अध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया में आते हैं ये बदलाव

signs of spiritual transformation

अध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमे मनुष्य आध्यात्मिकता के करीब जाने लगता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति को अपने अस्तित्व के बारे में, ज्ञान की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को अपने जीवन के लक्ष्य के बारे में पता चलता है। साथ ही जीवन का उद्देश्य क्या है। उसके बारे में भी ज्ञात होता है। अध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया में व्यक्ति कई तरह से जीवन के तमाम मापदण्डो पर खुद को मापता है। इस प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति को जीवन के सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होनी शुरू हो जाती है और व्यक्ति का ज्यादा समय चीजो के बारे में सोचने समझने में लगता है। अध्यात्मिक परिवर्तन की शुरुआत कब होती है ये हर व्यक्ति के मामले में अलग हो सकता है लेकिन कुछ दिनों बाद अध्यात्मिक परिवर्तन के बारे में पता चलने लगता है। आइए जानते हैं अध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया में किस तरह के बदलाव आते हैं। [ये भी पढ़ें: बिना धार्मिक हुए भी आप हो सकते है आध्यात्म के करीब]

1. अकेले रहने की इच्छा: जैसे-जैसे आप अध्यात्मिकता के नजदीक जाते हैं या अध्यात्मिक होने की कोशिश करते हैं आपको अकेला रहना अच्छा लगने लगता है। दरअसल अध्यात्मिकता के करीब जाने के लिए हम कुछ सवालों के बारे में सोचते हैं जैसे की मैं कौन हूं? मैं क्या बनूंगा? मेरा अस्तित्व क्या है? इत्यादि। ऐसे सवालों के जवाब के लिए लोगो को एकांत की तलाश होती है जहां वो खुद को समझ सकते हैं, खुद के बारे जाननें की कोशिश कर सकते हैं।

2. चीजों के बारे में भ्रमित रहना, अपने धुन में रहना: अध्यात्मिक परिवर्तन एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया हो सकती है। जब व्यक्ति अध्यात्मिकता के करीब जाता है तब दोबारा पहले की तरह जीवन व्यतीत नहीं कर पाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को चीजों के बारे में पता नहीं रहता। वो अपनी धुन में खोया रहता है। उसका ज्यादा समय चीजों के बारे में सोचने दुनिया को समझने में बीतता है। [ ये भी पढ़ें: अध्यात्मिक होने के लिये जरुरी है खुुद से रुबरु होना]

3. सांसारिक चीजों से मोह कम हो जाता है: जैसे-जैसे व्यक्ति अध्यात्मिकता के करीब जाता है उसका मोह सांसारिक सुखों और चीजों से कम हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति देने में ज्यादा यकीन करने लगता है उसके अन्दर किसी भी चीज की लालसा कम होने लगती है। अध्यात्मिक हो चुके लोगो के लिए दुनिया ज्यादा मायने नहीं रखती।वो दुनिया के सुखों से विरक्त होने लगते हैं।

4. प्रकृति के करीब रहने की इच्छा: अध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया में व्यक्ति को प्रकृति के करीब रहना अच्छा लगने लगता है। व्यक्ति प्रकृति के सानिध्य में शांति की अनुभूति करता है। अध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया में ऐसा होना लाजिमी है। यही वजह है कि सन्यासी बने लोग शहर से दूर प्रकृति के सानिध्य में रहते हैं। प्रकृति के करीब व्यक्ति को इस दुनिया को समझने में मदद मिलती है। प्रकृति की शांति अध्यात्मिकता की प्रक्रिया को और भी ज्यादा बेहतर बनाती है।

5. आप दूसरो को प्रेरित करते हैं: अध्यात्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया में व्यक्ति को जीवन का मतलब समझ में आने लगता है। ऐसे लोग अपने जीवन के लक्ष्य को करीब से जानने लगते हैं जिस वजह से ऐसे लोग दूसरो के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। आपके अन्दर अध्यात्मिकता का प्रकाश उत्पन्न होता है जिस प्रकाश से आप बाकि लोगो को भी रास्ता दिखाते हैं। [ये भी पढ़ें: उपाय जो आपके जीवन में लाएंगे अध्यात्मिकता का प्रकाश]

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