Navratri Special: दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व

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Things You Need To Know About The Maa Brahmacharini

Navratri Special: देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना से आपको बुद्धि, विवेक और धैर्य की प्राप्ति होती है। (Pic Credit: pinterest.dk)

Navratri Special: नवरात्रि के पावन दिनों के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे रुप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी को सभी विधाताओं और ग्रंथों का ज्ञाता माना जाता है। तप, वैराग्य, सदाचार और संयम जैसे गुणों की प्राप्ति के लिए इनकी आराधना की जाती है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना करने के लिए साधक को विशेष विधि-विधान का पालन करना होता है। ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना का मानव जीवन में अत्यंत महत्व है क्योंकि इनके पूजन से आपको कर्तव्य पथ पर चलने की दिशा और सफलता को पाने के लिए बोध की प्राप्ति होती है। ग्रंथों के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी हिमालय की बेटी थी। इन्होंने नारद के उपदेश के बाद ब्रह्मचारिणी पड़ा। आइए जानते हैं कि नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा क्यों और कैसे की जाती है। [ये भी पढ़ें: नवरात्र स्पेशल: पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा का महत्व]

Navratri Special: दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा क्यों की जाती है

  • इनकी पूजा क्यों की जाती है
  • नवरात्रि के दूसरे दिन का महत्व
  • पूजा की विधि
  • पूजा का मंत्र

इनकी पूजा क्यों की जाती है: देवी ब्रह्मचारिणी को तप, वैराग्य और सदाचार का स्वरुप माना जाता है। दूसरे दिन इनकी पूजा करने से साधक अपने मन को स्वाधिष्ठान चक्र स्थित करता है। स्वाधिष्ठान चक्र हमारे शरीर में मौजूद 7 चक्रों में से एक है। यह चक्र हमारी कमर से नीचे के हिस्से के स्वास्थ्य के लिए जरुरी होता है। देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना से आपको बुद्धि, विवेक और धैर्य की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि के दूसरे दिन का महत्व: नवरात्रि का दूसरा साधक को ख़ुद पर नियंत्रण करना सिखाता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं, इंद्रियों और अभिव्यक्ति पर नियंत्रण कर सकता है तो वह सबसे सफल है। नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति स्वयं त्याग, वैराग्य, नैतिक आचरण और संयम करना सीखता है।

नवरात्रि का दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी को समर्पित है और वो ज्ञान, सम्मान और मन की शांति का प्रतीक है। देवी सफेद रंग की पोशाक पहनती है और सफेद रंग स्वयं शांति को दर्शाता है। जब साधक स्वाधिष्ठान चक्र में स्थापित होता है तो वह योगी देवी की भक्ति और आशीर्वाद प्राप्त करता हैं।

पूजा की विधि: ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करने के लिए पूजन स्थान पर कमल मुद्रा मे बैठ जाएं। देवी को पान के पत्ते पर लौंग का जोड़ा और शहद चढ़ाएं। इस दिन सफेद या पीले कपड़ें पहनने की मान्यता होती है। प्रसाद में मीठे व्यंजन रखें। पूजा करते वक्त देवी में ध्यान लगाएं और अपने स्वाधिष्ठान चक्र पर ध्यान केंद्रित करें। देवी ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और कमल के पुष्प पसंद होते हैं।

पूजा का मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ: ‘हे मां! सभी जगह विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार नमस्कार है। मैं आपको प्रणाम करता हूं।’ [ये भी पढ़ें: नवरात्र स्पेशल: व्रत के दौरान नाश्ते में क्या खाना होगा बेहतर]

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से आपके जीवन और घर में शांति और समृद्धि का वास होता है। आप इस विधि अनुसार पूजा कर सकते हैं। आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

Tags: navratri special in hindi
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