इन कारणों से बच्चें और किशोर झेल रहे हैं तनाव

learn How to deal with stress in children and teens

किशोरों और बच्चों में तनाव होना एक आम समस्या है। यह कई कारणों से हो सकता है, जैसे- स्कूल में बेहतर परफॉर्मेंस देने का दबाव, दोस्त से लड़ाई करना और उसे बनाएं रखना, माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव, शिक्षकों की उम्मीद को बनाएं रखने का दबाव आदि । यह दबाव कब तनाव का रुप ले लेता है उन्हें खुद पता नहीं चलता। कभी-कभी किशोर या बच्चे अपने तनाव को सकारात्मक ढंग से लेते हैं जिससे वह अपने काम में ध्यान दे पाते हैं और खुद को कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करने लगते हैं। आइए किशोरों और बच्चों में तनाव के कारणों के बारे में बताते हैं। [ये भी पढ़ें: तनाव कम करने का आसान तरीका है मेडिटेशन]

बच्चों और किशोरों में तनाव के कारण:
 learn How to deal with stress in children and teens बच्चों और किशोरों में तनाव होने के कई कारण हो सकते हैं। बच्चों और किशोरों में तनाव के कारण निम्नलिखित हैं।

  • स्कूल के काम या ग्रेड्स के कारण।
  • काम या खेल के कारण इधर-उधर करना।
  • दोस्तों से हुए झगड़े या फिर सामूहिक झगड़ों के कारण।
  • शरीर में आ रहे बदलाव के कारण- लड़के या लड़कियों दोनों में ही तनाव होता है।
  • मां-बाप में हो रहे झगड़े के कारण।
  • परिवार में हो रही आर्थिक समस्या की वजह से।
  • स्कूल बदलने के कारण या शहर बदलने के कारण।

    बच्चों और टीनएजर में तनाव के लक्षण:
    How to deal with stress in children and teens इससे पहले कि आपका बच्चा तनाव के कारण बहुत परेशान हो जाए, आप उन्हें तनाव से बाहर निकलने में मदद करें। बच्चों और टीनेजर में अगर आपको तनाव के ये लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आपको अपने बच्चे की देखभाल करने की जरूरत है। [ये भी पढ़ें: तनाव से ग्रसित वयस्कों को जरूरत है इन उपायों को अपनाने की]

1. शारीरिक लक्षण:

  • भूख न लगना, खाने से परहेज करना।
  • लगातार सिरदर्द रहना।
  • बिस्तर गीला करना।
  • रात में बुरे सपने आना।
  • नींद से जुड़ी हुई परेशानियां।
  • पेट की खराबी और दर्द होना।
  • शारीरिक बीमारी से ग्रसित होना।

2. भावनात्मक लक्षण:

  • ज़्यादा घबराहट और चिंता होना।
  • आराम न कर पाना।
  • अंधेरे में अकेले होने से या फिर अजनबियों से मिलने पर डर लगना।
  • बिना किसी कारण के गुस्सा आना और छोटी-छोटी बातों पर रोना।
  • अपनी भावनाओं को कंट्रोल न कर पाना।

माता-पिता कैसे बचाएं अपने बच्चों को तनाव से:  अगर आपका बच्चा इन सारी चीज़ों से जूझ रहा है तो ऐसे में आपको उनका ध्यान रखने की ज्यादा ज़रूरत है वरना आपके बच्चे की जिंदगी पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। कोशिश करें कि आप ज़्यादा से ज़्यादा समय अपने बच्चों के साथ बिताएं और उनसे उनकी समस्याओं के बारे में बात करें ताकि उनका मन हल्का हो सके। शुरुआत में वह आपसे बात करने में हिचकिचा सकते हैं मगर आप उनसे माता-पिता की तरह नहीं हैं बल्कि उनके दोस्त बनकर बात करेंगे तो वह आपको अपने मन की बात जरुर बता देंगे।
अगर परेशानी ज्यादा है तो आप अपने बच्चों को डॉक्टर के पास ले जा सकते हैं। डॉक्टर आपको अच्छे से बता पाएगा कि आपके बच्चे को किस बात से परेशानी है और उससे निकलने का भी उपाय बता देगें। ज़्यादातर बच्चे अपने मां-बाप से अपनी परेशानी को नहीं बताते हैं क्योंकि कहीं-ना-कहीं उनके अंदर डर होता है। [ ये भी पढ़ें : इन तरीको को अपनाएं और हो जाएं तनाव मुक्त

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