इस तरह से आप वर्कप्लेस पर भी जुड़े रह सकते हैं अध्यात्म से

how to be spiritual at work

सबसे ज्यादा तनाव का सामना यदि हमें कही करना पड़ता है तो वह है हमारा वर्क प्लेस। ये वही जगह है जहां हम अपने दिन का सबसे ज्यादा वक्त बितातें है। इसलिए शायद यहां हमें और ज्यादा तनाव और मानसिक दवाब का समाना करना पड़ता है। कई बार बहुत से लोग इस बात को जरुर सोचते हैं कि आखिर कैसे हम अपने वर्कप्लेस पर अध्यात्मिक माहौल बना सकते हैं जिससे कि वहां शांति से काम कर सकें। यह थोड़ा अटपटा सा हो सकता है पर क्या आपको पता है कि यह जरुरी भी है। इससे आप बिना तनाव के अपने काम पर पूरा फोकस कर पाते हैं। चलिए जानते हैं कि कैसे वर्क प्लेस पर आप अध्यात्मिक माहौल बना सकते है और अध्यात्मिक हो सकते हैं। [ये भी पढ़ें: जानें कुण्डलिनी चक्र कैसे आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं]

किसी एक के साथ शुरुआत करें:

यदि आप अपने वर्क प्लेस पर भी अपने आपको अध्यात्मिकता के साथ जोड़े रखना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले उस व्यक्ति को चुनें जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं। उसके पास जायें और आप जो चाहते हैं उसके बारे में बात करें। उससे इस विषय पर जितना ज्यादा हो सके उतना बात करें। इससे दोनों के भीतर अध्यात्मिकता का भाव आएगा।

अपने आप को पहचानें: जब आप खुद को पहचान जाते है तो उससे बेहतर कुछ और नहीं होता है। इसके बाद आपको किसी भी पहचान की जरूरत नहीं होती है। उसके साथ ही आप जब खुद को पहचान जाते हैं तो अपने आप को परिस्थिति के साथ लड़ने की क्षमता मिलती है और आपको अपने अच्छे-बुरे और सही-गलत की पहचान होने लगती है। यह सभी बातें आपको आपके वर्कप्लेस में सहायता करती हैं। [ये भी पढ़ें: वृद्धावस्था में भी रहें अध्यात्म के करीब]

प्रश्न करें: अध्यात्मिकता के लिए जरुरी है कि आप के भीतर उसे जानने की जिज्ञासा हो। यह जिज्ञासा जब तक आपके अंदर नही होगी आप अध्यात्मिकता के करीब नही जाएंगे। वर्क प्लेस में अगर आप अध्यात्मिक माहौल चाहते हैं तो इससे जुड़े सवालों को अपने साथी के साथ करें। ऐसा करने से आपको अध्यात्मिकता के बारे में बहुत सी बातें पता लग जाएगी जो आपके लिए बहुत ही फायदेमंद हैं।

अपने अध्यात्मिक चिह्न को वर्क प्लेस पर रखें: आप जहां भी काम करतें हो, वहां पर थोड़ी सी जगह अपने अध्यात्मिक चिह्न के लिए भी बनाएं। जिससे कि आपको उसके साथ अध्यात्मिक जुड़ाव हो और आप अपने वर्कप्लेस पर भी अध्यात्म से जुड़े रहें। यह चिह्न कुछ भी हो सकता है। कोई माला, मूर्ति, तस्वीर या और कुछ। जरुरी है कि आपका उसमें विश्वास और आस्था हो।

अपने विश्वास पर बने रहें: आप जब भी किसी को बताएंगे कि आप अध्यात्मिक हैं या आप अध्यात्म को मानते हैं तो उनमें से कुछ लोग होंगे जो आप पर विश्वास करेंगे, लेकिन बहुत से लोग होंगे जो आपको अंधविश्वासी मानेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि आप अध्यात्म पर से अपना विश्वास खो दें। अपने विश्वास को बनायें रखें और जो भी इस तरह से आपके साथ बात करे तो उसे इसके फायदों के बारें में बतायें। [ये भी पढ़ें: खुद को जोड़े अध्यात्म से और पाएं ये लाभ]

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