जानें कुण्डलिनी चक्र कैसे आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं

how charkras affects on our health

अध्यात्मिक रूप से हर व्यक्ति में सात चक्र होते है। जो हमारी रीढ़ की हड्डी से लेकर सिर तक फैला होता है। इन्हें कुण्डलिनी चक्र भी कहा जाता है। इन चक्रों को विज्ञान भी मनाता है, चीन के पारंपरिक चिकित्सीय पद्यति में इन चक्रों का विशेष महत्व है। हम अब तक यह मानते हैं आये थे कि इन चक्रों का संबंध व्यक्ति के साथ सिर्फ अध्यात्मिक रूप से जुड़ा होता है। लेकिन ऐसा नहीं है इन चक्रों का सम्बन्ध हमारे शरीर से भी होता है और हमारे शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन्स से भी इसका सम्बन्ध होता है। इन चक्रों का प्रभाव हमारे शरीर के अंगों पर भी पड़ता है। आइए जानते है कि कौन से चक्र हमारे शरीर के किस हिस्से जुड़ा है और उस पर उनका क्या प्रभाव पड़ता है। [ये भी पढ़ें: बिना धार्मिक हुए भी आप हो सकते है आध्यात्म के करीब]

सात चक्र और उससे संबंधित शारीरिक अंग
सात चक्र                        अंग

  • मूलाधार        –   घुटना, एड़ियां, पैर, कुल्हे।
  • स्वाधिस्तना   –   पीठ का निचला हिस्सा, बड़ी आंत, जननांग, मूत्राशय।
  • मनिपुरा       –   लिवर ,पित्ताशय की थैली, गुर्दे और छोटी आंत।
  • अनाहत       –   दिल, फेफड़े, हथियार, बाहें, स्तन, ऊपरी पीठ, कंधों, पसलियों।
  • विशुद्धा       –    गले, गर्दन, जबड़े, दांत, कंधों, कान, मुंह।
  • अजन         –   आँखें, सिर, मस्तिष्क, नाक, साइनस, माथे।
  • सहस्रार       –    सिर।

इन सात चक्रों का स्वास्थ  पर पड़ने वाला प्रभाव:
1.मूलाधार (रूट): इस चक्र के बंद हो जाने के कारण व्यक्ति को थकावट, भूख में परिवर्तन, वित्तीय तनाव, उत्सुकता, घबराहट आदि जैसे समस्याएं होने लगती है। इसके पीछे का कारण होता है, इस चक्र से संबंधित अंगों में एड्रिनल नामक हार्मोन्स में असंतुलन होने लगता है जिसके कारण यह समस्याएं देखने को मिलती है।

2.स्वाधिस्तना (सेक्रल): इस चक्र के बंद होने के कारण व्यक्ति को कमर के नीचे काफी ज्यादा दर्द, पेशाब और किडनी में इन्फेक्शन, अल्सर, बांझपन, असामान्य माहवारी, भावनात्मक बदलाव देखने को मिलता है। ऐसा होने का कारण होता है उससे सम्बंधित अंगों में हार्मोन्स का असंतुलित होना, इसमें प्रमुख रूप से प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजेन, टेस्ट्स हार्मोन्स शामिल होते हैं। [ये भी पढ़ें: अध्यात्मिक होने के लिये जरुरी है खुुद से रुबरु होना]

3.मनिपुरा (सोलर प्लेक्सस) : मनिपुरा चक्र में बंद हो जाने के कारण डायबिटीज, अग्नाशयशोथ, भाटा, वजन के संबंधित समस्याएं, अल्सर, क्रोध आदि जैसी स्वास्थ्य सम्बंधित दिक्कतें होने लगती हैं। इन समस्याओं के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार पैंक्रियास से निकलने वाले हार्मोन्स होते हैं।

4. अनाहत ( हार्ट): अनाहत चक्र व्यक्ति के दिल, फेफड़े, बाहें, स्तन, ऊपरी पीठ, कंधों, पसलियों से संबंध रखता है। इस चक्र में बंद होने पर व्यक्ति को फेफड़े की समस्याएं, पाचन समस्याओं, कम ऊर्जा, ईर्ष्या, क्षमा करने में असमर्थता जैसी समस्याएं देखने को मिलती है। यह चक्र हमारे शरीर में पाए जाने वाले थाइमस नामक हार्मोन ऑर्गन से संबधित होता है।

5.विशुद्धा (थ्रोट): इस चक्र के बंद होने पर यह सीधे तौर पर व्यक्ति के गले और उसके आस-पास के हिस्से में समस्या देखने को मिलता है। इसके बंद होने पर गले में लंबे समय में तक दर्द रहता है, दांतों से जुड़ी समस्याएं होने लगती है और गर्दन में दर्द रहने लगता है। इस चक्र का संबंध हमारे गले के निचले हिस्से में पाया जाने वाला हार्मोन थाइरॉइड से होता है।

6.अजन (थर्ड ऑय): इस चक्र का सम्बन्ध व्यक्ति के सिर और उसके आस-पास के अंगों जैसे नाक, आंख, माथा से होता है। अजन चक्र के बंद हो जाने के कारण व्यक्ति को सिर में दर्द, मेमोरी का कमजोर हो जाना, मानसिक रूप से थकावट अादि समस्याएं होने लगती है। इसका कारण होता है हमारे शरीर में पाए जाने वाले पिट्यूटरी हार्मोन के कारण होता है।

7.सहस्रार (क्राउन): यह चक्र व्यक्ति के शरीर में सबसे ऊपर का चक्र माना जाता है, जिसके बंद होने पर व्यक्ति को मानसिक विकार, डिप्रेशन, एंग्जायटी, सिरदर्द जैसे समस्याएं होने लगती है। जो हमारे शरीर में पीनल नामक हार्मोन के कारण होता है।  [ये भी पढ़ें: उपाय जो आपके जीवन में लाएंगे अध्यात्मिकता का प्रकाश]

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