महानवमी 2017: नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की आराधना का महत्व

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नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है। हर रुप का अलग महत्व और पूजन का तरीका है। नवरात्रि में महानवमी के दिन यानि आखिरी दिन नवदुर्गा के नौवे रुप देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री 26 इच्छाओं(सिद्धी) की मालिक है, जो वो अपने साधक को देती हैं। मां सिद्धिदात्री त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और शिव को आध्यात्मिक भव्यता और पूर्णता देने वाली देवी हैं। उन्होंने सभी अष्ट महा सिद्धियों को बनाया। जो व्यक्ति गंभीर आध्यात्मिक साधना करता है उसे सिद्धिदात्री ये सिद्धि देती हैं। इसलिए मां सिद्धिदात्री शक्ति, महिमा और तेज का प्रतीक है। दुर्गा की अवतार सिद्धिदात्री अज्ञानता को दूर करती है और अपने साधकों के ज्ञान प्रदान करती हैं। देव, गंधर्व, असुर, यक्ष और साधु सभी के द्वारा इनकी पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि देवी सिद्धिदात्री की पूजा कैसे और क्यों की जाती है। [ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: छठें दिन देवी कात्यायनी की पूजा क्यों की जाती है]

इनकी पूजा क्यों की जाती है
ऐसी मान्यता है कि सिद्धिदात्री के पास आठ सिद्धियां होती है। अनिमा, महिमा, गरिमा, लाहिमा, प्राप्ति, प्राक्यामया, इनशित्वा, और वशित्वा। जो व्यक्ति सिद्धिदात्री की पूजा करता है उसे ये सिद्धि प्राप्त होती हैं। सिद्धी प्राप्ति के बाद, मनुष्य अपने व्यक्तित्व में वृद्धि कर पाता है। नवरात्री का प्रत्येक दिन का अपना महत्व है, लेकिन नौवें दिन अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुर्गा पूजा का अंतिम और समापन दिन है। इसलिए आज के दिन की पूजा मां दुर्गा को पूर्ण रुप से प्रसन्न करने के लिए होती है। इनकी पूजा करने से साधक का मन शांत हऔर सौम्य रहता है साथ ही उसकी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

नवरात्रि के नौवे दिन का महत्व
नवरात्रि का नौवा दिन नवदुर्गा की पूजा का आखिरी दिन होता है। इस दिन कन्या पूजन का बहुत महत्व है। छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रुप समझ कर उनका पूजन किया जाता है। इस दिन घर और मन की शांति और शुद्धि के लिए यज्ञ कराया जाता है। साधक को अपने नौ दिनों के व्रतों के समापन के लिए इस दिन देवी सिद्धिदात्री की मन से आराधना करनी चाहिए। [ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा का महत्व]

पूजा करने की विधि
मां सिद्धिदात्री का स्वरुप बहुत ही सौम्य और कोमल स्वभाव का है। आप इन्हें अपनी आराधना से प्रसन्न कर सकते हैं। इस दिन भी आपको बाकी दिनों की तरह सर्वप्रथम कलश या घट की पूजा करनी है। इसमें विराजमान सभी भगवानों को प्रणाम करें और उनका आवाहन करें। इसके बाद धूप-दीप आदि करें और माां के दिव्य रुप को ध्यान में रखते हुए उनके मंत्रों का जाप करें। हलवा और चने का प्रसाद मां को अर्पण करें। इसके बाद कन्या पूजन करके कन्यांओं और ब्रह्माणों को भोजन कराएं।

पूजा का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: हे मां! आप सभी जगह विराजमान है। सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध, हे अम्बे, आपको मेरा बार-बार नमस्कार है। मैं आपको प्रणाम करता हूं। [ये भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा का महत्व]

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