आत्मविश्वास और अतिआत्मविश्वास में क्या फर्क होता है

what is the difference between self confidence and overconfidence

जीवन में आगे बढ़ने के लिए खुद पर विश्वास करना जरुरी होता है। खुद पर आपका यह भरोसा ही आपका आत्मविश्वास कहलाता है। आत्मविश्वास जीवन में खुशियां, सम्मान, सफलता लाता है। लेकिन जरुरत से ज्यादा आत्मविश्वास आपके लिए हानिकारक हो सकता है। आत्मविश्वास जहां सफलता का कारण होता है वहीं अतिआत्मविश्वास के कारण आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच ज्यादा फर्क नहीं होता है।आइए जानते हैं कि कैसे आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच फर्क को समझें और खुद को अति आत्मविश्वासी होने से बचाएं।[ये भी पढ़ें: खुद की इज्जत करने से क्या फायदे होते हैं]

1.आलोचना स्वीकार नहीं करते: गलती हर व्यक्ति से होती है लेकिन जरुरत से ज्यादा आत्मविश्वासी लोग अपनी आलोचना कभी स्वीकार नहीं करते हैं। आत्मविश्वासी लोग गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ते हैं लेकिन अति आत्मविश्वास वाले लोग गलती मानने की बजाय बहस करते हैं।

2. खुद को सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली मानते हैं: आप अपना काम बेहतर ढंग से कर रहें यह मानना आत्मविश्वास है। लेकिन अगर आप यह मानते हैं कि सिर्फ आप ही अपना काम बेहतर ढंग से कर रहें है तो यह अति आत्मविश्वास होता है। अति आत्मविश्वास के कारण लोग अक्सर चुनौतियों को देख नहीं पाते हैं जो कि बाद में उनके लिए परेशानी का सबब बन जाती है। [ये भी पढ़ें: वीडियो गेम खेलने की वजह से बच्चों पर क्या दुष्प्रभाव होता है]

3. खुद को अति महत्वपूर्ण मानना: खुद को महत्वपूर्ण समझना और अपना सम्मान करना अच्छा होता है। लेकिन अगर आप खुद को जरुरत से ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं और यह समझते हैं कि कोई भी काम आपके बिना नहीं हो सकता तो यह अति आत्मविश्वास होता है।

4. दूसरों का मजाक बनाते हैं: हंसी-मजाक करना अच्छा होता है। आत्मविश्वास से भरपूर लोग भी हंसी-मजाक जरुर करते हैं लेकिन जरुरत से ज्यादा आत्मविश्वासी लोग दूसरों का मजाक बनाते हैं। वे दूसरों को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

5.खुद को अति-आत्मविश्वासी बनाने से कैसे बचें: आपको खुद यह तय करना पड़ेगा कि आप में आत्मविश्वास है या अति आत्मविश्वास। आपको जागरुक रहना होता है कि कहीं आपका आत्मविश्वास जरुरत से ज्यादा तो नहीं हो रहा है। दूसरों का सम्मान करें, आलोचनाओं को स्वीकार करें, निरंतर आगे बढ़े और गलतियों से सीखते चलें ताकि आप में जरुरत से ज्यादा आत्मविश्वास ना पैदा हो।[ये भी पढ़ें: जलन की भावना कैसे दूर करें]

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