Navratri special: छठें दिन देवी कात्यायनी की पूजा क्यों की जाती है

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Navratri special:  नवरात्रि के छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी कात्यायनी दुर्गा की छठा रुप है और नौ दुर्गा के सभी रुपों में से प्रमुख भी है। नवरात्री के छठे दिन इनकी पूजा भव्य रूप से की जाती है। इनका रुप बहुत भव्य और दिव्य है। कात्य नाम के एक साधु ने त्रिदेवों को अपनी तपस्या से खुश करके मां दुर्गा को अपनी बेटी के रुप में मांगा था जिसके बाद मां दुर्गा ने कात्या की बेटी के रुप में जन्म लिया और इसलिए इनका नाम देवी कात्यायनी पड़ा। इन्हें योद्धा देवी कहा जाता है क्योंकि ये नौ देवियों में सबसे शक्तिशाली हैं। इनकी पूजा करने से साधक प्रख्यात होता है और उसे बुरे विचारों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि देवी कात्यायनी की पूजा कैसे और क्यों की जाती है। [ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की पूजा का महत्व]

Navratri special: छठ्ठे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा क्यों की जाती है

इनकी पूजा क्यों की जाती है
नवरात्री के छठे दिन का महत्व
पूजा की विधि
पूजा का मंत्र
अर्थ

इनकी पूजा क्यों की जाती है
देवी कात्यायनी नव दुर्गा का छठा रूप हैं। शब्द ‘कात्यायनी’ का शाब्दिक अर्थ है ‘जो कठोर और विनाशकारी है, अहंकार को दूर करने में सक्षम है’। देवी कात्यायनी ग्रह बृहस्पति (गुरु ग्रह) को नियंत्रित करती हैं। देवी कात्यायनी शेर की सवारी करती हैं। कात्यायनी देवी की पूजा किसी व्यक्ति के कुंडली दोषों को करने के लिए की जाती है। कात्यायनी मंत्र सभी तरह की बाधाओं को दूर करने में बहुत प्रभावी है जैसे कि मांगलिक दोष। देवी कात्यायनी की पूजा करने से साधक ‘अग्नि चक्र’ में प्रवेश करता है जिससे उसे त्याग की भावना सीखने को मिलती है।

नवरात्रि के छठे दिन का महत्व
नवरात्रि के छठे दिन साधक को ताकत, ज्ञान और साहस की प्राप्ति होती है। देवी कात्यायनी बुरे पर अच्छे की जीत दिलाती है। इसलिए साधक को इनकी पूजा करने से नकारात्मक उर्जा से मुक्ति मिलती है। यह भी माना जाता है कि दुर्गा पूजा के छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा करने से भक्त अपने मन और आत्मा से अग्नि चक्र में प्रवेश करता हैं। अग्नि चक्र भक्तों को मार्ग दर्शाता है जिससे वो देवी कात्यायनी के लिए सब कुछ त्याग करें। इस चक्र के माध्यम से भक्त आत्म-बलिदान का पाठ सीखते हैं। पूर्ण आत्म-बलिदान की भावना से देवी खुश होती है और वह अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। [ये भी पढ़ें: नवरात्र स्पेशल: चौथे दिन देवी कुष्मांडा की पूजा का महत्व]

पूजा की विधि
माता कात्यायनी की पूजा करने से आप सभी बीमारियों, दुःखों और भय से लड़ने के लिए शक्ति विकसित कर पाते हैं। देवी कात्यायनी की आराधना करने के लिए सबसे पहले आत्म पूजा करें जिससे आप खुद के मन को शुद्ध कर पाएं। इसके बाद तिलक और आचमन करें। फिर हाथ में जल लेकर संकल्प करें और अपनी मनोकामना देवी के समक्ष दोहराएं। अब देवी का आवाहन करें। मां से कहें कि वो आसन ग्रहण करें। अब मंत्रों का जाप करें और ध्यान करें।

पूजा का मंत्र

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्द गोपसुतं देविपतिं मे कुरु ते नमः॥

अर्थ: हमेशा अपने भक्तों की सुरक्षा करने वाली दुर्गा देवी कात्यायनी, जिसके हाथों में चमकती तलवार होती है और जो शेर की सवारी करती है, और जो राक्षसों का नाश करती है, वो मेरा कल्याण करें। [ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना क्यों की जाती है]

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