नवरात्र स्पेशल: हवन का अध्यात्मिक और वैज्ञानिक रुप से क्या महत्व है

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spiritual and scientific Significance of hawan

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हिंदुत्व एक ऐसा धर्म है जिसमें हर एक अवसर के लिए अलग-अलग अनुष्ठान हैं। चाहे शादी हो या किसी का जन्म, पूजा हो या गृह प्रवेश हर अवसर के लिए अलग रीति-रिवाज होते हैं जिनका पालन करना आवश्यक है। हवन या यज्ञ भी इन्ही में से एक अनुष्ठान है। इस रीति में आग यानि अग्नि देवता को सभी भेंट और चढ़ावा पेश किए जाते हैं। नवरात्रि के दिनों में भी नवदुर्गा की पूजा करने के लिए हम हवन करते हैं जिसमें देवताओं का आह्वाहन किया जाता है। यह आमतौर पर नवमी के दिन किया जाता है। हालांकि हम सभी हवन के रिवाज को केवल धर्म से जोड़कर देखते हैं लेकिन हवन का असल में हमारे जीवन में और भी कई महत्व है। हवन करने से हमें वैज्ञानिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। आइए जानते हैं हवन कैसे अध्यात्म और विज्ञान से जुड़ा है। [ये भी पढ़ें: नवरात्र स्पेशल: देवी महाकाली से सीखें कैसे क्रोध को बनाएं अपनी ताकत]

हवन करने के आध्यात्मिक पहलू:

  • हवन आपको आध्यात्म से जोड़ने का काम भी करता है। हवन हमारे आस-पास शुभ ऊर्जा को जागृत करने और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा दिलाने का काम करता है।
  • हवन के दौरान पवित्र मंत्रों के उच्चारण से तैयार होने वाला एक विशेष वाइब्रेशन बुरी ताकतों और ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ताकतों को उत्पन्न करता है।
  • वैदिक विद्वानों के अनुसार, आग की शक्तिशाली ऊर्जा और संस्कृत मंत्रों का संयोजन बेहद शुभ होता है जो हवन में उपस्थित सभी लोगों के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • हवन उत्पन्न होने वाला धुआं मन में शांति लाता है, शरीर पर सकारात्मक कार्य करता है और पर्यावरण की शुद्धि में मदद करता है। [ये भी पढ़ें: नवरात्र स्पेशल: देवी महाकाली से सीखें कैसे क्रोध को बनाएं अपनी ताकत]
  • ऐसा माना जाता है कि कोई भी व्यक्ति किसी को बिना दिए कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता है। इसिलए हवन के रूप में पर्यावरण को आप कुछ देते हैं तो इसके बदले में आपको भी शुद्ध पानी, हवा और प्रकृति का लाभ और आनंद मिलता है।
  • हवन करने से प्रकृति के पांच तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और ब्रह्मांड से व्यक्ति को उसके शरीर के पांच तत्व स्वास्थ्य, शक्ति, ज्ञान, बुद्धि और खुशी को संतुलित करने की क्षमता मिलती है।

हवन करने के वैज्ञानिक पहलू:

  • जब भी हम हवन करते हैं तो अग्नि को वायु को छूती है जिससे हवा शुद्ध हो जाती है और हवा के अणु हल्के हो जाते हैं। हवा हल्की होकर ऊपर चली जाती है जिससे अशुद्ध और ठंडी हवा नीचे आ जाती है। ऐसे ही हवा तब तक शुद्ध होती रहती है जब तक यह अनुष्ठान किया जाता है। शुद्ध हवा सांस के जरिए आपके शरीर में पहुंचती है और आपको स्वस्थ रखती है।
  • हवन में अधिकतर आहुति देने के लिए आम की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें जलाने के बाद फार्मिक एल्डेहाइड गैस निकलती है। यह गैस हानिकारक बैक्टीरिया को मारती है और इस प्रकार वातावरण शुद्ध होता है।
  • हवन के दौरान आग में इलायची, दालचीनी, लौंग, गुलाब की पंखुड़ी, गुगल (गुबरारा) और कपूर जैसी जड़ी-बूटियां, जलाई जाती हैं। इनसे निकलने वाली सुगंध वातावरण से अनचाही गंध को हटाती है और हवा को शुद्ध करती है।
  • हवन में इस्तेमाल होने वाले सुगंधित तेलों और जड़ी बूटियों जिनमें औषधीय गुण होते हैं, को हवन में जलाने से कीटोन और एल्डिहाइड जैसे रासायनिक पदार्थों बनते है। जो फॉर्मेल्डिहाइड जैसे रोगाणुओं का उत्पादन करते हैं। ये रोगाणु हानिकारक रोगाणुओं को हवा से खत्म करते हैं और हवा के जरिए फैलने वाले संक्रमण की संभावनाएं कम होती हैं। [ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा का महत्व]
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