विजयादशमी 2017: दशहरा का हमारे वास्तविक जीवन में क्या महत्व है

What we get to learn from Dussehra Festival

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दशहरा हिंदु धर्म में बहुत लोकप्रिय त्यौहार है। यह त्यौहार अपनी धारणा और महत्व में अद्वितीय है। महान हिंदू महाकाव्य रामायण के अनुसार, भगवान राम ने दशमी के दिन दस सिरों वाले रावण का वध करके लंका पर विजय पाई थी। उनकी यह वियज पाप और अनैतिकता पर अच्छाई की विजय माना जाता है। रावण ने श्रीराम की पत्नी सीता का अपहरण किया था। रावण के अंत को बुराई और दुष्ट आत्मा का अंत माना जाता है, क्योंकि वह एक क्रूर राजा और दुष्ट राक्षस था। विजयादशमी का त्यौहार केवल धार्मिक रुप से ही हमारे जीवन से नहीं जुड़ा है बल्कि इसके अन्य महत्व भी है। इससे हमें वास्तविक जीवन में कई बातें सीखने को मिलती हैं। आइए जानते हैं विजयादशमी का हमारे वास्तविक जीवन में क्या महत्व है। [ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की आराधना का महत्व]

बुरे पर अच्छाई की जीत
दशहरा का त्यौहार इस बात का प्रतीक है कि हमेशा बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और धर्म पर अधर्म की जीत होती है। बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो, एक दिन इसका अंत होना ही है। इसलिए हर मनुष्य को अपने मन से बुरी सोच को निकाल देना चाहिए।

बुरी आदतों को जला दे
दशहरा के दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद को जलाया जाता है। इससे यह सीखा जाना चाहिए कि इस दिन हर मनुष्य को अपनी उन आदतों को जला देना चाहिए जो हमारे दिमाग पर कब्जा करती हैं जैसे, वासना, क्रोध, लालच, जलन, अन्याय और क्रूरता आदि।[ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा का महत्व]

अहंकार को दूर करें
रावण को अपनी शक्तियों का बहुत अधिक अहंकार था जिसके कारण उसे लगता था कि उसे कोई हरा नहीं सकता। उसने सभी शक्तियों को हासिल किया और सभी देवताओं को प्रसन्न करके कई वरदान भी पाएं लेकिन उसने अपने अंहकार पर विजय नहीं पाई जिसके कारण उसकी मृत्यु हुई। मनुष्य को अपने अंहकार को खुद से बड़ा नहीं समझना चाहिए।

अपने राज़ किसी के साथ साझा ना करें
रावण ने विभीषण को अपनी मृत्यु से जुड़ा राज़ बताया जिसका खामियाजा उसे उठाना पड़ा। इससे आपको सीखना चाहिए कि मनुष्य को अपने राज़ किसी से साझा नहीं करने चाहिए।

धर्म के पथ पर चलें
विभीषण ने अपने भाई का साथ देने की जगह धर्म का पथ अपनाया और श्री राम का साथ दिया। इससे हमें सीखना चाहिए कि हम सभी को धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए। धर्म सभी रिश्तों से बढ़कर है।[ये भी पढ़ें: नवरात्र स्पेशल: हवन का अध्यात्मिक और वैज्ञानिक रुप से क्या महत्व है]

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