स्चिज़ॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर जो बढ़ा देता है रिश्तों में दूरी

what is schizoid personality disorder

इस तरह के मानसिक विकार में व्यक्ति के व्यवहार बदलाव आने लगता है। आश्चर्य की बात यह है कि जिस व्यक्ति को यह विकार होता है उसे इसके बारें में कुछ भी अजीब या विचित्र नहीं लगता है। कहने का तात्पर्य है कि उसे इस बात का जरा भी एहसास नहीं होता है कि उसे किसी भी तरह का कोई भी मानसिक विकार है। इसमें व्यक्ति को लोगों के प्रति उसमें उदासीनता का भाव देखने को मिलता है। इसके लक्षणों के आधार पर यह स्किज़ोफ्रेनिया के ही सामान एक मानसिक विकार माना जा सकता है। इस मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्ति बहुत अपने आप को अकेला रखना चाहता है। [ये भी पढ़ें: आपके गुस्से पर लगाम लगाएंगे ये उपाय]

स्चिज़ॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर का कारण: इस तरह के मानसिक विकार में दो तरह के कारण देखने को मिलते हैं। अनुवांशिक और वातावरण के साथ-साथ कुछ मनोचिकित्सक बचपन में हुए किसी बुरे अनुभव को भी इस तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने का कारण मानते हैं। अनुवांशिक रूप से यह विकार किसी व्यक्ति को उसके परिवार के सदस्यों से ही होता है।

स्चिज़ॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर के लक्षण: स्चिज़ॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर में व्यक्ति भीड़-भाड़ वाले इलाकों, समूह में काम करने से कतराते हैं। इस तरह का मानसिक विकार व्यक्ति के वयस्क होने पर दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त नीचे कुछ लक्षण दिए गए हैं  जो पूरी तरह से इस तरह के मानसिक विकार को दर्शाते हैं।

  • ऐसे में लोगों के साथ घुल-मिल नहीं पाते हैं।
  • यह उन नौकरी और एक्टिविटी को पसंद करते हैं जिसमें वह अकेले ही काम करें।
  • यह किसी को दोस्त नहीं बनाना चाहते हैं।
  • बाहर कम निकलना, लोगों से कम मिलना। [ये भी पढ़ें: बातें भूलने की समस्या के पीछे हो सकते हैं ये कारण

स्चिज़ॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर जांच: इस तरह के मनोविकार की जांच के लिए पहले पीड़ित व्यक्ति के स्वास्थ्य के बारे में पूरी जानकारी ली जाती है, उसके बाद इसके लक्षणों को पहचाना जाता है, जिसके आधार पर इस तरह के रोग के होने और न होने की पुष्टि की जाती है। जिस व्यक्ति को इस तरह की बीमारी होती उस व्यक्ति का पूरी तरह से साक्षात्कार किया जाता है ताकि इस विकार के अहम कारणों को पहचाना जा सके।

स्चिज़ॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर का उपचार: इस तरह के मानसिक विकारों के इलाज के लिए उन्हीं उपचारों का सहारा लिया जाता है जो अन्य मानसिक विकारों में प्रयोग में लाया जाता है। पीड़ित व्यक्ति को इस मानसिक विकार से उभारने के लिए काउंसलिंग का सहारा लिया जाता है। इसके अलवा इस तरह के मानसिक विकार के पीछे कई बार डिप्रेशन भी होता है। इसलिए दवाओं के तौर पर इसके उपचार के लिए एंटी-डिप्रेशन दवाओं का सेवन किया जाता है। काउंसलिंग के अलावा कुछ खास तरह की थेरेपी को स्चिज़ॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर के उपचार के लिए प्रयोग में लाया जाता है, जिसमें थेरेपी और ग्रुप थेरेपी को खास तौर पर आजमाया है। [ये भी पढ़ें: मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरुरी नहीं है कोई दवा या थेरेपी]

 

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