणों में से एक है जो महिलाओं में सामान्य हार्मोनल पैटर्न में बदलाव लाकर ओव्यूलेशन और फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। इसके कारण ओवरी के सामान्य फंक्शन के प्रभाव में बदलाव आते हैं। मोटापे के कारण मासिक धर्म में अनियमियता आती है साथ ही ओव्यूलेशन के सामान्य चरण में भी परेशानी उत्पन्न होती है। साथ ही महिलाओं के पेट में फैट जमा होने से मेल हार्मोंस का उत्पादन शुरु होता है जो फॉलिकुलर मैच्यूरेशन की रोकथाम करते हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि ओव्यूलेशन कम होने लगता है।

2-फर्टिलिटी के इलाज पर प्रभाव डालता है:मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में आईवीएफ(इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) इलाज गैर मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में कम प्रभावी होता है। अगर आप आईवीएफ इलाज सही तरह से कराना चाहती है तो आपको अपना वजन कम करना पड़ेगा।  [ये भी पढ़ें: गर्भधारण से जुड़ी समस्या का करें इस तरह से समाधान]

3-गर्भपात के खतरे को बढ़ाता है:मोटापे से ग्रस्त महिलाओं के गर्भधारण करने के बाद बच्चे को कम पोषण तत्व मिलने का खतरा रहता है। मोटापे से महिलाओं में गर्भपात होने का खतरा ज्यादा रहता है। मोटापे से ग्रसित महिला के एक बार गर्भपात होने के बाद दूसरी बार गर्भधारण करने में परेशानी होती है।

4-पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम) होने की संभावना बढ़ जाती है:मोटापे के कारण इंसुलिन का उत्पादन बढ़ जाता है। जिसके कारण अनियमित ओव्यूलेशन होता है। मोटापे में ज्यादा मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन और इनफर्टिलिटी में संबंध को पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम कहते हैं। पीसीओएस एक मेडिकल कंडीशन है जिसका कारण अनियमित मासिक धर्म, ओव्यूलेशन का कम होना और मेल हार्मोंस के उत्पादन में बदलाव होता है।

5-लाइफस्टाइल से संबंधित परेशानी:मोटापे से ग्रसित लोगों को लाइफस्टाइल से संबंधित परेशानी जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल का लेवल हाई होना जैसी समस्याएं रहती है। ये सारी चीजें मिलकर गर्भधारण करने में परेशानी उत्पन्न करती है।

उपाय:

1- गर्भधारण करने से पहले वजन कम करें:अगर आपको पता है कि आपका वजन ज्यादा है और आप वजन कम रही हैं तो यह आपके बिना किसी इलाज के 15 प्रतिशत तक गर्भधारण करने की संभावना को बढ़ा देता है।

2-बुरी आदतों को छोड़ दें:
how obesity affects your chances of conceivingधूम्रपान और एल्कोहल का सेवन ना सिर्फ आपके वजन को बढ़ाता है बल्कि स्वस्थ प्रेग्नेंसी में भी बाधा उत्पन्न करता है। अगर आप इस तरह की किसी भी बुरी आदत की शिकार है तो उसे तुरंत त्याग दें।

3-एक संतुलित आहार का सेवन करें:
how obesity affects your chances of conceivingध्यान रहे कि आप वजन कम करने के लिए अपने नाश्ते, लंच या डिनर बंद ना करें। बल्कि अपने खाने के बीच में पोषक तत्वो से भरपूर स्नैक्स का सेवन करना शुरु कर दें। इसके साथ ही आप उन चीजों का सेवन करना कम कर दें, जिनमें अत्यधिक मात्रा में शुगर या फैट हो। ज्यादा से ज्यादा फल, सब्जियों और सलाद का सेवन करें। [ये भी पढ़ें:आखिर किन कारणों से नहीं हो पाता गर्भधारण]

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