जानिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉक थेरेपी क्यों है उपयोगी

Why talk therapy is useful for mental health

मानिसक रूप से विकृत व्यक्ति का उपचार करना, शारीरिक रूप से बीमार व्यक्ति से ज्यादा मुश्किल होता है। मानसिक रोगों से पीड़ित व्यक्ति के उपचार के लिए दवाइयों से ज्यादा थेरेपी पर जोर दिया है। इन थेरेपी में एक प्रमुख थेरेपी है- टॉक थेरेपी। टॉक थेरेपी में मानसिक रूप से अस्वस्थ्य व्यक्ति को बातों के माध्यम से, ग्रुप डिस्कशन, काउंसिलिंग और अन्य एक्टिविटी के माध्यम से उसकी सोच बदल कर, उसके डर, उसके विकार को कम किया जाता है। [ये भी पढ़ें: कहीं आपकी चिंता का कारण एंग्जायटी डिसऑर्डर तो नहीं]

टॉक थेरेपी क्या है?
यह थेरेपी, विचारों, सोचने-समझने की क्षमता, बातों पर आधारित होती है। इसमें मानसिक विकार की मार झेल रहे व्यक्ति की काउंसिलिंग की जाती है। जिसमें उसके बीते समय में घटित घटनाओं  का पता लगाया जाता है और साथ-साथ उन्हें भुलाने की भी कोशिश की जाती है। इस तरह का उपचार फोबिया, एंग्जायटी, मल्टीपल डिसऑर्डर जैसे भावनात्मक मानसिक डिसऑर्डर की रोकथाम के लिए किया जाता है।

टॉक थेरेपी बनाम दवाइयां- क्या है बेहतर:
Why talk therapy is useful for mental healthइस तरह का विवाद काफी समय पहले से चल रहा है। इसमें इस बात पर अब तक संशय बना हुआ है कि मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति के उपचार के लिए जरुरी क्या है? उसके लिए थेरेपी ज्यादा जरुरी है या फिर दवाइयों से भी इसका इलाज किया जा सकता है। मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर टॉक थेरेपी को माना जाता है, इससे ज़रूरी नहीं कि व्यक्ति को परिणाम को बहुत जल्दी मिलने लगे लेकिन यह समस्या को जड़ से ख़त्म करने की क्षमता रखती है। वहीं इसके विपरीत दवाइयों से होने वाले उपचार का असर बहुत जल्दी तो होता है लेकिन इसमें समस्या कुछ समय के लिए टल जाती है। जब तक इन दवाइयों का असर रहता है व्यक्ति को इस तरह की समस्या नहीं होती है लेकिन दवा लेना बंद करते ही उनमें फिर से समस्या आने की संभावना होती है। इसके अलावा दवाइयों से होने वाले उपचार में साइड इफेक्ट की संभावना भी बनी रहती है। लेकिन कई ऐसे मानसिक विकार भी है जिनका उपचार थेरेपी के मुकाबले दवाइयों से ज्यादा अच्छे से होती है। इसलिए दोनों तरह के उपचार परिस्थिति और विकार के आधार पर किया जाता है। [ये भी पढ़ें: भीड़ से डरने वाले लोग हो सकते हैं एग्रोफोबिया के शिकार]

टॉक थेरेपी का लक्ष्य:
Why talk therapy is useful for mental health किसी भी थेरेपी का लक्ष्य विकार या समस्या को जड़ से खत्म कर देना होता है। टॉक थरेपी के मुख्य रूप से दो लक्ष्य होते हैं पहला- जो भी व्यक्ति किसी भी मानसिक विकार की अवस्था से जूझ रहा है, उसे उस परिस्थिति से निकाल कर एक बेहतर परिस्थिति में लाना। इसका दूसरा लक्ष्य है- व्यक्ति को इस परिस्थिति से निकालने के बाद उसे इस तरह की समस्या से लड़ने के लिए तैयार करना। इस परिस्थिति से निकलने के लिए पीड़ित को कुछ खास बातें सिखाई जाती हैं जिससे वह अपने आत्मविश्वास को कम ना होने दे।[ ये भी पढ़ें:मजबूत दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आहार में लायें ये बदलाव]

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