वृद्धावस्था में बनाएं अध्यात्म को अपना साथी

How to be spiritual in old age

व्यक्ति के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब वह उम्र के उस पहलू में होता है जहां वह हर तरफ से मुक्त हो जाता है। इस वक्त में उसका सारा ध्यान स्वयं पर होता है, इसी समय को वृद्धावस्था कहते हैं। ऐसे समय में खुश रहना और स्वस्थ्य रहना बहुत जरूरी होता है अन्यथा व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है। वैसे तो व्यक्ति को अपना पूरा जीवन अध्यात्मिक रूप से व्यतीत करना चाहिए परन्तु वृद्धावस्था में अपने आप को पूरी तरह से स्वस्थ रखने के लिए अध्यात्म को अपनाना बहुत लाभदायक हो सकता है। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। तो आइए बताते हैं कि उम्र के इस पड़ाव में आकर कैसे खुश और अध्यात्मिक रहा जा सकता है। [ये भी पढ़ें: उपाय जिनसे जीवन में होगा सकारात्मक ऊर्जा का संचार]

अपने आप को सक्रिय रखने की कोशिश करें: अपने आप को एक्टिव रखने के लिए सबसे जरुरी है कि आप हर सुबह उठकर वर्कआउट करें और घूमें। दिन में कुछ न कुछ काम करते रहे जिससे कि आपकी बॉडी एक्टिव रहे और आपका स्वास्थ्य अच्छा रहे। इस उम्र में आकर बहुत से लोग अपना काम काज छोड़कर बस बिस्तर पर बैठे रहते हैं या घर पर ही रहते हैं। जिसके कारण शरीर धीरे-धीरे बीमारियों से ग्रसित होने लगता है। इसलिए जरुरी है कि खुद को भीतरी और बाहरी दोनों तरह से एक्टिव रखें।

आध्यात्मिक किताबें पढ़े:
How to be spiritual in old age अध्यात्मिक होने के लिए जरुरी है कि आसपास के वातावरण को भी अध्यात्मिक बनाया जाये। इसी का एक हिस्सा है अध्यात्मिक किताबें पढ़ना। आप उन किताबों को पढ़ें जिनमे अध्यात्म के बारे में सही जानकारी दी गयी हो। उनको पढ़ने से आपके अंदर एक सकारात्मक सोच आने लगती है जिससे कि आपका मन शांतरहता है। इसलिए अपने खाली समय में इस तरह की किताबों को जरुर पढ़ें। [ये भी पढ़ें : इस तरह से आप वर्कप्लेस पर भी जुड़े रह सकते हैं अध्यात्म से]

खुश रहें: इस उम्र में खुश रहना बहुत जरुरी है क्योंकि अध्यात्मिक होने की पहली शर्त है खुश रहना। मन में किसी भी तरह की चिंता और तनाव के साथ कोई भी व्यक्ति अध्यात्मिक नहीं हो सकता है। चिंता और तनाव के साथ अध्यात्मिक होने से इससे मिलने वाले लाभ नहीं मिल पाते है। हम आध्यात्म से अपने मानसिक दवाब को कम करने के लिए जुड़ते है क्योंकि मानसिक रूप से स्वस्थ होने के लिए अध्यात्म की जरूरत होती है जो आपके मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है इसलिए खुद को हमेशा खुश रखें। छोटी-छोटी बातों पर ख़ुशी मनाकर आप ऐसा कर सकते हैं।

योग और मेडिटेशन:
How to be spiritual in old age योग और मेडिटेशन अध्यात्मिक होने और खुश रखने के लिए जरुरी है। इन दोनों को करने से आपके भीतर एक अलग प्रकार की शांति मिलती है। आपके चेहरे पर चमक आती है। आपके स्वास्थ्य को इससे बहुत फायदा होता है। योग बहुत सी बीमारियों को दूर करने और मेडिटेशन आपको बाहरी दुनिया से दूर और आपके करीब लाता है।

अपने दोस्तों के साथ समय गुजारें: दोस्तों के साथ समय गुजारना किसे नहीं पसंद। उनके साथ समय बिताने से कई चिंताएं दूर हो जाती हैं। इसलिए काम के बाद आपके पास जितना समय बचता हो उस समय को दोस्तों के साथ बिताएं। जिससे आपको भीतर से संतोष होता है और उस एक समय के लिए अपने सारे कामों और सभी चिंताओं को भूल जाते हैं। [ये भी पढ़ें: उपाय जिन्हें आजमाने से जीवन में होगा सकारात्मक ऊर्जा का संचार]

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