तनाव कैसे आपके दिमाग को प्रभावित करता है

how stress affects your brain

हम सभी तनाव से परिचित हैं यह रोजाना किसी भी तरह से हर व्यक्ति को होता है। कभी काम, घर या रिलेशनशिप को लेकर तनाव होता ही है। आपने सुना ही होगा तनाव दिमाग और शरीर दोनों को प्रभावित करता है । जिसके शारीरिक लक्षण सिरदर्द और सीने में दर्द होते हैं। इसके साथ ही तनाव की वजह से व्यक्ति को चिंता होती है जिससे वह उदास रहने लगता है। तनाव आपके दिमाग पर गंभीर प्रभाव डालता है। तनाव की वजह से दिमाग में कई रिएक्शन होती हैं जिनमें से कुछ अच्छी तो कुछ बुरी होती हैं। ज्यादातर तनाव दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जिसकी वजह से मानसिक बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। तो आइए आपको बताते हैं तनाव आपके दिमाग को कैसे प्रभावित करता है। [ये भी पढ़ें: तनाव से लड़ने के लिए खुद में विकसित करें तकनीक]

मानसिक बीमारी का खतरा बढ़ा देता है: क्रोनिक स्ट्रेस आपके दिमाग में कई बदलाव करता है। इन बदलावों की वजह से मूड स्विंग और एंग्जाइटी डिसऑर्डर होने की संभावना बढ़ जाती है। क्रोनिक स्ट्रेस में दिमाग में ज्यादा मात्रा में मायलेन कोशिकाओं का और कम मात्रा में न्यूरॉन्स का उत्पादन करने लगता है। जिसकी वजह से दिमाग में ज्यादातर जगहों पर मायलेन होता है जो बातचीत के संतुलन को बाधित करता है। तनाव की वजह से डिप्रेशन और इमोशनल डिसऑर्डर हो सकते हैं।

दिमाग की संरचना में बदलाव करता है: व्यक्ति का दिमाग न्यूरॉन्स और सपोर्ट सेल्स (ग्रे मैटर) का बना होता है जो निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान करने में मदद करता है। लेकिन दिमाग में (वाइट मैटर) भी होते हैं जो एक्सॉन का बना हुआ होता है और दिमाग के दूसरे हिस्सों से जुड़ा हुआ होता है जो जानकारी प्रदान करता है। लेकिन दिमाग में अत्यधिक मात्रा में मायलेन का उत्पादन होने की वजह से वाइट और ग्रे मैटर का संतुलन बिगड़ जाता है। जिसकी वजह से दिमाग की संरचना में कई बदलाव होने लगते हैं। [ये भी पढ़ें: आर्थिक समस्याओं को लेकर होने वाले तनाव को कैसे कम करें]

दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करता है: तनाव दिमाग के हिप्पोकैम्पस में नए न्यूरॉन्स को नष्ट कर सकता है। हिप्पोकैम्पस दिमाग का वह हिस्सा होता है जो मेमोरी और इमोशन से संबंधित होते हैं। यह दिमाग के इन दो हिस्सो में से एक होता है जो नई कोशिकाओं का निर्माण करता है। लेकिन तनाव की वजह से इन कोशिकाओं की संख्या कम होने लगती हैं।

दिमाग को सिकोड़ता है: तनाव की वजह से दिमाग के भावनाओं, मैटाबॉल्जिम और मेमोरी को नियमित करने वाला क्षेत्र सिकुड़ने लगता है। तनाव की वजह से व्यक्ति नकारात्मक होने लगता है। रोजाना का तनाव दिमाग के वॉल्यूम पर प्रभाव डालता है। जिससे दिमाग सिकुड़ने लगता है। [ये भी पढ़ें: तनाव को कम करने के लिए उपयोगी है शिरोधारा थेरेपी]

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