अपने आध्यात्मिक अभ्यास को कैसे बढ़ाएं

how to build Spiritual Mastery

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अध्यात्म में महारत हासिल करने से लोग प्रकृति की सच्चाई को अच्छी तरह समझ जाते हैं। आध्यात्मिकता में दक्षता हासिल करने से कई लाभ होते हैं जैसे अपनी नियति पर काबू पाना, भविष्य में अच्छे अवसरों को चुनना, मृत्यु के डर को पार करना आदि। इसकी मदद से आप खुद को ब्रह्मांड की सच्चाई से जोड़ पाते हैं। इन सारे फायदों के अलावा एक और फायदा ये होता है कि लोग अपने जीवन में भी महारत हासिल कर लेते हैं। इन सारी चीजों की अच्छे से जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको अध्यात्मिक अभ्यास की जरूरत होती है। इसके अभ्यास में कई साल लग जाते हैं। कोई भी इसे एक रात में नहीं सिख सकता है। आइए जानते हैं अपने अध्यात्मिक अभ्यास को कैसे बढ़ाया जा सकता है। [ये भी पढ़ें: व्यस्त जीवन में क्यों जरुरी है अध्यात्म]

सच:
अध्यात्मिक अभ्यास में महारथ हासिल करने के लिए आपको सबसे पहले सच बोलना सिखना पड़ेगा। झूठ सिर्फ इंसान के मन को भटकाता है और सच्चाई से दूर रखता है। अध्यात्मिक अभ्यास के लिए आपको अपने अंदर के सारे झूठ को खत्म करने की जरूरत है।

नैतिक मूल्य:
अध्यात्मिक महारथ हासिल ना करने का एक मुख्य कारण यह होता है कि लोग नैतिक मूल्यों पर बहुत कमजोर होते हैं। वह धोखे, चोरी, झूठ और हिंसक कार्यों से इस तरह जुड़े होते हैं कि अध्यात्म के सतही मूल्यों के आसपास भी नहीं होते हैं। इसलिए अध्यात्मिक महारथ हासिल करने के लिए आपको अपने नैतिक मूल्यों के प्रति बदलाव लाने की जरूरत है। [ये भी पढ़ें: अध्यात्म देता है प्रेक्टिकल जीवन जीने की दिशा]

शारीरिक शुद्धता:
अध्यात्मिक अभ्यास हासिल करने के लिए शारीरिक शुद्धता की बहुत आवश्यक होती है। लोग एल्कोहल या नशीली चीजों का सेवन करने की वजह से अपने अंदर विषाक्त पदार्थों को जमा कर लेते है जिसके कारण अंदर की सच्चाई कही ना कही खत्म हो जाती है। विषाक्त पदार्थों का सेवन करने की वजह से लोग अध्यात्मक के महत्व को भूल जाते हैं।

पैसे की बहुतायता:
बहुत से लोग इस समस्या से जूझते रहते हैं, क्योंकि दिमाग के दो हिस्से होते हैं जिसमें से एक अध्यात्म को प्राप्त करना चाहता है और दूसरा पैसे कमाने की और भागता है और दूसरे वाले पर हावी रहता है। जिस वजह से हम अध्यात्म पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। दोनों बातों के बीच संतुलन बनाकर ही अध्यात्म को प्राप्त किया जा सकता है। क्योंकि जिंदगी जीने के लिए आपको थोड़े पैसों की भी जरुरत होती है। [ये भी पढ़ें: अध्यात्म और रचनात्मकता एक-दूसरे से जुड़े हैं, जानें कैसे]

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